Road Of ACCIDENTS


Road of Accidents: बस में जलने की गंध और आग की आशंका थी।… यात्रियों ने शोर मचाया, ड्राइवर और परिचालक को चेताया।… लेकिन FIR में दर्ज आरोप के मुताबिक़, उन्होंने बात को गंभीरता से नहीं लिया।… और कुछ ही देर बाद बस में आग लग गई।… आज इसी हादसे के बहाने बात करते हैं कि हमारी सड़कें सुरक्षित क्यों नहीं हैं।

सबसे पहले यह जान लेते हैं की हुआ क्या था(Road of Accidents)

बता दें कि 23 सितंबर 2026 की रात… ग्रेटर नोएडा के Jewar इलाके में Yamuna Expressway पर दिल्ली से महोबा जा रही एक AC sleeper bus में आग लग गई।… बस दिल्ली के Kashmere Gate से महोबा, उत्तर प्रदेश जा रही थी।… ख़बरों के मुताबिक़ इसमें नौ यात्रियों की जलने और दम घुटने से मौत हो गई, जबकि 20 से ज्यादा लोगों को rescue teams ने बचा लिया। सबसे हैरानी की बात यह है कि यात्रियों ने पहले ही बस में जलने की गंध और धुआँ महसूस होने की शिकायत की थी।

साफ कर दें की FIR में दर्ज एक यात्री की शिकायत के मुताबिक़, यात्रियों ने driver और conductor से बस रोककर जाँच करने को कहा था।लेकिन आरोप है कि उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया और बस चलती रही।… इसके बाद आग लगी। पुलिस ने drivers और conductor को गिरफ्तार कर लिया।

अब आपको बताते हैं वह बात, जो सबसे ज़्यादा चौंकाती है।… जाँच में सामने आई जानकारी के मुताबिक़ यह bus मध्य प्रदेश से संचालित हो रही थी, लेकिन उसका registration बिहार में हुआ था।… उसका fitness certificate राजस्थान से बना था और pollution certificate हरियाणा से जारी हुआ था। यानी एक bus और चार राज्यों से जुड़े काग़ज़।… लेकिन साफ़ कर दें, अलग-अलग राज्यों से certificate जारी होना अपने-आप में यह साबित नहीं करता कि bus अवैध थी।

लेकिन…असली सवाल यह है कि इन certificates की validity, bus की वास्तविक condition और… safety compliance की जाँच ठीक से हुई थी या नहीं।… सवाल यह भी है कि अगर bus में कोई कमी थी, तो उसे सड़क पर चलने की अनुमति कैसे मिलती रही?… और अगर उसके काग़ज़ों या safety में कोई समस्या थी, तो उसे रोकने-टोकने वाला कोई क्यों नहीं था?… यहाँ किसी एक राज्य या अधिकारी को दोषी ठहराना सही तो नहीं है पर ऐसी गड़बड़ियों को हल्के में लेना… एक बड़ी भूल होगी…

लेकिन इतना साफ़ है कि… अलग-अलग राज्यों में बँटा हुआ transport system monitoring को मुश्किल बना सकता है।

अब जानते हैं की लापरवाही किस-किस की थी?…

साफ़ कर दें कि इस हादसे की जिम्मेदारी जाँच पूरी होने से पहले किसी एक व्यक्ति या संस्था पर तय नहीं की जा सकती।… एक तरफ़ bus operators की जिम्मेदारी है कि vehicle की regular servicing, emergency exits, fire extinguishers और passenger safety व्यवस्था ठीक हो।… दूसरी तरफ़ drivers और conductors की जिम्मेदारी है कि यात्रियों की safety warning को गंभीरता से लें और खतरा दिखते ही vehicle रोकें।…

और तीसरी तरफ़… transport authorities की जिम्मेदारी है कि registration, fitness certificate, permits और safety standards की regular जाँच हो।… अगर किसी vehicle में बार-बार mechanical problem आ रही थी और operator को इसकी जानकारी थी, तो यह भी जाँच का हिस्सा हो।

वहीं बाद की रिपोर्टों में पुलिस ने यह भी कहा कि transport company के staff ने पहले vehicle की कुछ समस्याओं की जानकारी manager को दी थी… और उनकी अनदेखी की गई या नहीं, इसकी जाँच की जा रही है।… ख़बरों के हवाले से यह भी सामने आया कि Noida Police, Delhi Police को पत्र लिखकर पूछेगी कि Kashmere Gate से इतनी बड़ी संख्या में buses कथित तौर पर बिना जरूरी compliance के कैसे चल रही थीं। पर इस दावे की पूरी जिम्मेदारी और सच्चाई जाँच के बाद ही साफ़ होगी।

हालांकि इस हादसे से उठने वाला बड़ा सवाल सिर्फ़ एक bus या एक route तक सीमित नहीं है।… विकास के लिए अच्छी और बिना रुकावट वाली सड़कें जरूरी हैं।… लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कि उन पर सफर सुरक्षित हो।… पिछले कुछ वर्षों में expressways को तेजी और विकास की पहचान बताया गया है।… लेकिन expressway पर speed ज्यादा होती है, दूरी लंबी होती है और किसी emergency में मदद पहुँचने में समय लग सकता है।

इसलिए ऐसी roads पर चलने वाली buses की fitness, emergency exits, fire safety equipment, driver training और passenger capacity की जाँच और भी जरूरी हो जाती है। वहीं एक चुभने वाला सवाल…

बड़ा हादसा होने के बाद administration जितना active दिखता है, उतनी सक्रियता आम दिनों में क्यों नहीं दिखती?… अगर buses की regular जाँच, surprise inspection और route-level monitoring पहले से होती, तो शायद कुछ हादसे रोके जा सकते थे।… लेकिन यात्रियों की warnings, emergency response और safety compliance-इन तीनों की जाँच ज़रूर होनी चाहिए।

तो याद रखिए, चमकदार सड़क का मतलब सुरक्षित सड़क नहीं होता। सुरक्षित सफर के लिए अच्छी road के साथ fit vehicle, trained staff, emergency exit, fire safety equipment और जवाबदेह monitoring भी जरूरी है।… अगर आप bus में सफर करते हैं और जलने की गंध, धुआँ, असामान्य गर्मी या कोई और खतरा महसूस हो, तो चुप मत बैठिए।… Driver और conductor को तुरंत बताइए।

जरूरत पड़े तो emergency exit और दूसरे यात्रियों की मदद से सुरक्षित जगह निकलने की कोशिश कीजिए। और police या emergency services को सूचना दीजिए। लेकिन याद रखिए, यात्रियों की सतर्कता जरूरी है- सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी यात्रियों पर नहीं डाली जा सकती की वे स्वयं अपना बचाव करें।…

आपको क्या लगता है, ऐसे हादसों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी किसकी है?… Bus operator की, driver की या monitoring system की?… कमेंट में बताइए।

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By Admin

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