नौकरी चली गई, परीक्षा में नंबर नहीं आए, या कारोबार बंद हो गया।… उस पल हमें लगता है कि सब ख़त्म हो गया।… लेकिन क्या सच में ऐसा है? आज इसी पर बात करते हैं।…
बता दें कि हमें अक्सर यह भ्रम रहता है कि आगे बढ़ना एक सीधी सड़क है, जिस पर चलते जाओ तो हर क़दम मंज़िल के पास ले जाता है।… पर असल ज़िंदगी शायद ही कभी इतनी सीधी होती है। क्योंकि इसमें निराशा आती है, योजनाएँ फ़ेल होती हैं, कई बार मौक़े हाथ से निकल जाते हैं।…
लेकिन यह सब सफ़र का स्वाभाविक हिस्सा है। और कई बार ज़िंदगी… सफलता का रास्ता दिखाने से पहले असफलता से गुज़रना सिखाती है।
साफ़ कर दें कि इस वीडियो का सबसे ज़रूरी विचार यही है कि… असफलता शायद ही कभी स्थायी होती है।… इसलिए इसे पूर्ण विराम के रूप में नहीं बल्कि एक पड़ाव के रूप में समझना चाहिए।
असफलता हमें सोचने का मौक़ा देती है कि क्या गलत हुआ और अगली बार रास्ता कैसे बेहतर बनाया जाए।… अब समझाते हैं इसे उदाहरण से।… चोट खाकर लौटने वाला खिलाड़ी मन से और मज़बूत हो सकता है, क्योंकि चोट उसे अपनी सीमाएँ समझना और धैर्य रखना सिखा सकती है।… परीक्षा में फ़ेल हुआ विद्यार्थी अपनी कमियाँ पहचानकर अगली बार बेहतर तैयारी कर सकता है।… वहीं एक सुंदर बात यह भी है कि सफलता आत्मविश्वास देती है, लेकिन असफलता आत्ममंथन का मौक़ा देती है।
हालांकि यह भी सच है कि नतीजे तुरंत नहीं मिलते।… जैसे नदी को चट्टान काटने के लिए कोई असाधारण ताक़त नहीं चाहिए।… उसका लगातार बहना ही धीरे-धीरे रास्ता बना देता है। उसी प्रकार से उपलब्धियाँ भी बनती हैं समय से, लगातार कोशिश से और छोटे-छोटे सुधारों से।… बेशक
रोज़ का अनुशासन और धैर्य उबाऊ हो सकता है लेकिन… वही धीरे-धीरे टिकाऊ बदलाव की नींव रखता है।…
ऐसे में तीन बातें जो आपको कभी नहीं भूलनी चाहिए…
एक, गिरना कमज़ोरी नहीं है।…क्योंकि गिरने के बाद उठने की इच्छा ही इंसान की असली ताक़त है। दो, अपनी यात्रा की तुलना दूसरों से मत कीजिए।…क्योंकि किसी की सफलता जल्दी दिखती है, किसी की देर से। और जो सफलता दिखती है, उसके पीछे अक्सर ऐसा संघर्ष छिपा होता है जिसे दुनिया नहीं देखती। तीन, असफल होने के डर से कोशिश ही न करना सबसे बड़ा नुक़सान है।… क्योंकि अगर हम प्रयास ही न करें, तो संभावनाओं के कई दरवाज़े कभी खुलेंगे ही नहीं।
तो अब एक बात अपने दिल में बैठा लीजिए।… जब हम असफलता को अंत नहीं, पड़ाव मानते हैं, निराशा को ठहराव नहीं, आत्ममंथन का मौक़ा मानते हैं, और बाधाओं को दीवार नहीं, सीढ़ी की तरह देखते हैं, तब ज़िंदगी का मतलब अपने आप बदलने लगता है।
लेकिन एक बात और याद रखिए-हर असफलता का नतीजा तुरंत सफलता नहीं होता।… कभी-कभी उससे सिर्फ़ सीख मिलती है, उसमें कभी दिशा बदलनी पड़ती है और कभी दोबारा कोशिश करने से पहले थोड़ा रुकना भी ज़रूरी होता है।… आपकी ज़िंदगी में कोई ऐसी हार रही है जिसने आपको कुछ बड़ा सिखाया? कमेंट में बताइए।
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