History of Goa

History Of Goa: यह अध्ययन मार्गदर्शिका गोवा के प्राचीन इतिहास, 450 वर्षों के पुर्तगाली औपनिवेशिक शासन, स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नायकों, और 1961 में भारत में इसके सफल एकीकरण की विस्तृत जानकारी प्रदान करती है।

1. प्राचीन इतिहास और कंदव (कदम्ब) राजवंश

पुर्तगालियों के आगमन से बहुत पहले, गोवा(History Of Goa) अपनी प्राकृतिक सुंदरता और व्यापारिक महत्व के लिए प्रसिद्ध था।

  • प्राचीन नाम: प्राचीन काल में इस क्षेत्र को ‘गोमान तक’ के नाम से जाना जाता था। यह समुद्र, पहाड़ों, मछुआरों और समुद्री व्यापार की भूमि थी।
  • प्रमुख राजवंश: यहाँ मौर्य साम्राज्य, सातवाहन और विशेष रूप से कंदव (कदम्ब) वंश का शासन रहा।
  • कंदव राजवंश (10वीं सदी): 10वीं शताब्दी में कंदव वंश ने गोवा को एक विशाल व्यापारिक बंदरगाह के रूप में विकसित किया। इस दौरान यहाँ अरब व्यापारी मसाले और घोड़ों के व्यापार के लिए आते थे, जिससे गोवा प्राचीन काल से ही एक अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक केंद्र बना रहा।

2. पुर्तगाली औपनिवेशिक शासन (1510–1961)

गोवा(History Of Goa) में पुर्तगाली शासन की शुरुआत 16वीं शताब्दी के आरंभ में हुई, जो अगले 450 से अधिक वर्षों तक जारी रही।

  • कब्जा (1510): पुर्तगाली कमांडर अफ़ोंसो डी अल्बूकर (Afonso de Albuquerque) ने बीजापुर के सुल्तान यूसुफ आदिल शाह को हराकर गोवा पर अधिकार कर लिया।
  • प्रशासनिक केंद्र: ‘ओल्ड गोवा’ को पुर्तगाली भारत की राजधानी बनाया गया। यहाँ ‘बेसिलिका ऑफ बॉम जीसस’ और ‘सी कैथड्रल’ जैसे विशाल चर्च बनाए गए, जो औपनिवेशिक शक्ति के प्रतीक थे।
  • गोवा इनक्विजिशन (1560): धार्मिक परिवर्तन के लिए 1560 में इनक्विजिशन की शुरुआत हुई। लोगों पर धर्म बदलने का दबाव डाला गया और कई हिंदू मंदिरों को नष्ट कर दिया गया।
  • राजनीतिक स्थिति: 1951 में पुर्तगाल ने अपने संविधान में संशोधन कर गोवा को ‘औपनिवेशिक कब्जे’ के बजाय एक ‘ओवरसीज प्रोविंस’ (विदेशी प्रांत) घोषित किया। इसका उद्देश्य गोवा को नवगठित ‘नाटो’ (NATO) सैन्य गठबंधन का हिस्सा बनाना था ताकि भारत के हमले की स्थिति में सामूहिक सुरक्षा का लाभ उठाया जा सके।

3. गोवा का स्वतंत्रता आंदोलन(History Of Goa)

भारत की 1947 की आजादी के बाद भी गोवा पुर्तगाली शासन के अधीन रहा, जिसके खिलाफ एक लंबा संघर्ष चला।

प्रमुख नेता और संगठन

नामभूमिका / योगदान
त्रिस्ताव डी ब्रगांका कुन्हा (T.B. Cunha)इन्हें ‘गोवा के राष्ट्रवाद का जनक’ कहा जाता है। उन्होंने 1928 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में ‘गोवा नेशनल कांग्रेस’ की स्थापना की।
डॉ. राम मनोहर लोहिया18 जून 1946 को उन्होंने गोवा में एक ऐतिहासिक रैली का नेतृत्व किया, जिसने नागरिक स्वतंत्रता और भारत के साथ एकीकरण का आह्वान किया। इस दिन को अब ‘गोवा क्रांति दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
आजाद गोमंतक दल (AGD)यह एक सशस्त्र समूह था जिसने पुर्तगाली शासन के खिलाफ आक्रामक संघर्ष किया। इसे भारत सरकार का वित्तीय और रसद सहयोग प्राप्त था।

4. एकीकरण की राह और कानूनी मिसालें

गोवा को मुक्त कराने से पहले भारत ने राजनयिक और कानूनी रास्तों का उपयोग किया।

  • राजनयिक प्रयास: भारत और पुर्तगाल के बीच राजनयिक संबंध 1949 में स्थापित हुए, लेकिन 1950 के बाद गोवा, दमन और दीव को सौंपने से पुर्तगाल के इनकार के कारण इनमें गिरावट आई। 1955 में भारत ने पुर्तगाल के साथ राजनयिक संबंध तोड़ लिए।
  • दादरा और नगर हवेली का मामला: 1954 में इन क्षेत्रों को भारत समर्थक बलों द्वारा मुक्त कराया गया।
  • अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) का फैसला (12 अप्रैल 1960): पुर्तगाल ने ICJ का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने फैसला सुनाया कि पुर्तगाल के पास इन क्षेत्रों पर संप्रभु अधिकार हैं, लेकिन भारत को अपने क्षेत्र से पुर्तगाली सशस्त्र कर्मियों को गुजरने की अनुमति देने से इनकार करने का भी अधिकार है।
  • सत्याग्रह (1955): अगस्त 1955 में, लगभग 3,000-5,000 निहत्थे भारतीय कार्यकर्ताओं ने गोवा में प्रवेश करने का प्रयास किया, जिस पर पुर्तगाली पुलिस ने गोलियां चलाईं, जिसमें 21 से 30 लोगों की मौत हो गई।

5. ऑपरेशन विजय (1961)

जब राजनयिक प्रयास विफल हो गए, तो भारत सरकार ने सैन्य कार्रवाई का सहारा लिया।

  • शुरुआत: 17-19 दिसंबर 1961 (लगभग 36 घंटे की कार्रवाई)।
  • नेतृत्व: जमीनी सेना का नेतृत्व मेजर जनरल के.पी. कैंडेट (K.P. Candeth) ने किया, जबकि हवाई संसाधनों की कमान एयर वाइस मार्शल एर्लिक पिंटो के पास थी।
  • प्रमुख सैन्य कार्रवाइयाँ:
    • हवाई हमले: भारतीय कैनबरा बमवर्षकों ने डबोलिम हवाई अड्डे के रनवे को नष्ट कर दिया।
    • नौसैनिक युद्ध: मुरमुगाओ बंदरगाह पर पुर्तगाली युद्धपोत ‘NRP अफ़ोंसो डी अल्बूकर’ और भारतीय युद्धपोतों ‘INS बेतवा’ और ‘INS ब्यास’ के बीच भीषण युद्ध हुआ। अंततः पुर्तगाली जहाज को नष्ट कर दिया गया।
    • अंजिदिव द्वीप: भारतीय नौसैनिकों ने भारी गोलाबारी के बाद इस द्वीप पर कब्जा किया।
  • आत्मसमर्पण: 19 दिसंबर 1961 को रात 08:30 बजे, पुर्तगाली गवर्नर जनरल मैनुअल एंटोनियो वसालो ई सिल्वा ने आत्मसमर्पण के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। पुर्तगाली राष्ट्रपति के ‘अंतिम व्यक्ति तक लड़ने’ और ‘गोवा को नष्ट करने’ के आदेश के बावजूद, गवर्नर जनरल ने अनावश्यक जनहानि को रोकने के लिए आत्मसमर्पण का फैसला किया।

6. युद्ध के बाद के परिणाम और एकीकरण

  • सैन्य शासन: स्वतंत्रता के बाद शुरू में मेजर जनरल के.पी. कैंडेट को सैन्य गवर्नर नियुक्त किया गया।
  • नागरिक सरकार: 8 जून 1962 को सैन्य शासन को हटाकर एक नागरिक सरकार और 29 सदस्यीय सलाहकार परिषद का गठन किया गया।
  • पुर्तगाल की प्रतिक्रिया: पुर्तगाल ने कई वर्षों तक भारत के इस कदम को मान्यता नहीं दी और राजनयिक संबंध तोड़ लिए। पुर्तगाली सरकार ने उन गोवावासियों को नागरिकता की पेशकश की जो पुर्तगाल जाना चाहते थे।

7. गोवा की भूगोल और संस्कृति

गोवा की पहचान उसकी अनूठी मिश्रित संस्कृति से है, जो भारतीय और यूरोपीय तत्वों का संगम है।

  • भूगोल: गोवा कोंकण क्षेत्र में स्थित है, जो पश्चिमी घाट द्वारा दक्कन के पठार से अलग होता है। इसकी सबसे ऊंची चोटी ‘सोंसोगोर’ (Sonsogor) है।
  • नदियाँ: गोवा की सात प्रमुख नदियाँ हैं: जुआरी, मांडवी, तेरेखोल, चपोरा, गलगिबाग, कुंबरजुआ नहर, तलपोना और साल।
  • वन्यजीव: यहाँ डॉ. सलीम अली पक्षी अभयारण्य, महादेई वन्यजीव अभयारण्य, और मोल्लेम नेशनल पार्क जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं।
  • भाषा और संगीत: आधिकारिक भाषा ‘कोंकणी’ है (8वीं अनुसूची)। यहाँ का पारंपरिक संगीत ‘मंडो’ (Mando) और ‘डुलपोड’ (Dulpod) है।
  • भोजन: गोवा के प्रसिद्ध व्यंजनों में विंदालू और सोरपोटेल शामिल हैं, जो पुर्तगाली प्रभाव को दर्शाते हैं।

गोवा की मुक्ति केवल एक सैन्य जीत नहीं थी, बल्कि यह 450 वर्षों के औपनिवेशिक दमन के अंत और भारतीय संप्रभुता की पूर्णता का प्रतीक थी।

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