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Swarna Sub-1 धान की एक विशेष उन्नत किस्म है जिसे भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थानों द्वारा विकसित किया गया है। यह विशेष रूप से जलभराव (बाढ़) को सहन करने में सक्षम है और इसी कारण यह पूर्वी भारत के उन क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है जहाँ अक्सर मानसून के समय पानी भर जाता है। यह किस्म पारंपरिक Swarna किस्म का ही उन्नत रूप है जिसमें Sub-1 जीन जोड़ा गया है।

जलभराव में भी जीवित रहने वाली किस्म

Swarna Sub-1 की सबसे खास विशेषता यह है कि यह 10 से 14 दिन तक के जलभराव को सहन कर सकती है। सामान्य धान की फसल जहां इतनी बाढ़ में नष्ट हो जाती है, वहीं यह किस्म दोबारा से बढ़ना शुरू कर देती है, जिससे किसान को नुकसान से बचाया जा सकता है।

फसल अवधि और उपयुक्त क्षेत्र

  • फसल अवधि: 140-145 दिन
  • बुआई का समय: जून से जुलाई
  • अनुकूल क्षेत्र: बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम आदि बाढ़ग्रस्त क्षेत्र

उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता

  • औसत उत्पादन: 50-60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
  • दाना मध्यम आकार का और पीले रंग का
  • पकने पर स्वाद और गुणवत्ता अच्छी
  • कटाई और प्रसंस्करण के लिए उपयुक्त

रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता

Swarna Sub-1 में सामान्य धान रोगों जैसे ब्लास्ट, लीफ ब्लाइट और शीथ ब्लाइट के प्रति मध्यम प्रतिरोधक क्षमता पाई जाती है। समय पर जैविक और रासायनिक नियंत्रण से यह सुरक्षित रहती है।

किसानों के लिए लाभ

  • जलभराव से होने वाले नुकसान से बचाव
  • अच्छी उपज और बाजार में स्थिर मांग
  • सरकारी योजनाओं में प्राथमिकता
  • कम लागत में अधिक मुनाफा

कृषि वैज्ञानिकों की सिफारिश

कृषि वैज्ञानिकों और सरकारी संस्थानों द्वारा Swarna Sub-1 को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्राथमिकता से अपनाने की सलाह दी जाती है। यह किस्म खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने और किसान की आय को स्थिर रखने में सहायक है।

निष्कर्ष: क्यों चुनें Swarna Sub-1?

Swarna Sub-1 एक ऐसी उन्नत धान किस्म है जो जलभराव झेलने की क्षमता रखती है और विपरीत परिस्थितियों में भी अच्छा उत्पादन देती है। यह बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों के किसानों के लिए एक आशा की किरण है और “कम जोखिम, अधिक उत्पादन” की नीति पर काम करती है।

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