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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नेशनल सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया (NSEFI) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय एग्रो-RE समिट 2025 में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने फेडरेशन की वार्षिक रिपोर्ट और संदर्भ पुस्तक का विमोचन किया। इस सम्मेलन का उद्देश्य कृषि में अक्षय ऊर्जा के एकीकरण को बढ़ावा देना और नीति-निर्माताओं, विशेषज्ञों व किसानों के बीच संवाद स्थापित करना था।

किसान अब अन्नदाता ही नहीं, ऊर्जा प्रदाता भी बन सकते हैं – शिवराज सिंह

श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें कृषि, किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी है जिसे वे पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 29 मई से ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ चलाया जा रहा है जिसके तहत वे ओडिशा, जम्मू, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पटना और महाराष्ट्र का दौरा कर चुके हैं और यह यात्रा जारी रहेगी।

किसानों की समृद्धि के लिए छह मुख्य उपाय

कृषि मंत्री ने किसानों की समृद्धि के लिए छह प्रमुख बिंदुओं पर बल दिया:

  1. उत्पादन में वृद्धि
  2. लागत में कमी
  3. उचित मूल्य की प्राप्ति
  4. नुकसान की स्थिति में मुआवजा
  5. फसल विविधीकरण
  6. भूमि संरक्षण हेतु संतुलित खाद उपयोग और जैविक खेती का प्रोत्साहन

उन्होंने यह भी बताया कि 2014-15 से अब तक कुल कृषि उत्पादन में 40% की वृद्धि दर्ज की गई है, विशेषकर गेहूं, चावल, मक्का और मूंगफली में। अब दालों और तिलहनों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।

एकीकृत खेती: छोटे किसानों के लिए भविष्य का समाधान

कृषि मंत्री ने एकीकृत खेती (Integrated Farming Systems) को समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि सीमांत किसान यदि भूमि के प्रत्येक भाग का समुचित उपयोग करें तो वे बेहतर आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि किसानों को आधुनिक तकनीकों को अपनाना चाहिए।

सौर ऊर्जा से किसानों को आत्मनिर्भरता

श्री चौहान ने कहा कि PM-KUSUM योजना के माध्यम से किसानों को ऊर्जा सुरक्षा प्रदान की जा रही है। उन्होंने एक नए “ऊंचे सोलर पैनल मॉडल” का प्रस्ताव रखा जिसमें फसलों के ऊपर सोलर पैनल लगाकर ऊर्जा उत्पन्न की जा सकती है। इससे किसान खाद्य और ऊर्जा दोनों के प्रदाता बन सकते हैं। सरकार इस मॉडल को आधुनिक और प्रभावी रूप में लागू करने के लिए पूरी मदद देगी।

पर्यावरण संरक्षण में सौर ऊर्जा की भूमिका

कार्यक्रम के समापन पर श्री चौहान ने 5 जून, विश्व पर्यावरण दिवस को सार्थक बनाने की अपील की और कहा कि सौर ऊर्जा पर्यावरण संरक्षण में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

निष्कर्ष

राष्ट्रीय एग्रो-RE समिट 2025 ने भारत के कृषि और ऊर्जा क्षेत्र को जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संवाद और विज़न प्रस्तुत किया। सौर ऊर्जा, जैविक खेती, एकीकृत मॉडल और किसानों को वैज्ञानिकों से जोड़कर सरकार कृषि क्षेत्र में विकसित भारत की नींव मजबूत कर रही है।

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