a man sitting on front of the computer while editing video

वीडियो संपादन जिसे अंग्रेज़ी में VIDEO EDITING कहते हैं से तात्पर्य ऐसे संपादन से है जिसके तहत लिए गए वीडियो के शॉट्स या कहें उसके फुटेज में अनावश्यक छवियों को काट कर या कुछ नई छवियों के साथ, ग्राफ़िक्स या vfx का सहारा लेकर उसे एक तारतम्यता और एकरूपता में ढाल कर एक नया और सार्थक वीडियो बनाने की एक विधा है। इसे दूसरे शब्दों में समझे तो वीडियो एडिटिंग के माध्यम से उपकरणों के द्वारा ली गयी छवियों से अनावश्यक छवियों को हटाना ही वीडियो एडिटिंग कहलाता है।(PRINCIPLE OF VIDEO EDITING)

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अगर इसे अंग्रेज़ी में समझें तो VIDEO EDITING IS THE PROCESS OF OPERATING OR MANIPULATING AND REARRANGING OR REPOSITION VIDEO CLIPS OR SHOTS TO CREATE A NEW AND MEANINGFUL VIDEO.

वीडियो संपादन (PRINCIPLE OF VIDEO EDITING) वास्तव में कहा जाए तो पोस्ट प्रोडक्शन (POST PRODUCTION) का एक हिस्सा है। हम आपको बता दें कि पोस्ट प्रोडक्शन के अंतर्गत अन्य कई प्रोडक्शन कार्य भी समाहित होतें हैं। जैसे कि शीर्षक लगाना, छवियों के रंग में सुधार करना, ध्वनियों को एक साथ मिलान करना आदि कार्य सम्मिलित होते हैं।

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सामान्य तौर पर अगर कहा जाए तो वीडियो संपादन का उद्देश्य क्या होगा? यही की वीडियो का जो संदेश है, बताने का तरीका है, फ़्लूएंट है उसे बनाया रखा जा सके। पर इसके साथ-साथ एक और महत्वपूर्ण उद्देश्य होता है जो कि एडिटिंग में अपनी अहम भूमिका का निर्वहन करता है वह यह है कि आपका लक्ष्य क्या है और किस प्रकार के वांछित प्रभाव आप दर्शक के ऊपर होते हुए देखना चाहते हैं।

आप अपने वीडियो के माध्यम से लक्ष्य या कहें उद्देश्य को पूर्ण करने के लिए निम्नलिखित वीडियो संपादन के सिद्धान्तो का पालन कर सकते हैं…

वैसे इन सिद्धांतों का पालन करना पूरी तरह से आप पर निर्भर करता है क्योंकि एक वीडियो एडिटर का मुख्य कार्य यही होता है कि वह किसी भी तरह वांछित लक्ष्य को छवियों के माध्यम से दर्शकों के सामने रखे…. फिर उसे वीडियो पर चाहे कोई सा भी प्रयोग करना पड़े। लेकिन फिर भी आप इन सिद्धांतों का प्रयोग कर एक आदर्श वीडियो एडिटर बन सकते हैं।

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वीडियो संपादन वह विभाग है जहाँ आप बिना प्रैक्टिकल किये उसके गुणों को न तो समझ सकते हैं और न ही सीख सकते हैं। यह एक ऐसा कार्य है जब तक आप इसे स्वयं करना शुरू नहीं करेंगे तब तक आप इसे समझ भी न पाएंगे। 

आज के वर्तमान समय मे आप वीडियो एडिटिंग (PRINCIPLE OF VIDEO EDITING) का काम मोबाइल या लैपटॉप या कहें दोनों पर कर सकते हैं। एडिटिंग के लिए अगर आप मोबाइल प्रयोग कर रहे हैं तो किनेमास्टर, फिल्मोरा जैसे एप्लीकेशन का प्रयोग कर सकते हैं वही लैपटॉप में वीडियो एडिटिंग के लिए adobe प्रीमियर प्रो और फाइनल कट प्रो का इस्तेमाल भी कर सकते हैं पर ध्यान रखें फाइनल कट प्रो एप्पल के ही लैपटॉप या डेस्कटॉप पर कारगर है।

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वीडियो संपादन के सिद्धान्त(PRINCIPLE OF VIDEO EDITING):-

  1. बेकाम के चित्रों को निकालना
  2. सबसे अच्छे चित्र का चुनाव करें (choose the best photo)
  3. निरंतरता बनाए रखें
  4. इफेक्ट्स, ग्राफ़िक्स, म्यूजिक, टाइटल आदि को जरूरत के हिसाब से लगाएं
  5. वीडियो की शैली, उसकी गति या फ़िल्म का मूड बदलने में पारंगत हों
  6. वीडियो को एक विशेष कोण प्रदान करें

1. बेकाम या फालतू के लिए गए शॉट्स को वीडियो से काट कर अलग कर दें:- वीडियो का संपादन करते हुए सबसे पहले आपको वीडियो के ऐसे शॉट्स को एडिट कर लेना चाहिए जिसकी वीडियो में जरूरत न हो। लेकिन इसके साथ ही इस बात का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए कि कई बार वे खराब शॉट्स ही बाद में कुछ सुधार के बाद अच्छे चित्र मुहैया करवा सकते हैं जिसे आपने निकाल दिया है। उदाहरण के लिए आप सब ने ‘दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ मूवी जहाँ तक है देखी ही होगी उसमें अमरीश पुरी और शाहरुख खान का खेत में कबूतरों को चारा डालते हुए शॉट का जिक्र नहीं था पर जब प्रोड्यूसर से बाद में उस चित्र को देखा तो उसे फ़िल्म में रख लिया। इसी प्रकार से पुष्पा मूवी में हीरो के चप्पल गिरने का कोई रोल नहीं था पर बाद में डायरेक्टर ने जब यह शॉट देखा तो उसे फ़िल्म में रख लिया और आगे यह शॉट्स बहुत ज्यादा पॉपुलर हुआ।

2. सबसे अच्छे चित्र का चुनाव करें:- फिल्मों में देखा जाए तो कई बार, एक ही शॉट कई बार लिया जाता है और वे शॉट्स एक बार मे वीडियो एडिटर के पास पहुचते हैं। ऐसे में प्रोडक्शन के दौरान अच्छे चित्रों का ही चुनाव करना चाहिए।

3. निरंतरता बनाए रखें:- ज्यादातर जब किसी वीडियो का निर्माण किया जाता है तो उसका एक उद्देश्य होता है या कहें कि वह कोई संदेश देने का प्रयास करता है। उनका संदेश देने का माध्यम कहानी भी हो सकती है या फिर डॉक्यूमेंट्री आदि के रूप में भी हो सकती है। ऐसे में संपादन के दौरान यह ध्यान रखा बहुत जरूरी है वीडियो क् अंतिम भाग भी कोई न कोई लक्ष्य अवश्य ही पूरी कर रही हो। इसलिए आपको वीडियो के सिक्वेंसिंग का भी ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

4. वीडियो में इफेक्ट, ग्राफ़िक्स, म्यूजिक, टाइटल आदि का प्रयोग जरूरत और स्थान के आधार पर करें ताकि उसमें सटीक आकर्षण आ सके। उतने ही तत्वों का उतने ही मात्रा में उपयोग करें जितना वीडियो में आवश्यक हो क्योंकि खाने में “नमक स्वादानुसार’ ही लिया जाना चहिए।

5. वीडियो की शैली, उसकी गति या फ़िल्म का मूड बदलने में पारंगत हों:- एक पारंगत संपादक वीडियो को एक सही गति और शैली देकर वीडियो का मूड बदलने में सक्षम होना चाहिए। क्योंकि इसी बात से तय होता है कि कोई दर्शक किसी संपादित वीडियो पर किस प्रकार की प्रक्रिया देता है।

6. वीडियो को एक विशेष प्रकार का कोण या दिशा प्रदान करने की कोशिश करें ताकि आपके दिए हुए संदेश या बनाए गए एजेंडा को दर्शकों तक बिना किसी शोर या बाधा तक पहुँचाया जा सके और भ्रमित होने जैसी अवस्था उत्पन्न न हो।

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