image 3 edited

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हकीम अजमल खां साहित्यिक एवं ऐतिहासिक यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित हिन्दी पखवाड़े के समापन सह पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हिन्दी विभाग के शिक्षक डॉ आसिफ़ उमर थे।

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि डॉ उमर को सम्मानित करने के साथ हुई। कार्यक्रम के दौरान मंच का संचालन डॉ नीलम कुद्दुसी ने किया। इस अवसर पर हकीम अजमल खां साहित्यिक एवं ऐतिहासिक यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के प्रभारी डॉ मोहम्मद फाज़िल ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि हिंदी पखवाड़े का आयोजन 14 से 29 सितंबर तक किया गया।

इस दौरान सभी कार्यक्रमों का आयोजन सरकारी नियमों का पालन करते हुए किया गया। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर निबंध प्रतियोगिता, श्रुतिलेख प्रतियोगिता, हिन्दी शब्द-ज्ञान प्रतियोगिता और हिन्दी समीक्षा जैसी अलग-अलग प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया था। उन्होंने संस्थान में हिन्दी के लिए किए जा रहे प्रयासों को बताया। उन्होंने कहा कि हिंदी हमारी राजभाषा है और इसका सम्मान करना हम सभी का कर्तव्य है।

मुख्य अतिथि डॉ आसिफ़ उमर ने अपने संबोधन में भाषा के सम्मान की अपील करते हुए स्वामी विवेकानंद, गांधीजी और जामिया मिल्लिया इस्लामिया का हिन्दी सेवा से जुड़ा हुआ एक महत्वपूर्ण किस्सा साझा किया। उन्होंने कहा कि विवेकानंद न सिर्फ अपनी मातृभाषा का सम्मान करते थे बल्कि वे दूसरों की भाषा का भी सम्मान किया करते थे।

उन्होंने अमेरिकी दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि जब एक अमेरिकी नागरिक ने विवेकानंद से अँग्रेजी में सवाल किया तो उन्होंने हिंदी में जवाब दिया और जब उसने हिंदी में सवाल किया तो विवेकानंद ने अँग्रेजी में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि संसद से सड़क तक की भाषा हिंदी का सम्मान हर हिंदीभाषी को करना चाहिए।

हर हिंदी-भाषी करें हिंदी भाषा का सम्मान : डॉ आसिफ उमर. जामिया मिल्लिया इस्लामिया

उन्होंने आगे कहा कि अगर हिंदीभाषी ही हिंदी भाषा का प्रयोग करने से परहेज करेंगे तो हिन्दी का विकास नहीं हो सकता। डॉ उमर ने संस्थान द्वारा किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की, साथ ही हिंदी भाषा के इतिहास एवं विश्व में इसकी स्थिति से श्रोताओं को अवगत कराया। उन्होंने हिंदी और स्वामी विवेकानंद और गांधीजी के रिश्ते पर भी विस्तृत चर्चा की। उन्होंने गांधीजी का जिक्र करते हुए कहा कि गांधीजी ने अपने बेटे देवदास गांधी को जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हिंदी सेवा के लिए भेजा था।

इसके बाद पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। डॉ उमर ने सभी विजेताओं को पुरस्कृत करने के साथ ही उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। निबंध प्रतियोगिता का विषय था, कोविड महामारी: एक प्राकृतिक आपदा। इस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान, डॉ शबनम अंजुम आरा ने प्राप्त किया तो द्वितीय स्थान पर डॉ शाहीन अख़लाक़ रहीं जबकि तीसरा स्थान इस्लामुद्दीन ने हासिल किया। वहीं प्रोत्साहन पुरस्कार लैब सहकर्मी अनिल को दिया गया।

श्रुति लेख प्रतियोगिता की बात करें तो इसमें प्रथम स्थान अनिल ने हासिल किया तो द्वितीय पुरस्कार इस्लामुद्दीन को दिया गया जबकि तीसरे स्थान पर रहमतुल्लाह रहे। तो वहीं प्रोत्साहन पुरस्कार मोहम्मद शोएब को दिया गया।

हिन्दी शब्द ज्ञान प्रतियोगिता में प्रथम स्थान संजना ने हासिल किया तो वहीं दूसरे स्थान पर डॉ रक्शंदा रहीं। जबकि तीसरा पुरस्कार अनिल को दिया गया। इस प्रतियोगिता में प्रोत्साहन पुरस्कार सैयदा को दिया गया।

हिन्दी समीक्षा प्रतियोगिता में पहले स्थान पर रहमतुल्लाह रहे जबकि दूसरे स्थान पर डॉ नीलम रहीं। वहीं तीसरा पुरस्कार रोहित को मिला। इस प्रतियोगिता का प्रोत्साहन पुरस्कार सैयदा को दिया दिया।

कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन डॉ अहमद सैयद ने किया। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए डॉ सैयद ने हिन्दी भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने महात्मा गाँधी का जिक्र करते हुए कहा कि हिंदी भाषा को राजभाषा बनाने में गांधीजी का अहम योगदान रहा है। उन्होंने सभागार में मौजूद सभी लोगों का धन्यवाद दिया.

READ MORE


Discover more from अपना रण

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

By Admin

Discover more from अपना रण

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading