भारत में उड़द (Urad) की दाल की मांग सालभर बनी रहती है, लेकिन बरसात का मौसम इसकी खेती के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। अगर किसान सही समय पर, सही किस्म और सही तकनीक अपनाएं तो कम समय में अधिक उत्पादन और अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
बरसात में उड़द की खेती क्यों फायदेमंद है?
बरसात के मौसम में मिट्टी में नमी पर्याप्त होती है, जिससे सिंचाई की लागत कम आती है। उड़द की फसल 60-70 दिनों में तैयार हो जाती है, यानी किसान जल्दी से बाजार में दाल बेचकर लाभ कमा सकते हैं।
उड़द की खेती का सही समय और किस्में
- खेती का समय: खरीफ सीजन में उड़द की बुवाई जून के अंत से जुलाई के मध्य तक करनी चाहिए।
- बेहतर किस्में: PU-31, PantU-19, TAU-1, T-9 जैसी किस्में उच्च उत्पादन के लिए अच्छी मानी जाती हैं।
खेती की तैयारी और तकनीक
- भूमि का चयन – हल्की से मध्यम काली मिट्टी, जिसमें पानी का निकास अच्छा हो।
- बुवाई की विधि – 30 सेमी कतार-दूरी और 10 सेमी पौधे की दूरी रखें।
- खाद और उर्वरक – बुवाई के समय प्रति एकड़ 20-25 किलो डीएपी डालें।
- सिंचाई – बरसात में अतिरिक्त सिंचाई की जरूरत नहीं, लेकिन सूखे में एक-दो बार सिंचाई करें।
कीट और रोग नियंत्रण
- पत्ती लपेटक और फली छेदक कीट: इमामेक्टिन बेंजोएट का छिड़काव करें।
- रोग नियंत्रण: फसल में पीला मोज़ेक रोग से बचाव के लिए रोग-रोधी किस्में लगाएं और समय पर कीटनाशक का प्रयोग करें।
बेहतरीन बीज घर बैठे कैसे मंगाएं?
आजकल किसान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या कृषि सेवा केंद्र से प्रमाणित बीज मंगवा सकते हैं।
- कदम 1: विश्वसनीय ई-कॉमर्स या सरकारी कृषि पोर्टल पर जाएं।
- कदम 2: अपनी पसंद की उड़द की किस्म चुनें।
- कदम 3: ऑनलाइन भुगतान कर घर पर डिलीवरी प्राप्त करें।
उड़द की खेती से मुनाफा
अगर किसान एक एकड़ में औसतन 5-6 क्विंटल उड़द पैदा करते हैं और बाजार में उड़द की कीमत ₹7,000–₹8,000 प्रति क्विंटल है, तो एक एकड़ से ₹35,000–₹48,000 तक की आमदनी हो सकती है। लागत घटाकर भी अच्छा मुनाफा बचता है।
निष्कर्ष
बरसात में उड़द की खेती किसानों के लिए कम समय, कम लागत और अधिक मुनाफे का बेहतरीन अवसर है। सही किस्म, अच्छी खेती तकनीक और प्रमाणित बीज के साथ किसान अपनी आमदनी में बड़ा इजाफा कर सकते हैं।
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