किसान अक्सर धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहते हैं, लेकिन बदलते बाजार और फसल विविधीकरण की आवश्यकता के कारण अब कई किसान राजमा (Kidney Beans) की खेती की ओर रुख कर रहे हैं। राजमा की मांग पूरे साल बनी रहती है और इसकी खेती से किसान कम समय में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।
राजमा की खेती क्यों फायदेमंद है?
राजमा एक दलहनी फसल है जो कम पानी में भी उगाई जा सकती है और यह मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाकर जमीन की उर्वरता में सुधार करती है। इसकी खेती में लागत कम और बाजार भाव स्थिर रहता है, जिससे लाभ का मार्जिन बढ़ता है।
खेती का सही समय और उपयुक्त क्षेत्र
- खेती का समय: रबी सीजन में अक्टूबर से नवंबर के बीच बुवाई करना सबसे अच्छा होता है, जबकि कुछ क्षेत्रों में खरीफ सीजन में भी इसे उगाया जाता है।
- उपयुक्त क्षेत्र: ठंडी और समशीतोष्ण जलवायु वाले राज्य जैसे हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश और बिहार में इसकी पैदावार अधिक होती है।
बेहतर किस्में और बीज मात्रा
- लोकप्रिय किस्में: राजमा लाल, राजमा चिट्टा, पिंटो बीन्स, HUR-137, VL-63।
- बीज की मात्रा: प्रति एकड़ लगभग 25-30 किलो प्रमाणित बीज की जरूरत होती है।
खेती की तकनीक
- भूमि की तैयारी – भुरभुरी और अच्छे जल निकास वाली दोमट मिट्टी उपयुक्त है।
- बुवाई की दूरी – कतार से कतार 45 सेमी और पौधे से पौधे 10-15 सेमी की दूरी रखें।
- खाद और उर्वरक – 15-20 क्विंटल गोबर की खाद और संतुलित रासायनिक उर्वरक डालें।
- सिंचाई – अंकुरण के बाद 2-3 बार हल्की सिंचाई पर्याप्त होती है।
बाजार भाव और मुनाफा
राजमा का बाजार भाव किस्म और गुणवत्ता के अनुसार ₹8,000 से ₹12,000 प्रति क्विंटल तक है।
- एक एकड़ में औसतन 6-8 क्विंटल पैदावार मिलती है।
- इसका मतलब है कि किसान प्रति एकड़ ₹48,000 से ₹96,000 तक की आमदनी प्राप्त कर सकते हैं।
- लागत घटाकर भी मुनाफा धान-गेहूं से कहीं अधिक है।
मुनाफा बढ़ाने के टिप्स
- प्रमाणित और रोग-मुक्त बीज का चयन करें।
- फसल चक्र अपनाएं और लगातार एक ही खेत में राजमा न उगाएं।
- फसल कटाई के बाद तुरंत सुखाकर भंडारण करें ताकि गुणवत्ता बनी रहे।
निष्कर्ष
राजमा की खेती किसानों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है जो धान और गेहूं जैसी फसलों से ज्यादा मुनाफा देती है। कम लागत, स्थिर बाजार भाव और उच्च मांग के कारण यह फसल आने वाले समय में और लोकप्रिय हो सकती है।
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