उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में बादल फटने के बाद आई बाढ़ और मलबे ने कई गांवों में तबाही मचाई है। गांव चारों ओर पानी और मलबे से घिरा है। इस अभियान में सेना, ITBP, SDRF, स्थानीय लोग और खासतौर पर Sniffer Dogs की टीम लगाई गई है, ताकि मलबे में दबे शवों और लापता लोगों का पता लगाया जा सके।
Sniffer Dogs – Rescue Mission के गुप्त हथियार
- खोजी कुत्ते अपनी उच्च स्तर की सूंघने की क्षमता के लिए मशहूर हैं।
- सामान्य इंसान में लगभग 50 लाख Smell Receptors होते हैं, जबकि स्निफर डॉग्स में ये संख्या 50 करोड़ तक होती है।
- इन्हें Specialised Training दी जाती है, जिससे वे ड्रग्स, विस्फोटक, इंसानी गंध और यहां तक कि मृत शरीर की गंध भी पहचान सकें।
- किसी गंध को पहचानने पर ये बैठकर, पंजा मारकर या तेज भौंककर संकेत देते हैं।
- इनकी टीम में आमतौर पर German Shepherd, Labrador, Belgian Malinois और Cocker Spaniel जैसी नस्लें शामिल होती हैं, जो तेज, फुर्तीली और बुद्धिमान होती हैं।
मलबे में कितनी गहराई तक खोज सकते हैं शव?
- Rescue Experts के मुताबिक, Cadaver Dogs (शव खोजने वाले स्निफर डॉग) मुलायम मिट्टी में 5–6 फीट की गहराई तक दबे शव की गंध पकड़ सकते हैं।
- रेत या ढीली मिट्टी – लगभग 3–4 फीट
- बर्फ – करीब 10 फीट
- पानी – क्षमता सीमित, लेकिन किनारों पर गंध पकड़ सकते हैं।
- कई बार इन्होंने 6 फीट से भी गहराई में दबे शवों को ढूंढकर Rescue Teams को चौंका दिया है।
कैसे करते हैं पहचान?
- शव से निकलने वाली सूक्ष्म गंध हवा के प्रवाह के साथ बाहर आती है। स्निफर डॉग्स इन सूक्ष्म गंधों को भी सूंघ सकते हैं, चाहे शरीर मिट्टी, बर्फ या मलबे के भीतर हो।
- ये कुत्ते लगातार सुगंध का पीछा करते हुए उस स्थान तक पहुंचते हैं जहां सबसे तीव्र गंध होती है और वहां Final Alert देते हैं।
IAF भी मदद में जुटी
- वर्तमान में राहत कार्य में Indian Air Force भी शामिल है।
- बरेली और आगरा एयरबेस से Mi-17 Helicopters,
- ALH Mk-III,
- An-32 और C-295 विमान ऑपरेशन के लिए तैनात हैं।
निष्कर्ष – समय पर मदद की उम्मीद
खोजी कुत्तों की तेज गंध पहचानने की शक्ति के चलते लापता लोगों और शवों को जल्द ढूंढना संभव होगा। धराली में जारी इस संयुक्त अभियान में सेना, वायुसेना, सुरक्षा बल और स्थानीय लोग मिलकर उम्मीद कर रहे हैं कि हर संभव जीवन को बचाया जा सके।
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