भारत के पहले अंतरराष्ट्रीय एग्री हैकाथॉन का समापन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर कृषि तकनीक और स्टार्टअप्स की संभावनाओं को सामने लाया गया।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के चलते कृषि क्षेत्र कई चुनौतियों से जूझ रहा है और इसका समाधान केवल आधुनिक तकनीक ही दे सकती है। उन्होंने पुणे एग्री हैकाथॉन में प्रस्तुत उपयोगी तकनीकों को किसानों तक पहुँचाने और इन्हें व्यावहारिक रूप से लागू करने की आवश्यकता जताई।
‘क्लीन प्लांट’ परियोजना की घोषणा: रोगमुक्त पौधे किसानों तक पहुँचेंगे
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मौके पर ‘क्लीन प्लांट’ कार्यक्रम की घोषणा की। इस कार्यक्रम के तहत देशभर में 9 क्लीन प्लांट परियोजनाएं शुरू की जाएंगी, जिनमें से 3 महाराष्ट्र में होंगी। इन परियोजनाओं पर ₹300 करोड़ का निवेश किया जाएगा।
स्थानीय परियोजनाएं:
- पुणे: अंगूर के लिए क्लीन प्लांट केंद्र
- नागपुर: संतरे के लिए
- सोलापुर: अनार के लिए
इन परियोजनाओं के तहत आधुनिक तकनीक आधारित नर्सरी भी स्थापित की जाएंगी:
- बड़ी नर्सरी के लिए ₹3 करोड़
- मझोली नर्सरी के लिए ₹1.5 करोड़
इन नर्सरियों के माध्यम से हर साल 8 करोड़ रोगमुक्त पौधे किसानों को मिल सकेंगे।
‘Lab to Land’ पहल: वैज्ञानिक खेतों में उतरेंगे
श्री चौहान ने कहा कि वैज्ञानिकों की प्रयोगशालाओं में की गई रिसर्च किसानों तक समय पर नहीं पहुँचती। इस खाई को भरने के लिए केंद्र सरकार ने ‘Lab to Land‘ योजना शुरू की है। इसके तहत 16,000 वैज्ञानिक सीधे किसानों के साथ काम करेंगे और कृषि विभाग से जुड़ेंगे। इससे नई तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों को खेतों तक पहुँचाने में मदद मिलेगी।
वैश्विक सहयोग और कृषि निर्यात का संकल्प
मंत्री ने बताया कि भारत सरकार इज़राइल और नीदरलैंड जैसे देशों के साथ मिलकर तकनीकी सहयोग भी करेगी ताकि भारतीय बागवानी को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके। उन्होंने भारत को “विश्व का खाद्य बैंक” बनाने का लक्ष्य भी रखा, जिसमें पहले देशवासियों की आवश्यकताओं की पूर्ति की जाएगी और फिर वैश्विक निर्यात को बढ़ावा दिया जाएगा।
युवाओं को कृषि क्षेत्र में आमंत्रण
श्री चौहान ने युवाओं से अपील की कि वे कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप शुरू करें और अपनी स्किल्स का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि ऐसी बीज किस्मों का विकास किया जाए जो जलवायु परिवर्तन के अनुकूल हों ताकि फसलें सुरक्षित रह सकें। सरकार हर किसान की समस्या सुलझाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
नवाचारियों को पुरस्कार
कार्यक्रम के समापन में AI इन एग्रीकल्चर, मिट्टी और सिंचाई प्रबंधन, फार्म मैकेनाइज़ेशन, पोस्ट-हार्वेस्ट तकनीक, बाजार संपर्क जैसे विभिन्न श्रेणियों में नवाचार करने वाले स्टार्टअप्स, किसान और अनुसंधानकर्ताओं को पुरस्कार दिए गए।
निष्कर्ष
यह कार्यक्रम भारत में तकनीक आधारित कृषि क्रांति की ओर एक ठोस कदम है। ‘क्लीन प्लांट’ परियोजनाएं, Lab to Land पहल, और युवाओं की भागीदारी से भारतीय कृषि का भविष्य और अधिक सशक्त और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनेगा।
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