भारत सरकार द्वारा हाल ही में “श्री अन्न” का दर्जा प्राप्त करने वाले मोटे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, रागी और मक्का की खेती में वर्ष 2025 में उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। यह संकेत है कि किसानों का रुझान अब पौष्टिक, कम लागत और जलवायु सहनशील फसलों की ओर बढ़ रहा है।
धान और गेहूं की परंपरागत खेती से इतर मोटे अनाज, विशेषकर मक्का की खेती, जलवायु परिवर्तन के बीच सुरक्षित विकल्प के रूप में उभर रही है।
बुआई क्षेत्र: तुलनात्मक विश्लेषण
| वर्ष | बुआई क्षेत्र (लाख हेक्टेयर) |
|---|---|
| सामान्य औसत | 11.05 लाख हेक्टेयर |
| 2024 | 12.95 लाख हेक्टेयर |
| 2025 | 14.37 लाख हेक्टेयर |
| कुल वृद्धि | 1.42 लाख हेक्टेयर |
उपवर्ग अनुसार वृद्धि और गिरावट
1. मक्का (Corn) – सर्वाधिक वृद्धि
- 2024 से 2025 में वृद्धि: 1.43 लाख हेक्टेयर
कारण:
- पशु चारे और खाद्य उद्योग में भारी मांग
- न्यूनतम सिंचाई में भी उच्च उत्पादन
- सरकारी बीज योजना और बाजार समर्थन
निष्कर्ष: मक्का ने मोटे अनाज वर्ग में सबसे ज्यादा योगदान दिया
2. ज्वार (Sorghum) – 0.02 लाख हेक्टेयर की वृद्धि
- विशेषता: कम पानी वाली फसल
- स्थिति: आंशिक वृद्धि, विशेषकर महाराष्ट्र और कर्नाटक में
- कारण: परंपरागत कृषि क्षेत्र में पुनः रुचि
3. रागी (Finger Millet) – 0.03 लाख हेक्टेयर की वृद्धि
- खासियत: कैल्शियम से भरपूर पौष्टिक अनाज
- स्थिति: वृद्धि सीमित लेकिन सकारात्मक
- कारण: शहरी बाजार में बढ़ती मांग और स्वास्थ्य जागरूकता
4. बाजरा (Pearl Millet) – 0.06 लाख हेक्टेयर की कमी
- स्थिति: एकमात्र घटता उपवर्ग
कारण:
- गर्मी की अधिकता
- बाजार कीमतों में अस्थिरता
- सिंचाई सुविधा की कमी वाले क्षेत्रों में विकल्प के रूप में मक्का की ओर रुझान
श्री अन्न की वृद्धि के पीछे मुख्य कारण
1. सरकारी प्रोत्साहन
- श्री अन्न मिशन 2023 के तहत मिलेट्स को विशेष सहायता
- बीज वितरण, MSP और मंडी पहुंच में सुधार
- इंटरनेशनल मिलेट ईयर (IYOM) के बाद जागरूकता में इजाफा
2. जलवायु सहनशीलता
- मोटे अनाज कम पानी और अधिक तापमान में भी उगाए जा सकते हैं
- सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए आदर्श
3. पोषण आधारित मांग में वृद्धि
- बढ़ती स्वास्थ्य चेतना ने रागी, ज्वार, बाजरा जैसे अनाजों की मांग को बढ़ाया
- होटल, स्कूल मिड-डे मील और शहरी रिटेल बाजारों में इनकी खपत बढ़ी
किसानों को क्या लाभ मिलेगा?
- कम लागत में अधिक मुनाफा: सिंचाई और उर्वरक की कम जरूरत
- सरकारी समर्थन: MSP, फसल बीमा, अनुदान और फसल विविधिकरण योजनाएं
- बाजार पहुंच: प्रोसेसिंग यूनिट, निर्यात में अवसर, ऑनलाइन बाजार
चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं
- मोटे अनाज की खरीद के लिए अभी भी पूर्ण विकसित MSP प्रणाली नहीं है
- प्रोसेसिंग और स्टोरेज सुविधाओं की कमी
- किसानों में अभी भी जागरूकता की कमी है कि कौन-सा मोटा अनाज कहां अधिक लाभकारी है
निष्कर्ष: श्री अन्न का भविष्य उज्ज्वल
वर्ष 2025 में 1.42 लाख हेक्टेयर की वृद्धि यह दर्शाती है कि मोटे अनाज अब केवल पिछड़े क्षेत्र की फसल नहीं रहे, बल्कि ये पोषण, पर्यावरण और मुनाफा तीनों दृष्टियों से लाभकारी बन चुके हैं।
विशेष रूप से मक्का, रागी और ज्वार ने क्षेत्रफल में वृद्धि दर्शाई है, जिससे यह उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले वर्षों में ये अनाज किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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