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कुनुरु (जिसे कई क्षेत्रों में कुनरू, कुन्दरू, या कुंदरू भी कहा जाता है) एक औषधीय गुणों से भरपूर लता वाली सब्जी है, जो खासकर गर्म और शुष्क क्षेत्रों में उगाई जाती है। इसे कुंदरू (Ivy Gourd) के नाम से भी जाना जाता है और इसका उपयोग भोजन, औषधीय और हर्बल उद्योग में होता है। यह कम पानी में उगने वाली, कम लागत की फसल है।

कुनुरु की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और भूमि

  • जलवायु: कुनुरु की खेती के लिए गर्म और अर्ध-शुष्क जलवायु सर्वोत्तम रहती है। इसे अच्छी धूप की आवश्यकता होती है।
  • भूमि: बलुई दोमट, जलनिकासी वाली भूमि सबसे उपयुक्त मानी जाती है। pH मान 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए।

प्रजनन विधि और बुवाई का समय

  • प्रजनन विधि: यह मुख्यतः कलम या टुकड़ों द्वारा उगाई जाती है। बीज से खेती कम की जाती है क्योंकि कलम से जल्दी और बेहतर उत्पादन मिलता है।
  • बुवाई का समय: फरवरी से जून के बीच कलम लगाई जाती है। मानसून के शुरुआत में बुवाई करना लाभकारी होता है।

खाद एवं उर्वरक प्रबंधन

  • खेत तैयार करते समय गोबर की खाद (8-10 टन/हेक्टेयर) मिलाएं।
  • नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की उचित मात्रा (50:40:30 किग्रा/हेक्टेयर) दें।
  • फूल और फल बनने के समय फोलियर स्प्रे (जैसे कि माइक्रोन्यूट्रिएंट्स) लाभकारी होता है।

सिंचाई प्रबंधन

  • प्रारंभिक दिनों में 6-7 दिन के अंतर पर सिंचाई करें।
  • पौधा स्थापित होने के बाद 10-12 दिन के अंतर पर सिंचाई पर्याप्त होती है।
  • जल जमाव से बचाना ज़रूरी है।

रोग एवं कीट नियंत्रण

  • प्रमुख रोग: पाउडरी मिल्ड्यू, लीफ स्पॉट
  • कीट: एफिड्स, थ्रिप्स
  • जैविक नियंत्रण: नीम का तेल, ट्राइकोडर्मा, वर्मी कम्पोस्ट का प्रयोग करें।

तोड़ाई और उपज

  • रोपाई के 60-70 दिनों बाद फल मिलने लगते हैं।
  • एक बार में 3-4 महीनों तक लगातार फल मिलते हैं।
  • औसतन उपज: 80-120 क्विंटल प्रति हेक्टेयर।

बाजार और आय

  • कुनुरु की माँग शहरी और औषधीय बाजारों में अधिक है।
  • हर्बल दवाओं और सब्ज़ी के रूप में इसकी अच्छी कीमत मिलती है।
  • छोटे किसानों के लिए यह एक कम लागत, अधिक लाभ वाली फसल है।

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