mango varieties

Mango Varieties: भारत में प्रमुख आम की प्रजातियाँ

Mango Varieties: Alphonso (हापुस आम)

  • उत्पत्ति (Origin): यह किस्म मुख्यतः महाराष्ट्र के कोकण क्षेत्र (रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग) में विकसित हुई और वहीं से लोकप्रिय हुई। इसके अलावा गोवा, कर्नाटक और दक्षिण गुजरात में भी हापुस आम उगाया जाता है। (Mango Varieties)
  • स्वाद (Taste): अत्यंत मीठा, समृद्ध एवं सुगन्धित स्वाद, जिसमें हल्की सी खटास का भी एहसास होता है। इसका गूदा बहुत कोमल, मलाईदार बनावट वाला और रेशा-रहित (फाइबरलेस) होता है, जो मुंह में जाते ही घुल जाता है।
  • आकार व आकार (Size & Shape): माध्यम आकार (प्रायः 150–300 ग्राम) का आम जो अंडाकार-दीर्घाकार (ovate-oblique) रूप का होता है। पकने पर छिलका सुनहरा पीला रंग पकड़ता है और उपरी सिरे पर हल्की लाल आभा आ जाती है।
  • मौसम (Season): Alphonso आम का सीज़न वसंत के अंत से प्रारंभ होता है। फलों की तुड़ाई मार्च के अंत से शुरू होकर जून के आखिर तक चलती है। मुख्य पकाव अवधि अप्रैल-मई होती है, जब यह बाजार में सबसे अधिक मिलता है।
  • विशेषताएं (Special Features): हापुस आम को “King of Mangoes” कहा जाता है और इसकी महक, स्वाद तथा चटख रंग के लिए घरेलू व अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में काफ़ी मांग रहती है। इसका गूदा रेशा-रहित होने से यह ताज़ा खाने के साथ-साथ प्रसंस्करण (पल्प, जूस) हेतु भी उत्तम है। महाराष्ट्र के रत्नागिरी हापुस आम को भौगोलिक संकेत (GI) का दर्जा मिला हुआ है, तथा इसे निर्यात-quality का आम माना जाता है। (Mango Varieties)

Mango Varieties: दशहरी (Dashehari Aam)

  • उत्पत्ति (Origin): दशहरी आम उत्तर प्रदेश के लखनऊ ज़िले के मलिहाबाद क्षेत्र में दशहरी नामक गाँव से उत्पन्न हुआ है। वहाँ एक सदी से भी पुराने “मदर ट्री” से इस किस्म का प्रसार हुआ और आज यह उत्तर भारत के साथ नेपाल व पाकिस्तान तक व्यापक रूप से उगाया जाता है। उत्तर प्रदेश (विशेषकर मलिहाबाद) इस किस्म का सबसे बड़ा उत्पादक है। (Mango Varieties)
  • स्वाद (Taste): दशहरी स्वाद में बहुत मीठा और सुगंधित होता है। इसका गूदा मुलायम एवं बिना रेशा वाला (फाइबरलेस) है, जिसका मीठा रस खाने वाले को दो-तीन आम एक साथ खाने पर मजबूर कर देता है। कभी-कभी इसके स्वाद में हल्की सी अमृत जैसी ताजगी भी महसूस होती है।
  • आकार व आकार (Size & Shape): फल आकार में छोटा से मध्यम होता है, आकार लंबोतरा (oblong-oblique) और छिलका पका होने पर पीला रंग धारण करता है। इसका बीज छोटा व पतला होता है, जिससे गूदे का अनुपात अधिक रहता है। (Mango Varieties)
  • मौसम (Season): दशहरी आम मध्यम मौसम में पकने वाली किस्म है। उत्तर भारत में यह जून माह की शुरुआत से पकना शुरू होता है और जुलाई तक बाजार में उपलब्ध रहता है। आमतौर पर इसकी सर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता मध्य-जून से जुलाई के आरंभ तक देखी जाती है।
  • विशेषताएं (Special Features): दशहरी को उसके उत्कृष्ट स्वाद व गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। यह एक लोकप्रिय टेबल वेरायटी है अर्थात ताज़ा खाने के लिए उपयुक्त आम। इसकी keeping quality (भंडारण क्षमता) भी अच्छी मानी जाती है, जिससे यह कटाई के बाद कुछ दिनों तक बढ़िया रह सकता है। दशहरी आम भारत से निर्यात भी किया जाता है और दक्षिण पूर्व एशिया के बाज़ारों में मिलता है। (Mango Varieties)

Mango Varieties: लंगड़ा (Langra Aam)

  • उत्पत्ति (Origin): लंगड़ा आम की उत्पत्ति उत्तर प्रदेश के वाराणसी (बनारस) क्षेत्र में मानी जाती है। कहा जाता है कि वाराणसी में मौजूद मूल वृक्ष के मालिक लंगड़े (पैर से विकलांग) थे, इसी वजह से इस आम का नाम “लंगड़ा” पड़ गया। आज यह किस्म उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब से लेकर पश्चिम बंगाल तक व्यापक रूप से उगाई जाती है।
  • स्वाद (Taste): लंगड़ा अपने अनोखे स्वाद के लिए जाना जाता है – इसका रस मीठा होता है पर स्वाद में एक अलग तरह की गहराई होती है। फल का गूदा खूब रसीला होता है, हालांकि उसमें थोड़े रेशे (फाइबर) भी पाए जाते हैं। पका हुआ लंगड़ा आम खाने पर मुंह में मीठा और सुगंधित रस भर जाता है। (Mango Varieties)
  • आकार व आकार (Size & Shape): आकार में यह मध्यम से बड़ा होता है और आकार अंडाकार या थोड़ा चपटा-गोल होता है। खास बात यह है कि लंगड़ा आम का छिलका पके होने पर भी हरा ही बना रहता है (पीले रंग में परिवर्तित नहीं होता)। गूदा गाढ़ा पीला-केसरिया रंग का और बहुत रसदार होता है।
  • मौसम (Season): लंगड़ा आम देर से पकने वाली किस्म है। यह आमतौर पर जुलाई मध्य से पकना शुरू होता है और अगस्त तक बाज़ार में उपलब्ध रहता है। उत्तरी व पूर्वी भारत के आम बाज़ारों में लंगड़ा मानसून के दौरान प्रमुखता से दिखाई देता है। (Mango Varieties)
  • विशेषताएं (Special Features): लंगड़ा आम की सुगंध तेज होती है और कटने के बाद भी लंबे समय तक बनी रहती है। इसका रेशायुक्त गूदा शेक, स्मूदी या प्यूरी बनाने के लिए भी उपयुक्त माना जाता है। पूर्वी भारत में इसे कुछ स्थानों पर “मालदह” या “मालदा” आम भी कहा जाता है, और यह क्षेत्रीय पसंदीदा किस्मों में से एक है।

Mango Varieties: चौसा (Chaunsa Aam)

  • उत्पत्ति (Origin): चौसा (या चौंसा) आम मूल रूप से उत्तरी भारत में पाया जाता है और इसके नामकरण का श्रेय शेरशाह सूरी को दिया जाता है। कहा जाता है कि 1539 में शेरशाह ने हुमायूँ पर चौसा (बक्सर, बिहार के पास) की लड़ाई में जीत हासिल करने के बाद इस अपने प्रिय आम को “चौसा” नाम दिया। आज चौसा आम भारत के उत्तरी राज्यों (उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब) से लेकर पाकिस्तान तक उगाया व पसंद किया जाता है। (Mango Varieties)
  • स्वाद (Taste): चौसा आम अपने अत्यंत मीठे और रसीले स्वाद के लिए विख्यात है। इसका रस इतना मीठा होता है कि इसे चूसते समय आखिरी बूंद तक लोग पी जाना चाहते हैं। गूदा बहुत सुगंधित, मधुर और मुलायम होता है, जिसे खाने पर “स्वर्गिक मधुरता” का एहसास होता है। इसे आम की सबसे स्वादिष्ट किस्मों में से एक माना जाता है।
  • आकार व आकार (Size & Shape): चौसा का फल आकार में बड़ा और लंबा-अंडाकार (oval) होता है। पकने पर इसका छिलका हल्के पीले से सुनहरे रंग का होता है, जिसमें कभी-कभी हल्की हरी झलक भी रह जाती है। पूरी तरह पक जाने पर चौसा के छिलके पर कुछ सिलवटें (wrinkles) आने लगती हैं, जो इसकी पहचान है। बीज पतला होता है और गूदे की मात्रा अधिक। (Mango Varieties)
  • मौसम (Season): यह एक देर से आने वाला आम है, जिसका सीज़न वर्षा ऋतु से मेल खाता है। चौसा आम आमतौर पर जुलाई के अंत से पकना शुरू होता है और अगस्त-सितंबर तक चलता है। इसी समय यह उत्तरी भारत के बाज़ारों में भरपूर दिखाई देता है। (Mango Varieties)
  • विशेषताएं (Special Features): चौसा का रस एवं गूदा इतनी अधिक मात्रा में होता है कि यह जूस या शेक बनाने के लिए बेहतरीन है। इसकी मिठास “शहद जैसी” होती है और सुगंध तेज। पाकिस्तान में यही किस्म “सिंधड़ी” आम (सिंध प्रांत) के साथ मिलकर सबसे प्रमुख निर्यात आमों में गिनी जाती है। चौसा आम का ऐतिहासिक महत्व और स्वादिष्टता इसे आम प्रेमियों के बीच ख़ास जगह दिलाती है। (Mango Varieties)

Mango Varieties: केसर (Kesar Aam)

  • उत्पत्ति (Origin): केसर आम गुजरात की प्रसिद्ध किस्म है जिसकी पैदावार मुख्यतः जूनागढ़ ज़िले में गिरनार पहाड़ियों की तराई में होती है। “गिर केसर” के नाम से मशहूर यह आम 1960 के दशक में जूनागढ़ के खेतों में खोजा गया था और आज गुजरात के साथ महाराष्ट्र में भी उगाया जाता है। इसे उसके गाढ़े केसरिया रंग के कारण केसर नाम दिया गया।
  • स्वाद (Taste): इसका स्वाद बेहद मीठा और सुखद होता है। पके फल से तीव्र मीठी सुगंध निकलती है जो पूरे घर में फैल जाती है। केसर आम का स्वाद समृद्ध (रिच) माना जाता है, जिसमें हल्का-स्ट्रॉन्ग मीठापन और खास सुगंध का मिश्रण है। इसलिए इसे कभी-कभी आमों की “रानी” भी कहा जाता है। (Mango Varieties)
  • आकार व आकार (Size & Shape): केसर आम मध्यम आकार का होता है। पके हुए फल का छिलका सुनहरा पीला होता है जिस पर हल्का सा लाल या केसरिया ब्लश (आभा) आ सकता है। गूदा चमकीले गहरे पीले रंग का, रेशारहित और बहुत ही रसदार होता है। फल का आकार अंडाकार से थोड़ा आयताकार होता है और एक सिरे पर हल्का टेढ़ापन हो सकता है। (Mango Varieties)
  • मौसम (Season): केसर आम आमतौर पर मध्य-सीजन में आता है। गुजरात में इसका सीज़न जून की शुरुआत से लेकर जुलाई के पहले सप्ताह तक रहता है। Alphonso के बाद केसर गर्मियों के अंत तक मिलने वाली मीठी किस्म है।
  • विशेषताएं (Special Features): केसर भारत की दूसरी सबसे महंगी आम किस्मों में से एक है (Alphonso के बाद)। इसके गूदे का रंग और मिठास इसे आमरस (Aamras) बनाने के लिए सर्वोत्तम बनाते हैं। “गिर केसर” आम को 2011 में GI (Geographical Indication) टैग प्रदान किया गया, जो इसकी विशिष्ट गुणवत्ता और क्षेत्र से जुड़े होने का प्रमाण है। अपनी बनावट और स्वाद के कारण इसे ताज़ा खाने के अलावा फलों के प्रसंस्करण (पल्प, जूस, आइसक्रीम) उद्योग में भी खूब प्रयोग किया जाता है। (Mango Varieties)

Mango Varieties: बंगनपल्ली / सफेदा (Banganapalli Aam)

  • उत्पत्ति (Origin): बंगनपल्ली (जिसे उत्तर भारत में सफेदा आम कहा जाता है) आंध्र प्रदेश की एक प्रसिद्ध किस्म है, जिसका नामकरण आंध्र के कुर्नूल ज़िले के बंगनपल्ले कस्बे के नाम पर हुआ। यह दक्षिण भारत की एक पुरानी व मुख्य व्यावसायिक वैरायटी है, जो तमिलनाडु, तेलंगाना आदि राज्यों में भी उगाई जाती है। (Mango Varieties)
  • स्वाद (Taste): सफेदा अपने मीठे और हल्के स्वाद के लिए जाना जाता है। पका फल बहुत मीठा होता है और गूदे में बिलकुल रेशे नहीं होते, जिससे खाने में इसका टेक्सचर बहुत स्मूद होता है। स्वाद में यह अपेक्षाकृत हल्का-मीठा तथा कम तीखा होता है, जो इसे सभी वर्ग के लोगों के लिए पसंदीदा बनाता है।
  • आकार व आकार (Size & Shape): यह फल आकार में बड़ा और लंबा-दीर्घाकार (oblong) होता है। छिलका पकने पर सुनहरा पीला रंग धारण करता है और सतह पर हल्की चमक रहती है। गूदा firm (थोड़ा ठोस) होता है, पूरी तरह रेशारहित और मीठे रस से भरपूर होता है। औसत वजन 300-400 ग्राम या अधिक भी हो सकता है, अतः यह आकार में भरपूर आम है। (Mango Varieties)
  • मौसम (Season): बंगनपल्ली एक शुरुआती सीज़न वाली किस्म है। दक्षिण भारत में यह अप्रैल माह से ही बाजार में आना शुरू हो जाती है और जून तक उपलब्ध रहती है। आम की सीज़न की शुरुआत में इस मीठे आम की आवक रहती है, इसलिए कुछ स्थानों पर इसे गर्मियों का अग्रदूत आम भी कहा जाता है। (Mango Varieties)
  • विशेषताएं (Special Features): सफेदा आम का गूदा कठोर होते हुए भी रेशारहित है, जिसके कारण इसकी शेल्फ-लाइफ़ (भंडारण अवधि) अन्य रसीले आमों से लंबी होती है। यह कटाई के बाद कुछ दिन अधिक टिक सकता है और दूर-दराज के बाजारों में भी भेजा जा सकता है। बड़े आकार, सुंदर रंग और अच्छी रखने की क्षमता के कारण बंगनपल्ली भारत से निर्यात किए जाने वाले आमों में से एक है। दक्षिण भारत में आम की बात बंगनपल्ली के बिना अधूरी है।

Mango Varieties: नीलम (Neelam Aam)

  • उत्पत्ति (Origin): नीलम आम दक्षिण भारत से संबंध रखने वाली किस्म है, जिसे तमिलनाडु की देन माना जाता है। यह किस्म अपनी अनुकूलन क्षमता के कारण पूरे भारत में उगाई जाती है – विशेषकर तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक से लेकर उत्तर भारत के कुछ हिस्सों तक। हैदराबाद का नीलम आम विशेष रूप से प्रसिद्ध रहा है। (Mango Varieties)
  • स्वाद (Taste): नीलम स्वाद में मीठा होता है, हालांकि Alphonso जैसी समृद्धि नहीं होती। इसमें हल्की खुशनुमा सुगंध होती है जो इसे विशेष बनाती है। पके फल का गूदा मधुर और रसदार होता है तथा रेशारहित (fiberless) माना जाता है। कभी-कभी थोड़ा हल्का सा तीखापन भी स्वाद में महसूस किया जा सकता है, जो इसकी विशिष्टता है।
  • आकार व आकार (Size & Shape): यह आकार में अपेक्षाकृत छोटा आम है। फल का आकार अंडाकार-गोल होता है और पूरी तरह पकने पर छिलका चमकदार पीले रंग का हो जाता है। कुछ फलों के ऊपरी सिरे पर हलकी नोक हो सकती है, लेकिन कुल मिलाकर आकार संतुलित होता है। बीज छोटा होने से इसमें गूदा अधिक मात्रा में रहता है।
  • मौसम (Season): नीलम आम देर से आने वाली किस्म है। इसकी फसल दक्षिण भारत में मई माह से आनी शुरू हो जाती है और जून में सबसे बेहतरीन नीलम बाज़ार में मिलते हैं। उत्तरी भारत में भी जुलाई तक कुछ लेट फल उपलब्ध रहते हैं। यह उन आखिरी आमों में से है जो सीज़न के अंत (जून-जुलाई) में आम प्रेमियों को खुश करने आते हैं।
  • विशेषताएं (Special Features): नीलम की सबसे बड़ी खासियत इसकी शेल्फ लाइफ़ है – अन्य रसदार आमों की तुलना में यह अधिक समय तक खराब हुए बिना रखा जा सकता है। इसी उच्च keeping quality के चलते नीलम आम दूरस्थ स्थानों तक परिवहन व निर्यात के लिए उपयुक्त माना जाता है। साथ ही, यह एक भारी पैदावार देने वाली (high yielding) किस्म है, जिसके पेड़ में एक मौसम में बहुसंख्यक फल लगते हैं। इसलिए किसानों में भी यह लोकप्रिय है।

Mango Varieties: तोतापुरी (Totapuri Aam)

  • उत्पत्ति (Origin): तोतापुरी आम दक्षिण भारत में उत्पन्न एक व्यावसायिक किस्म है, जिसका मुख्य उत्पादन कर्नाटक एवं आंध्र प्रदेश में होता है। इसे कुछ स्थानों पर “बंगलोरा” या “संदेहशा” आम भी कहा जाता है। यह किस्म भारत के दक्षिणी राज्यों में बड़े पैमाने पर उगाई जाती है और प्रसंस्करण उद्योग में अहम है। (Mango Varieties)
  • स्वाद (Taste): तोतापुरी आम का स्वाद अन्य आमों से अलग हटकर हल्का खट्टा-मीठा होता है। इसमें मिठास हल्की होती है और खटास का स्पर्श ज़्यादा महसूस होता है, इसीलिए इसे आम तौर पर लोग नमक-मिर्च लगाकर या सलाद में खाना पसंद करते हैं। इसकी गूदे की बनावट मज़बूत (firm) और कम रेशेदार होती है, जिससे कटने पर साफ स्लाइस बनते हैं। कुल मिलाकर स्वाद तरोताज़ा करने वाला, किंचित तीखापन लिए हुए होता है।
  • आकार व आकार (Size & Shape): यह आम आकार में मध्यम से बड़ा और लम्बोतरा (oblong) होता है। इसका आकार अपनी विशिष्टता के कारण तुरंत पहचाना जाता है – फल के सिरे पर तोते की चोंच जैसी नुकीली नोक होती है, इसी कारण इसका नाम तोतापुरी पड़ा। छिलका मध्यम मोटाई का और हरे-पीले रंग का होता है, जिसपर पकने पर भी हल्की हरितिमा रह सकती है। गूदा पीले रंग का, ठोस व रेशारहित होता है। (Mango Varieties)
  • मौसम (Season): तोतापुरी एक मध्य-मौसम (mid-season) वाली वैरायटी है। दक्षिण भारत में यह आमतौर पर जून के महीने में अपने चरम पर होता है। इसकी फलियाँ गर्मी के मध्य तक पकनी शुरू होती हैं और मॉनसून के आरंभ तक उपलब्ध रहती हैं। यह वह दौर होता है जब उत्तरी भारत की कई अन्य किस्में खत्म हो जाती हैं, तब तोतापुरी बाजार में बना रहता है। (Mango Varieties)
  • विशेषताएं (Special Features): तोतापुरी आम में गूदा अन्य किस्मों की तुलना में अधिक पाया जाता है (बीज पतला व छोटा होता है), इसलिए पल्प बनाने के लिए यह सबसे उपयुक्त किस्मों में एक है। इसकी फर्म टेक्सचर और हल्की खटास इसे मैंगो जूस, प्यूरी, अचार एवं अन्य प्रोसेस्ड उत्पादों के लिए आदर्श बनाती है। भारत के मैंगो पल्प निर्माण उद्योग में Alphonso के बाद सबसे अधिक उपयोग इसी किस्म का होता है। इस आम का छिलका मोटा होने से परिवहन में नुकसान कम होता है और पैदावार भी अच्छी मिलती है, जिससे यह किसानों और उद्योगों दोनों के लिए लाभदायक फसल है।

Mango Varieties: हिमसागर (Himsagar Aam)

  • उत्पत्ति (Origin): हिमसागर आम पूर्वी भारत की प्रसिद्ध किस्म है। यह मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, भारत तथा पड़ोसी देश बांग्लादेश (राजशाही क्षेत्र) में पैदा होता है। वास्तव में इसका मूल 19वीं सदी में बंगाल (वर्तमान राजशाही, बांग्लादेश) में माना जाता है, और बाद में यह पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर व मालदा क्षेत्रों में फैला। स्थानीय स्तर पर यह खिरसापाती आम के नाम से भी जाना जाता है।
  • स्वाद (Taste): हिमसागर को आमों का “शैम्पेन” कहा जाता है, जो इसके उत्कृष्ट स्वाद और बेमिसाल सुगंध को दर्शाता है। इसका स्वाद बेहद मीठा, गहरा और मख़मली होता है, जिसमें कोई रेशा नहीं होने के कारण शुद्ध रस का आनंद मिलता है। इसे काटने पर मलाईदार पीले गूदे से मीठी महक उठती है जो दूर तक फैल जाती है। कुल मिलाकर हिमसागर का स्वाद और खुशबू, आम प्रेमियों के लिए एक विलासिता (luxury) जैसी है। (Mango Varieties)
  • आकार व आकार (Size & Shape): यह फल माध्यम आकार का होता है – एक आम का वज़न लगभग 250 से 350 ग्राम तक होता है। आकार गोल से थोड़ा चपटा होता है (गोलाकार-मध्यमा), यानि देखने में कुछ-कुछ गेंद जैसा। इसका छिलका मध्यम मोटा और हल्का हरा से पीला हो जाता है पकने पर। गूदे का रंग अंदर से गहरा पीला-नारंगी होता है। सबसे ख़ास बात, हिमसागर आम के गूदे में ज़रा भी रेशा नहीं होता – यह एकदम स्मूद टेक्सचर देता है। गूदे का लगभग 77% भाग खाने योग्य होता है, जो कि किसी भी आम में बेहद उच्च अनुपात है। (Mango Varieties)
  • मौसम (Season): हिमसागर आम का मौसम अपेक्षाकृत छोटा लेकिन प्रारंभिक होता है। पश्चिम बंगाल और आसपास के क्षेत्रों में यह मई की शुरुआत में ही बाजार में आना शुरू हो जाता है और जून मध्य तक रहता है। लगभग 4-5 सप्ताह का यह सीज़न इसमें सर्वोत्तम गुणवत्ता के फल देता है। आम की अन्य कई किस्मों के मुक़ाबले हिमसागर जल्दी आता है और जल्दी ख़त्म हो जाता है, जिस कारण इसकी मांग के वक़्त बाजार में उत्साह रहता है।
  • विशेषताएं (Special Features): हिमसागर का गूदा पूरी तरह रेशा-रहित होने के साथ बेहद उच्च रस सामग्री लिए होता है, जो इसे रसदार मिठाइयों, शेक इत्यादि के लिए उपयुक्त बनाता है। इसकी अच्छी keeping quality भी है – उचित दशा में रखने पर यह कटाई के बाद कुछ दिनों तक बढ़िया रह सकता है। बंगाल क्षेत्र में इसे सर्वोत्तम आमों में गिना जाता है और स्थानीय अर्थव्यवस्था (विशेषकर मालदा, नदिया जिलों) में इसका विशेष स्थान है। इसके अद्वितीय गुणों के कारण यह पूर्वी भारत में आम प्रेमियों द्वारा बहुत सराहा जाता है।

Mango Varieties: मल्लिका (Mallika Aam)

  • उत्पत्ति (Origin): मल्लिका आम भारत में विकसित एक संकर (हाइब्रिड) किस्म है, जिसे 20वीं सदी के उत्तरार्ध में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) ने दशहरी और नीलम किस्मों को पार करके उत्पन्न किया। इस नवीन किस्म ने अपने बेहतरीन स्वाद के चलते जल्द लोकप्रियता हासिल की और आज यह देश के कई हिस्सों (विशेषकर पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, दक्षिण भारत) में उगाई जाती है। इसे “मॉडर्न आम” के रूप में देखा जाता है, क्योंकि यह नई पीढ़ी के बागानों में प्रचलित है। (Mango Varieties)
  • स्वाद (Taste): मल्लिका आम का स्वाद अत्यंत समृद्ध (rich) और मीठा होता है, जिसमें हल्की सी ख़ट्टेपन की झलक मिलती है। इसका गूदा बहुत सुगंधित है – एक अलग सी मनोरम महक जो काटते ही महसूस होती है। इसे खाने पर एक साथ दशहरी की मिठास और नीलम की खुशबू का मेल महसूस किया जा सकता है, मानो दोनों गुण कई गुना बढ़ गए हों। कुल मिलाकर, इसका स्वाद संतुलित मीठा-खट्टा और बहुत ही आकर्षक माना जाता है।
  • आकार व आकार (Size & Shape): फल आकार में मध्यम होता है और आकार लंबा अंडाकार (oblong) होता है। मल्लिका आम का छिलका कच्ची अवस्था में हरा होता है और पकने पर चमकदार पीला-नारंगी रंग धारण कर लेता है। गूदा पका होने पर गहरी पीली या केसरिया आभा लिए रहता है। गूदे की बनावट बेहद कोमल एवं रेशारहित (fiber-free) होती है, बीज पतला और गूदा भरपूर मात्रा में मिलता है। (Mango Varieties)
  • मौसम (Season): मल्लिका आम मध्यम से देर मौसम में आने वाली किस्म है। यह आमतौर पर जून के मध्य से पकना शुरू होता है और जुलाई तक बाजार में उपलब्ध रहता है। कुछ दक्षिणी क्षेत्रों में इसका फलन जरा पहले (मई अंत) भी शुरू हो सकता है, पर उत्तरी भारत में इसे जून-जुलाई का आम माना जाता है।
  • विशेषताएं (Special Features): मल्लिका आम उच्च गुणवत्ता वाली टेबल वैरायटी है – ताज़ा खाने के लिए बेहद बढ़िया मानी जाती है। इसका गूदा पूरी तरह बे रेशा (फाइबरलेस) है और फल रोगों व खराब होने के प्रति काफी प्रतिरोधी भी माना गया है। पकने पर इसमें सुंदर पीला-नारंगी रंग विकसित होता है, जो देखने में आकर्षक है। मल्लिका आम के पेड़ अपेक्षाकृत बौने होते हैं, जिससे इन्हें सघन बागवानी (High-density planting) में उगाना आसान है – यही वजह है कि किसान भी इसे तेजी से अपना रहे हैं। स्वाद, महक और लंबे शेल्फ-लाइफ़ के संयोजन ने मल्लिका को आधुनिक आम की दुनिया में एक खास मुकाम दिया है।

Mango Varieties: विश्व की प्रसिद्ध आम प्रजातियाँ

Mango Varieties: Carabao (फिलिपीन्स का काराबाओ आम)

  • उत्पत्ति (Origin): काराबाओ आम फिलीपींस देश की प्रमुख आम किस्म है, जिसे “फिलिपीन मैंगो” या “मनिला मैंगो” भी कहा जाता है। यह फिलीपींस का राष्ट्रीय फल है और देश के विभिन्न द्वीपों (विशेषकर लूज़ोन व ग्विमारस) में व्यापक रूप से उगाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह अपनी गुणवत्ता के कारण जाना जाता है।
  • स्वाद (Taste): स्वाद की बात करें तो काराबाओ आम असाधारण रूप से मीठा माना जाता है। इसका गूदा गहरे पीले रंग का, बहुत कोमल (melting consistency) और रसीला होता है। पका फल खाने पर इसमें मधुर मिठास के साथ प्रबल सुगंध व स्वाद आता है, जो काफी “ट्रॉपिकल” एहसास देता है। इसे दुनिया की सबसे मीठी आम किस्मों में माना गया है, और गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने इसे सबसे मीठे आम के रूप में दर्ज भी किया है (कुछ विशिष्ट काराबाओ फल में शर्करा स्तर ~19°Bx मापा गया)। (Mango Varieties)
  • आकार व आकार (Size & Shape): यह फल औसतन करीब 12–13 सेमी लंबा और 8 सेमी चौड़ा होता है। आकार पार्श्व (kidney-shaped) वृक के समान होता है – कुछ फल थोड़े गोल तो कुछ लंबे होते हैं। पकने पर इसका छिलका चमकदार पीला रंग लेता है, और गूदा गाढ़ा पीला। गूदे की बनावट रेशा-रहित और मुलायम है। आकार अधिक बड़ा नहीं होता (एक मध्यम आकार का आम), लेकिन गूदे की गुणवत्ता उत्तम होती है। (Mango Varieties)
  • मौसम (Season): फिलीपींस में काराबाओ आम की फ़सल गर्मियों की शुरुआत में आती है। सामान्यतः इसका फलन मई के अंत से शुरू होकर जुलाई की शुरुआत तक चलता है। इस अवधि में फिलीपींस के बाजारों में यह आम छाया रहता है। (कुछ क्षेत्रों में हल्की ऑफ-सीजन फसल भी देखी गई है, लेकिन मुख्य सीजन यही है।)
  • विशेषताएं (Special Features): काराबाओ आम अपने अत्यधिक मिठास और “एक्सोटिक” स्वाद के कारण विश्वभर में प्रशंसा पाता है। इसकी कुछ उप-किस्में/strain विकसित की गई हैं – जैसे ग्विमारस का Sweet Elena और Zambales प्रांत का Sweet – जो और भी अधिक मीठी मानी जाती हैं। यह किस्म बहुभ्रूणीय (polyembryonic) बीज वाली है, जो दक्षिण-पूर्व एशियाई आमों की विशेषता है। फिलीपीनी काराबाओ आम ज्यादातर ताज़ा खाया जाता है या फिर सूखे आम (dried mango) और कैंडी आदि में प्रयोग होता है। अपनी ख्याति के कारण इसे बड़े पैमाने पर जापान, कोरिया आदि को निर्यात भी किया जाता है।

Mango Varieties: Ataulfo (हनी मैंगो, मैक्सिको)

  • उत्पत्ति (Origin): आताउल्फो आम मैक्सिको की एक विख्यात आम किस्म है, जिसका नामChiapas (मेक्सिको) के एक बाग़ान मालिक Ataulfo मोरेस के नाम पर पड़ा। माना जाता है कि यह फिलीपीनी आम (मनिला/काराबाओ) की ही संतति है जो मैक्सिको की जलवायु में विकसित हुई। आज यह मेक्सिको की सबसे लोकप्रिय और बड़े स्तर पर उगाई जाने वाली आम किस्मों में से एक है। (Mango Varieties)
  • स्वाद (Taste): आताउल्फो को उसके बेहद मीठे और मधुर स्वाद के लिए जाना जाता है। इसमें एक हनी (शहद) जैसी मिठास होती है और ख़ास बात यह कि इसमें खटास बेहद कम होती है। पके फल से हल्की पीची (आड़ू जैसी) खुशबू आती है और गूदे का स्वाद गहरा मीठा होता है। गूदा रेशारहित, चिकना (smooth) और थोड़ा firm रहता है, जिससे काटने पर साफ स्लाइस मिलते हैं। कुल मिलाकर, इसका स्वाद और सुगंध इतना मनभावन है कि इसे “हनी मैंगो” या “चैम्पेन मैंगो” कहा जाने लगा है।
  • आकार व आकार (Size & Shape): आताउल्फो आम का आकार छोटा से मध्यम होता है। फल आम तौर पर अंडाकार-किडनी के आकार के होते हैं, जिनका औसत वजन 200–300 ग्राम (7–10 औंस) के करीब होता है। छिलका पतला और पका होने पर सुनहरा पीला रंग धारण कर लेता है। फल का बीज भी छोटा और पतला होता है, जिससे खाने योग्य गूदे का अनुपात अधिक रहता है। गूदा चमकीला पीला, मुलायम और जूसी होता है। (Mango Varieties)
  • मौसम (Season): मैक्सिको में आताउल्फो आम का सीज़न वसंत ऋतु से शुरू होकर गर्मियों तक चलता है। इसकी पहली फसल मार्च के आसपास आने लगती है और मई-जून में इसका पीक सीज़न होता है। कुछ क्षेत्रों में जुलाई तक इसके फल मिल जाते हैं, खासकर जहाँ मौसम थोड़ा अलग है। यह अमेरिकी बाजार में वसंत के दौरान बड़े पैमाने पर निर्यात किया जाने वाला आम है, जब अन्य देशों के आम कम होते हैं। (Mango Varieties)
  • विशेषताएं (Special Features): आताउल्फो आम की विशेषता इसका शहद जैसा मीठा स्वाद और बेहद कम रेशे होना है, जिससे इसे सीधे चूसकर या काटकर दोनों तरह से आसानी से खाया जा सकता है। इसका छिलका पतला होता है, इसलिए संभालकर परिवहन करना पड़ता है – आमतौर पर यह पके फल के रूप में ही बेचा जाता है और ज़्यादा दिनों तक रखने के लिए नहीं होता। मेक्सिको में यह आम इतना लोकप्रिय हो गया है कि इसे 2003 में “चैम्पैन आम” के नाम से ट्रेडमार्क भी किया गया था। आज आताउल्फो आम उत्तरी अमेरिका के बाजारों में सबसे ज़्यादा पसंद किए जाने वाले आमों में है।

Mango Varieties: Tommy Atkins (टॉमी एटकिन्स आम)

  • उत्पत्ति (Origin): 1920 के दशक में फ्लोरिडा के टोमी एटकिन्स नामक बाग़ान मालिक ने इसे लोकप्रिय बनाया और इसकी व्यावसायिक खेती को बढ़ावा मिला। आज यह किस्म ब्राज़ील, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका, इज़राइल से लेकर भारत-अमेरीका के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों तक उगाई जाती है।
  • स्वाद (Taste): स्वाद की दृष्टि से टॉमी एटकिन्स आम अन्य कई किस्मों की तुलना में हल्का माना जाता है। इसका स्वाद मध्यम मीठा होता है, जिसमें थोड़ी सी तीक्ष्णता (tartness) भी है। गूदा सख्त (firm) बनावट का है और इसमें रेशे की मात्र मध्यम-उच्च होती है (यानी गूदे में रेशे महसूस होते हैं)। सुगंध और रस में यह Alphonso, केसर जैसे आमों जितना समृद्ध नहीं होता, लेकिन ठोस स्वाद प्रदान करता है। कई आम प्रेमी इसे स्वाद में औसत मानते हैं, लेकिन इसकी अन्य खूबियाँ इसे लोकप्रिय बनाती हैं। (Mango Varieties)
  • आकार व आकार (Size & Shape): टॉमी एटकिन्स फल आकार में मध्यम से बड़ा और आकार दीर्घवृत्ताकार (oval-oblong) होता है। एक पके फल का वजन 400–700 ग्राम तक हो सकता है। इसका छिलका काफ़ी सख्त और मोटा होता है, रंग में हरा-पीला आधार पर प्रचलित और उसपर चौड़ी लाल-बैंगनी आभा (ब्लश) होती है, जिससे यह देखने में आकर्षक लगता है। गूदा नारंगी-पीला होता है, और बीज बड़ा रहता है। (Mango Varieties)
  • मौसम (Season): टॉमी एटकिन्स आम की विशेषता है इसका लम्बा फलन सीज़न। विभिन्न उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में यह अलग-अलग समय पर फल देता है, लेकिन कुल मिलाकर मार्च से लेकर जुलाई-अगस्त तक कहीं न कहीं इसकी आपूर्ति बनी रहती है। उदाहरणतः फ्लोरिडा में यह जून-जुलाई में पकता है, तो ब्राज़ील में दिसंबर-जनवरी में, और अफ्रीका में अक्टूबर-नवंबर में – इस प्रकार यह साल में कई महीनों अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्ध रहता है। (Mango Varieties)
  • विशेषताएं (Special Features): टॉमी एटकिन्स आज विश्व में सबसे ज्यादा बिकने वाली आम किस्मों में से एक है। इसका मुख्य कारण है इसकी अत्यधिक लंबी शेल्फ-लाइफ़ और मज़बूत परिवहन सहनशीलता। मोटे छिलके और सख्त गूदे के कारण यह आम तोड़ने के बाद हफ्तों तक खराब हुए बिना रह सकता है और लंबी दूरी तक भेजा जा सकता है। यही वजह है कि सुपरमार्केट में अक्सर यही आम दिखते हैं। हालांकि स्वाद के मामले में पारखी लोग इसे “औसत” मानते हैं, इसकी उपलब्धता, आकार, रंग और टिकाऊपन ने इसे अंतर्राष्ट्रीय आम व्यापार का स्तंभ बना दिया है।

Mango Varieties: Kent (केंट आम)

  • उत्पत्ति (Origin): कैंट आम का विकास 1930 के दशक में फ्लोरिडा (USA) में हुआ। यह हेडन (Haden) आम की संतति मानी जाती है और फ्लोरिडा के कैप्टन कैंट परिवार के खेत में पहली बार पहचाना गया था। आज कैंट आम मुख्यतः मेक्सिको, इक्वाडोर, पेरू, ब्राज़ील जैसे लैटिन अमेरिकी देशों में व्यावसायिक रूप से उगाया जाता है, जो यूरोप और उत्तरी अमेरिका को निर्यात के प्रमुख स्रोत हैं। (Mango Varieties)
  • स्वाद (Taste): कैंट आम अपने मीठे और रसीले स्वाद के लिए मशहूर है। पके कैंट आम का गूदा बेहद कोमल, जूसी और स्वाद में आड़ू (peach) जैसे मीठे नोट लिए होता है। इसमें खटास न के बराबर होती है और सुगंध हल्की मधुर होती है। गूदे में रेशे भी बहुत कम होते हैं, जिससे इसका टेक्सचर बहुत स्मूद और मक्खन जैसा लगता है। इस बेहतरीन स्वाद-रस के कारण कैंट को आमतौर पर सीधे खाने के अलावा जूस और सुखाकर आम की फांक बनाने (drying) के लिए भी पसंद किया जाता है।
  • आकार व आकार (Size & Shape): कैंट आम आकार में बड़ा और गोल-अंडाकार (oval) होता है। एक फल का वजन 500–600 ग्राम या उससे अधिक हो सकता है। इसका छिलका खास बात यह है कि पकने पर भी काफी हरा बना रह सकता है – केवल जहाँ धूप लगती है वहाँ लाल या मैरून छांव आ जाती है, और हल्के पीले बिंदु छिलके पर दिखते हैं जब फल पूर्णतः पक जाता है। गूदा गहरा पीला-नारंगी होता है, बीज मध्यम आकार का और गूदा गुठली से आसानी से अलग हो जाता है। (Mango Varieties)
  • मौसम (Season): कैंट एक लेट-मिड सीज़न आम है। लैटिन अमेरिका में (जहाँ इसका बड़ा उत्पादन होता है) कैंट आम की फसल दिसंबर से फरवरी-मार्च के दौरान आती है, जो उत्तरी गोलार्ध के सर्दियों में ताज़ा आम की आपूर्ति करती है। वहीं फ्लोरिडा में यह जून-जुलाई में पकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेरू, इक्वाडोर आदि से आने वाला कैंट जनवरी से अप्रैल तक यूरोप/USA में पाया जा सकता है। कुल मिलाकर, इसका वैश्विक सीज़न मध्य सर्दियों से बसंत तक फैलता है।
  • विशेषताएं (Special Features): कैंट आम अपने समृद्ध रस और स्वाद के कारण जूस, स्क्वैश, पल्प उद्योग में प्रिय है। चूंकि गूदे में फाइबर बहुत कम है, इसका रस और स्लाइस काफी मुलायम निकलते हैं, जो प्रसंस्करण में लाभदायक है। यह फल आकार में बड़ा और दिखने में आकर्षक (हरे-लाल मिश्रित रंग) होता है, जो ग्राहकों को लुभाता है। कैंट आम की एक और खासियत है कि पकने पर भी इसका छिलका पूरी तरह पीला/नारंगी नहीं होता, जिससे कभी-कभी ग्राहक को अंदाज़ा लगाना मुश्किल हो सकता है – इसे हल्का दबाकर या खुशबू से पकाव का पता लगाया जाता है। अच्छी शेल्फ लाइफ़ और बढ़िया स्वाद के समन्वय ने कैंट को एक लोकप्रिय वैश्विक आम बना दिया है। (Mango Varieties)

Mango Varieties: Keitt (कीट आम)

  • उत्पत्ति (Origin): कीट आम का जन्म स्थान भी फ्लोरिडा, USA है। 1940 के दशक में मिस जेनोवा कीट (J.N. Keitt) ने होमस्टेड, फ्लोरिडा में अपने बागान में एक आम के बीज से इस पौधे को उगाया और इसे एक नई किस्म के रूप में विकसित किया। यह हेडन व अन्य फ्लोरिडा आमों की ही वंशज किस्म है। आज कीट आम कैरिबियन द्वीपों, मध्य व दक्षिण अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया तथा भारत के कुछ हिस्सों में भी उगाया जाता है। (Mango Varieties)
  • स्वाद (Taste): कीट आम का स्वाद मीठा होने के साथ थोड़ा हल्का तीखापन (sourness) भी लिए होता है, जो इसे संतुलित बनाता है। पूरी तरह पके फल में मिठास अधिक रहती है और उसमें एक हल्का साइट्रस (नींबू जैसा) नोट भी महसूस किया जा सकता है। इसका गूदा बहुत रसदार और रेशारहित होता है, जिससे खाने पर “जूसी” अहसास मिलता है। कुल स्वाद प्रोफ़ाइल मीठा-खट्टा और थोड़ा साइट्रसी माना जा सकता है, जो कई लोगों को ताज़गीभरा लगता है।
  • आकार व आकार (Size & Shape): कीट आम आकार में बहुत बड़ा होता है – यह दुनिया की सबसे बड़ी आम किस्मों में गिना जाता है। एक औसत कीट आम 700–900 ग्राम का हो सकता है, और कई बार घरों में उगे पेड़ों पर 1–2 किलो तक के विशाल फल भी देखे गए हैं। आकार अंडाकार (oval) होता है और छिलका मोटा व गाढ़े हरे रंग का रहता है – खास बात यह कि पकने के बाद भी कीट आम का छिलका पूरी तरह पीला या नारंगी नहीं होता, बल्कि हरे रंग का अधिकांश भाग बना रहता है। कभी-कभार हल्की पीली या गुलाबी छटा आ सकती है, पर कुल मिलाकर यह पकने पर भी हरा दिखता है। गूदा गहरे पीले रंग का, अत्यंत रसदार और बिल्कुल बिना रेशे का होता है। बीज भी काफी बड़ा व मोटा होता है, पर फल के आकार के अनुपात में ठीक रहता है। (Mango Varieties)
  • मौसम (Season): कीट आम बहुत लेट सीज़न वैरायटी है। फ्लोरिडा (USA) में यह सबसे आखिरी में फल देने वाली किस्मों में है – वहाँ अगस्त से लेकर सितंबर के आखिर या अक्टूबर तक कीट के फल पकते हैं। कैरेबियन व लैटिन अमेरिका में भी यह देर से (स्थानीय गर्मियों के अंत) आती है। इसका एक फायदा यह है कि जब दूसरी अधिकांश किस्में समाप्त हो जाती हैं, तब कीट ताज़ा आम की आपूर्ति जारी रखता है। भारत जैसे देशों में (जहाँ उपलब्ध है) कीट आम सितंबर तक मिलते हैं, जो सामान्य आम के मौसम से परे है।
  • विशेषताएं (Special Features): कीट आम अपने “विशाल आकार” और देर से फलन के लिए मशहूर है। एक कीट आम से कोई व्यक्ति पूरा पेट भर सकता है, इतने बड़े ये होते हैं। इसके अलावा, इसके छिलके का रंग अन्य आमों से अलग होता है – हरा रहते हुए भी फल पका होता है, इसलिए निर्यात बाजार में इसे ग्राहकों को समझाना पड़ता है कि हरा कीट भी मीठा पका होता है। स्वाद में अच्छी मिठास और हल्की खटास का मिश्रण इसे विविध उपयोगों के लिए बढ़िया बनाता है – ताज़ा खाने के अलावा इससे चटनी, अचार भी बनाए जाते हैं। बड़ी आकार और मोटे छिलके के कारण इसकी शेल्फ-लाइफ़ भी अच्छी होती है। कुल मिलाकर, कीट आम ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान बनाई है और आम के मौसम को बढ़ाने में योगदान दिया है।

Mango Varieties: Nam Dok Mai (नम डॉक माई – थाईलैंड)

  • उत्पत्ति (Origin): नम डॉक माई थाईलैंड की सबसे प्रसिद्ध आम किस्म है। यह एक देशज (native) वैरायटी है जो थाईलैंड में सदियों से उगाई जाती रही है। थाई भाषा में “नाम डोक माई” का अर्थ है “फूलों का रस/अमृत”, जो इसके मीठे स्वाद को दर्शाता है। वर्तमान में यह थाईलैंड में सबसे लोकप्रिय आम है और थाईलैंड के बाहर ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों तथा अमेरिका (फ़्लोरिडा) में भी कुछ हद तक उगाया जाता है।
  • स्वाद (Taste): इस आम का स्वाद बेहद मीठा माना जाता है, बिलकुल मिठास से भरपूर। पके फल में चीनी जैसा मीठापन होता है और खास बात इसकी सुगंध है – इसमें एक तेज़, मनभावन फूलों जैसी ख़ुशबू आती है। गूदा अत्यंत रेशारहित (virtually fiberless) और मुलायम होता है, जिससे इसे खाते समय एक कस्टर्ड जैसी क्रीमी अनुभूति होती है। थाईलैंड में इसे डेज़र्ट (मिठाई) आम कहा जाता है, क्योंकि यह ख़ास तौर पर मीठे व्यंजनों (जैसे प्रसिद्ध मैंगो स्टिकी राइस) में प्रयोग होता है। कुल मिलाकर नम डॉक माई का स्वाद बहुत मधुर और ख़ुशबूदार है, बिना किसी खटास के।
  • आकार व आकार (Size & Shape): यह फल आकार में मध्यम होता है और आकार लंबा-लौंग (elongated) होता है। नम डॉक माई आम का एक सिरा नुकीला होता है, जिसे “तोते की चोंच” जैसे बीक के रूप में पहचाना जाता है। फल का छिलका मध्यम पतला, पका होने पर पीले रंग का और उसपर हरी चित्तियाँ या चकत्ते हो सकते हैं। गूदा गहरे पीले रंग का होता है और पूरी तरह रेशा-मुक्त होता है। बीज बहुभ्रूणीय (polyembryonic) होता है, जो दक्षिण-पूर्व एशियाई आमों में आम बात है।(Mango Varieties)
  • मौसम (Season): नम डॉक माई एक प्रारंभिक-मध्य मौसम वाली किस्म है। थाईलैंड में इसकी मुख्य फसल अप्रैल-मई में आती है, जो मई-जून तक रहती है। दिलचस्प बात यह है कि अनुकूल परिस्थिति में एक ही पेड़ साल में दो बार तक फल दे सकता है (एक मुख्य सीज़न और एक छोटे सीज़न में), इसीलिए इसे कुछ लोग ever-bearing प्रवृत्ति का भी मानते हैं। ऑस्ट्रेलिया में (जहाँ उगाया जाता है) यह दिसंबर-जनवरी में पकता है। बहु-फलन की क्षमता और लचीले मौसम के कारण थाई किसान इसे बहुत मूल्यवान मानते हैं।
  • विशेषताएं (Special Features): नम डॉक माई थाईलैंड का सर्वाधिक लोकप्रिय डेज़र्ट आम है – वहां के पारंपरिक मीठे व्यंजन “मैंगो विद स्टिकी राइस” में यही आम प्रयोग होता है, क्योंकि इसका मीठा स्वाद और गाढ़ा पीला गूदा नारियल दूध के साथ बढ़िया मेल खाता है। इसकी एक बड़ी विशेषता लगभग रेशारहित मुलायम गूदा है, जिससे इसे खाने का अनुभव बहुत अच्छा होता है और बच्चे-बूढ़े सभी के लिए उपयुक्त है। इस किस्म का उल्लेख आये दिन “दुनिया के सर्वश्रेष्ठ आम” सूचियों में होता है। नम डॉक माई के पेड़ काफी ऊँचे हो सकते हैं (>6 मीटर) और उत्पादन अच्छा देते हैं। कुल मिलाकर, स्वादिष्टता और सुगंध के मामले में यह एशिया के ही नहीं बल्कि विश्व के श्रेष्ठ आमों में गिना जाता है।

Mango Varieties: Kensington Pride (केन्सिंग्टन प्राइड, ऑस्ट्रेलिया)

  • उत्पत्ति (Origin): केन्सिंग्टन प्राइड आम ऑस्ट्रेलिया की सबसे जानी-मानी आम किस्म है। इसका उद्गम क्वींसलैंड के बोवेन (Bowen) नामक कस्बे में 1880 के दशक में हुआ था। प्रारंभिक नाम “Bowen Special” था। माना जाता है कि भारत से घोड़ों के व्यापारी कुछ आम के बीज उन दिनों ऑस्ट्रेलिया लाए थे और उनमें से एक से यह वृक्ष उगा। चूंकि यह बहुभ्रूणीय (polyembryonic) था और फल का रंग-आकार भारतीय आमों सा दिखता था, समझा जाता है कि यह दक्षिण-पूर्व एशियाई व भारतीय नस्ल का मिश्रण रहा होगा। बोवेन के केन्सिंग्टन नामक क्षेत्र के एक बगीचे से इसे चुनकर फैलाया गया, इसलिए इसका नाम केन्सिंग्टन प्राइड पड़ा। आज यह ऑस्ट्रेलिया में सबसे ज्यादा उगाई जाने वाली आम किस्म है और “ऑस्ट्रेलियाई आम का पर्याय” बन चुकी है।
  • स्वाद (Taste): केन्सिंग्टन प्राइड को ऑस्ट्रेलिया का सबसे बेहतरीन स्वाद वाला आम माना जाता है। इसका स्वाद मीठा होने के साथ एक चटकीला टैंगी (हल्का खट्टा-मीठा) फ्लेवर भी लिए रहता है। गूदे में एक मसालेदार मीठी सुगंध और स्वाद आता है, जिसे कई लोग “स्पाइसी-स्वीट” कहते हैं। खाने में बहुत रसीला और आनंददायक होता है। इसकी महक भी तेज होती है – एक पका फल आसपास मैंगो की खुशबू फैला देता है। ऑस्ट्रेलिया में आम प्रेमी इसकी संतुलित मिठास व चटपटे स्वाद की बहुत सराहना करते हैं।
  • आकार व आकार (Size & Shape): फल आकार में मध्यम से बड़े (औसतन ~500 ग्राम) होते हैं। आकार अंडाकार (ovate) होता है और फल का अग्र भाग गोल, बिना नोंक (beak-less rounded apex) के होता है। छिलका मध्यम मोटाई का, जो पकने पर पीले रंग का हो जाता है और अक्सर उसपर नारंगी-गुलाबी लालिमायुक्त आभा (ब्लश) आ जाती है। गूदा गाढ़ा पीला रंग का होता है, स्वादिष्ट रसदार लेकिन हल्का रेशेदार (moderate fiber) होता है। तुलना में इसमें Alphonso या नम डॉक माई जैसी रेशारहित मुलायमता नहीं, बल्कि कुछ रेशे रहते हैं, पर इन्हें भी बहुत अधिक नहीं माना जाता। बीज बहुभ्रूणीय होता है, जिससे गुणधर्म पीढ़ियों तक सही रहते हैं।
  • मौसम (Season): ऑस्ट्रेलिया में केन्सिंग्टन प्राइड आम गर्मियों के मौसम में उपलब्ध होता है। उत्तरी ऑस्ट्रेलिया (NT, WA) में इसकी पहली फसल सितंबर के अंत से आनी शुरू होती है, जबकि क्वींसलैंड में अक्टूबर-नवंबर में और न्यू साउथ वेल्स के गर्म इलाकों में दिसंबर तक आती है। कुल मिलाकर ऑस्ट्रेलियाई आम सीज़न की शुरुआत इसी किस्म से होती है और विभिन्न क्षेत्रों में यह फरवरी तक कहीं न कहीं पाया जाता है। एक पेड़ से फल आमतौर पर दो महिनों तक मिलते हैं। फ्लोरिडा (USA) में यह जुलाई के आसपास पकता है, लेकिन वह कम मात्रा में उगाया जाता है।
  • विशेषताएं (Special Features): केन्सिंग्टन प्राइड ऑस्ट्रेलिया की “सिग्नेचर” आम वैरायटी है – आज भी देश के कुल आम उत्पादन का बड़ा हिस्सा यही है। इसे उगाने वाले बताते हैं कि इसके पेड़ तेज़ी से बढ़ते हैं और 6-8 मीटर तक ऊँचे हो सकते हैं। हालांकि बाग़वानों को इसे छंटाई द्वारा नियंत्रित करना पड़ता है, क्योंकि बहुत बढ़ने पर फलन कम हो सकता है। इस किस्म की फलन आदत थोड़ी अनिश्चित (alternate bearing) होती है और कुछ साल पैदावार कम-ज्यादा हो सकती है। फिर भी, अपने स्वाद के कारण इसकी मांग बनी रहती है। केन्सिंग्टन प्राइड आम के गूदे में कुछ रेशा होता है, इसलिए इसे खाने में हल्का क्रंच मिल सकता है, पर रस बहुत अधिक होता है। इसका इस्तेमाल ऑस्ट्रेलिया में स्मूदी, सालसा इत्यादि में भी होता है। कुल मिलाकर, मिठास-खटास के मेल वाले मज़ेदार स्वाद और आकर्षक रंग-गंध के कारण यह आम विश्व आम-प्रेमियों द्वारा भी सराहा जाता है।

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