धान भारत की प्रमुख खाद्यान्न फसल है और इसकी खेती का पहला चरण है – धान की नर्सरी। अगर नर्सरी में पौधे अच्छे से विकसित होंगे, तो मुख्य खेत में बेहतर उत्पादन सुनिश्चित होगा। इसके लिए जरूरी है कि किसान सही खाद और पोषक तत्व नर्सरी में डालें।
कई किसान केवल बीज डालकर नर्सरी की परवाह नहीं करते, जिससे पौधे कमजोर होते हैं और आगे चलकर उत्पादन में भारी गिरावट आती है। अगर आप चाहते हैं कि आपकी फसल लहलहाए और आप मालामाल बनें, तो नर्सरी में सही जैविक और रासायनिक खाद का उपयोग अनिवार्य है।
नर्सरी की मिट्टी की तैयारी से पहले करें ये काम
भूमि चयन एवं तैयारी
- उच्च भूमि का चयन करें जहां जलजमाव न हो।
- 2-3 बार जुताई कर के मिट्टी भुरभुरी बनाएं।
- एक बार ट्रैक्टर या देशी हल से अच्छी तरह पलवार करें।
- बुवाई से 7 दिन पहले खेत को पानी से भिगो दें।
जैविक खाद का महत्व: मिट्टी को बनाएं उपजाऊ
गोबर की सड़ी हुई खाद (FYM)
- प्रति एकड़ 8-10 क्विंटल डालें
- मिट्टी में जीवांश बढ़ाता है
- जड़ों की पकड़ मजबूत करता है
वर्मी कंपोस्ट
- 2-3 क्विंटल प्रति एकड़ पर्याप्त
- सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ाता है
- पौधों की ग्रोथ तेज करता है
नीम की खली
- 1-2 किलो प्रति वर्ग मीटर
- कीटों से सुरक्षा करता है
- मिट्टी के pH को संतुलित करता है
ट्राइकोडर्मा / पीएसबी कल्चर
- जैविक रोगनाशक के रूप में
- फफूंद जनित रोगों को रोकता है
- पौधों को मजबूती देता है
रासायनिक खाद: संतुलित मात्रा में ही करें उपयोग
नाइट्रोजन (N)
- यूरिया का उपयोग करें: 1.5 से 2 किलो प्रति सेंट
- पौधों की हरी पत्तियां और ग्रोथ में सहायक
- 2 बार में बांट कर डालें – बुवाई के समय और 15 दिन बाद
फास्फोरस (P)
- DAP का उपयोग करें: 1 किलो प्रति सेंट
- जड़ विकास के लिए जरूरी
- एक बार ही डालना पर्याप्त
पोटाश (K)
- MOP (Muriate of Potash): 0.5 किलो प्रति सेंट
- पौधों को मजबूती और रोग प्रतिरोधकता प्रदान करता है
- विशेषकर सूखा या अधिक वर्षा वाली स्थिति में लाभकारी
माइक्रो न्यूट्रिएंट्स: कम मात्रा में, लेकिन अत्यंत जरूरी
जिंक सल्फेट (ZnSO₄)
- 25 किलो प्रति हेक्टेयर
- पौधों में पीलापन न आए इसके लिए आवश्यक
- नर्सरी में डालने से मुख्य खेत में उपयोग की जरूरत कम हो जाती है
फेरस सल्फेट (FeSO₄)
- 20 किलो प्रति हेक्टेयर
- पत्तियों का हरा रंग बनाए रखने में मददगार
नर्सरी में खाद डालने का तरीका और समय
- बुवाई से पहले:
- गोबर खाद, नीम की खली, वर्मी कंपोस्ट और पीएसबी कल्चर मिलाएं
- 5-7 दिन पहले खेत में मिला दें ताकि सड़ जाए
- बुवाई के समय:
- DAP, MOP और जिंक सल्फेट मिलाकर मिट्टी में अच्छे से मिलाएं
- बीज बोने के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें
- बुवाई के 15 दिन बाद:
- यूरिया का पहला छिड़काव करें
- अगर पत्तियां पीली पड़ने लगे तो फेरस सल्फेट का प्रयोग करें
कितना लाभ होगा?
जब नर्सरी में ही पौधे मजबूत तैयार होंगे, तो मुख्य खेत में—
- 30-35% तक अधिक उत्पादन संभव है
- पौधों में रोग कम लगेंगे
- ट्रांसप्लांटिंग के बाद जल्दी ग्रोथ होगी
- बाजार में अच्छी क्वालिटी का धान मिलेगा
यह सभी लाभ अंततः किसान को अधिक मुनाफा और बेहतर जीवन स्तर देते हैं।
निष्कर्ष: मजबूत नर्सरी, मजबूत भविष्य
धान की नर्सरी को हल्के में लेना बड़ी गलती है। किसान अगर शुरुआत में ही जैविक खाद, सूक्ष्म पोषक तत्व और संतुलित रासायनिक खाद डालकर पौधों को पोषित करें, तो पूरी फसल मजबूत होती है और उत्पादन कई गुना बढ़ जाता है।
सही खाद, सही समय पर, सही मात्रा में डालें — और बनें मालामाल किसान।
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