By Alok Kumar Mishra

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पश्चिमीकरण का भारतीय संस्कृति पर प्रभाव…मनुष्य एक चेतनशील प्राणी है जो हमेशा अपनी स्थिति को सुधार करने में लगा रहता है और उसके इसी कार्य का लंबा विवरण जिसमें परिलक्षित होता है वो संस्कृति है। जिसमें खानपान, रहन–सहन , भेष –भूषा , पर्व त्यौहार आदि आते हैं।

भारतीय संदर्भ में बात करें तो इसकी संस्कृति सिंधु सभ्यता से अभी तक निरंतर बने हुए हैं और इसी कारण भारत आज भी कितने ही बाह्य संस्कृतियों के समागम के साथ अपना मूल पहचान बनाए हुए है। प्राचीन रोम, ईरानी, तुर्क, मुगल और फ़िर पश्चिमी देशों में जिसमें ब्रिटेन ने भारतीय संस्कृति को प्रभावित करने की कोशिश तो की लेकिन इसमें आमूल चूल परिवर्तन नहीं कर पाए।

चूंकि संस्कृतिकरण की प्रक्रिया में हमने बहुत कुछ सीखा और सिखाया फिर भी हमारे संस्कृति को जिसने सबसे अधिक प्रभावित किया उसमें ‘पश्चिमीकरण ’ का सबसे अधिक प्रभाव दिखाई देता है। पश्चिमीकरण को हम ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस सहित पश्चिमी देशों के पूर्व पर पड़े प्रभाव के रूप में देखते है।

भारतीय संस्कृति में पश्चिमीकरण के प्रभावों को कई अलग-अलग स्वरूपों में देखा जा सकता है, जैसे सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक, आर्थिक और प्रशासनिक, सांस्कृतिक आदि।

पश्चिमीकरण का भारतीय संस्कृति पर प्रभाव भारत के ब्रिटेन के उपनिवेश बनने से शुरू होता है जब पश्चिम पुनर्जागरण और मानवतावाद के आधुनिक विचारों से विकास के नए आयाम सृजन कर रहा था उस समय भारत अपनी आज़ादी के लिए संघर्षरत था।।

पश्चिमीकरण ने भारतीय संस्कृति को सकारात्मक और नकारात्मक दोनों रूप में प्रभावित किया है।

एक तरफ़ पश्चिम से उपजे लोकतांत्रिक विचार, स्वतंत्रता, समानता, महिला अधिकारों के प्रति चेतना, सामाजिक कुरीतियों का उन्मूलन, आधुनिक शिक्षा, मानववाद की स्वीकृति, वास्तुकला में नवीन तत्वों का प्रयोग , आधुनिक चिकित्सा प्रणाली, यातायात और संचार के नए साधन आदि का उपहार दिया जो देश को आधुनिक विश्व के साथ कदमताल करते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करता है।

दूसरी तरफ़ पश्चिमीकरण ने कुछ नकारात्मक तत्व भी दिए जैसे औद्योगिकरण के कारण मानव का संयुक्त परिवार से अलग होकर एकाकी रहना, उपभोक्तावादी संस्कृति जो मूल भारतीय संस्कृति से विपरीत है, सादा जीवन का त्याग, विकास के साथ समाज में वर्गभेद, नगरीकरण से प्रदूषण सहित तमाम समस्याएं , प्राचीन योग आयुर्वेद की परंपरा का क्षरण , अपनी भाषाओं को लेकर हीनता का भाव आदि ने भारतीय संस्कृति को प्रभावित किया।

भारत आज विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश है , भारतीय युवा वर्ग पर भी पश्चिमीकरण का व्यापक प्रभाव पड़ा गुलामी के दौर में राजाराम मोहन राय, विद्यासागर आदि ने पश्चिमी शिक्षा से सामाजिक सुधारों की नीव रखी तो भगत सिंह, सुखदेव, सुभाष चंद्र बोस आदि ने पश्चिम ज्ञान को आत्मसात कर राष्ट्रीय आंदोलन को मजबूती प्रदान की। सीवी रमन, होमी जहांगीर भाभा, जगदीश बसु ने विज्ञान के क्षेत्र में पश्चिमी ज्ञान को प्राप्त कर योगदान दिया।

आज जबकि हम सूचना क्रांति के दौर में जी रहे हैं और दुनियां ग्लोबल विलेजबन रही है तो इस दौर में किसी भी विचार से अछूता रहना असंभव है और आज का युवा चाहे खानपान में मेकडॉनलाल्ड और संगीत में ब्रिटनी को सुने चाहे खेल में रोनाल्डो को पसंद करे लेकिन खाने में भारतीय व्यंजन को, संगीत में शास्त्रीय संगीत और खेलों में कबड्डी को भी पसंद करता है और अपनी साझी संस्कृति का सम्मान करते हुए आने वाले कल लिए तैयार है ।

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