ड्रैगन फ्रूट, जिसे हिंदी में “कमलम” भी कहा जाता है, एक विदेशी फल है जो अब भारत में भी लोकप्रियता प्राप्त कर चुका है। इसके पोषक तत्व, स्वाद और बाजार में बढ़ती मांग इसे किसानों के लिए लाभकारी फसल बनाते हैं। यह विशेष रूप से शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में बहुत अच्छी उपज देता है।
उपयुक्त जलवायु और स्थान
ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए गर्म और शुष्क जलवायु सर्वोत्तम मानी जाती है। यह पौधा 10°C से 40°C तक के तापमान को सहन कर सकता है लेकिन 20°C से 30°C तक का तापमान सबसे उपयुक्त रहता है।
- वर्षा: 500 से 1200 मिमी सालाना
- उच्च आर्द्रता और अधिक पानी नुकसानदायक
उपयुक्त मिट्टी
इस फल के लिए हल्की, रेतीली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। मिट्टी की pH वैल्यू 5.5 से 7 के बीच होनी चाहिए।
- अच्छी जल निकासी होनी चाहिए
- क्षारीय या भारी मिट्टी से बचें
ड्रैगन फ्रूट की किस्में
भारत में मुख्यतः तीन प्रकार की किस्में उगाई जाती हैं:
- लाल गूदा, लाल छिलका (Hylocereus costaricensis)
- सफेद गूदा, लाल छिलका (Hylocereus undatus)
- लाल गूदा, पीला छिलका (Hylocereus megalanthus)
सबसे अधिक मांग लाल छिलके और सफेद गूदे वाली किस्म की होती है।
खेत की तैयारी और पौध रोपण
ड्रैगन फ्रूट बेल की तरह बढ़ता है, इसलिए इसे सहारे की आवश्यकता होती है। इसके लिए खेत में खंभे (कंक्रीट/बांस) लगाए जाते हैं।
- पौध रोपण दूरी: 2×2 मीटर
- 1 एकड़ में पौध संख्या: 1700–1800 पौधे
- सहारा देने हेतु सीमेंट पोल या लकड़ी के खंभे लगाएं
- पोल के ऊपर टायर या रिंग लगाकर बेल को फैलने दें
सिंचाई व्यवस्था
ड्रैगन फ्रूट को अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती। टपक (Drip) सिंचाई प्रणाली इसके लिए सबसे उपयुक्त होती है।
- गर्मी में सप्ताह में 2 बार सिंचाई
- बरसात में सिंचाई की आवश्यकता नहीं
- जलभराव से जड़ें सड़ सकती हैं
रोग और कीट नियंत्रण
ड्रैगन फ्रूट पर सामान्यतः रोग कम लगते हैं, लेकिन अत्यधिक नमी के कारण फफूंदी, स्टेम रॉट आदि रोग हो सकते हैं।
- नीम का तेल स्प्रे करें
- जलभराव से बचें
- समय-समय पर पौधों की छंटाई करें
कटाई और उत्पादन
ड्रैगन फ्रूट की फसल रोपण के 12 से 18 महीने बाद फल देने लगती है और प्रति पौधा 10 से 20 फल देता है।
- फलों की तुड़ाई जून से नवंबर तक की जाती है
- एक फल का वजन 200 से 800 ग्राम तक होता है
- 1 एकड़ से सालाना 8 से 12 टन उपज संभव है
लागत और मुनाफा
ड्रैगन फ्रूट की खेती में प्रारंभिक लागत पोल, पौध, और ड्रिप सिस्टम पर होती है, जो लगभग ₹4–5 लाख प्रति एकड़ हो सकती है। लेकिन अच्छी देखभाल से प्रति एकड़ ₹8 से ₹10 लाख सालाना तक की कमाई संभव है।
- एक बार रोपण करने के बाद 20 साल तक उत्पादन
- कम श्रम और कम रोग, ज्यादा लाभ
बाजार और निर्यात
ड्रैगन फ्रूट की मांग बड़े शहरों, होटल, सुपरमार्केट और आयुर्वेदिक कंपनियों में तेजी से बढ़ रही है। इसका उपयोग जूस, सलाद और औषधियों में किया जाता है। यह निर्यात के लिए भी एक उच्च मांग वाला फल है।
निष्कर्ष
ड्रैगन फ्रूट की खेती भविष्य की दृष्टि से एक बेहद लाभकारी विकल्प है। कम पानी, कम देखभाल और अधिक उत्पादन इसे विशेष बनाते हैं। भारत में सरकार भी अब इसे प्रोत्साहित कर रही है, जिससे इसकी खेती किसानों के लिए एक स्थायी और फायदे का सौदा बन सकती है।
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