Heart attack and cardiac arrest

बीते कुछ वर्षों में कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक(CARDIAC AND HEART ATTACK) की घटनाएं ज्यादा देखने को मिलने लगी हैं। ज्यादातर लोगों को अब इस बीमारी से भयभीत होते भी देखा जा सकता है। शादी हो या कोई अन्य कार्यक्रम सब जगह से ऐसी भयानक खबरें लोगों को अंदर से झकझोर देती है। बता दें कि, दो दिन पहले एक व्यक्ति साई बाबा मंदिर में हार्ट अटैक के कारण मृत्यु का शिकार हो गया। इसी प्रकार की घटना एक शादी में फुफ्फा के डांस करते हुए भी सामने आई जहां डांस करते हुए वे जमीन पर गिर गए और फिर कभी भी नहीं उठे।

वर्तमान समय में यह एक ऐसी समस्या का रूप ले रखी है, जिसका सामना कभी भी किसी को करना पड़ सकता है। हालांकि, देखा जाए तो पहले भी ये बीमारियां संसार में मौजूद थी परंतु आज संचार क्रांति ने लगभग हर पहलू को सामने लाने का कार्य किया है उसके चलते ये खबरें सुर्खियों में है। वहीं इसे सुर्खियों में रखने का काम बड़े स्टार्स, कॉमेडियन या उद्योगपतियों के मृत्यु ने भी काफी हद तक किया है जिनका असर उनके चाहने वालो पर अधिक होता है।

खैर, वापस इस विषय पर, अध्ययन और एक्सपर्ट की बात को मानें तो, अधिकतर लोगों को दिन के शुरुआती घंटो में कार्डियक अरेस्ट या हार्ट अटैक का सामना करना पड़ता है। परंतु क्या आपने कभी सोचा है की सुबह के समय या तड़के ही क्यों कार्डियक अरेस्ट या हार्ट अटैक (CARDIAC AND HEART ATTACK)ज्यादा आते हैं?

अध्ययन की बात माने तो, शरीर में ऐसा कुछ हार्मोन के रिलीज होने के कारण होता है। अधिकतर लोगों को दिन के शुरुआती घण्टे के दौरान, हमारे शरीर में साइटोकिनिन नाम का एक हार्मोन रिलीज होता है जो आरिदमिया या अचानक कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है। वहीं दिन के समय में व्यक्ति ज्यादा एक्टिव रहता है परंतु रात के समय काफी थका हुआ रहता है ऐसे में उसे नींद की जरूरत होती है।

वहीं सरकेडियम रिदम के रिस्पॉस में हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर में यह वृद्धि सुबह के समय कार्डियोवस्कुलर सिस्टम को बहुत इरिटेट कर देती है। यह शरीर के अंदर 24 घण्टे चलने वाली क्लॉक की तरह है जो पर्यावरण या लाइट के बदलने पर आपके सोने और जागने के समय का ध्यान रखती है।

ओरगन हेल्थ एण्ड साइंस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता की एक स्टडी के मुताबिक, इसके लिए हमारे शरीर की इंटरनल क्लाक जिम्मेदार होती है। एक एक्सपर्ट के मुताबिक, हमारे शरीर में एक बॉयोलॉजिकल क्लॉक होती है, जो हमारी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में मदद करती हैं। 
लंदन की क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी में हूुई एक और रिसर्च में पाया गया है कि कार्डियोवस्कुलर डिजीज के मरीजों के ब्लड में सुबह के समय प्रोटेक्टिव मॉलिक्यूल्स का लेवल काफी कम हो जाता है। जिसक कारण उनमें ब्लड क्लॉट और हार्ट अटैक का खतरा और बड़ जाता है।
द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिघम और महिला अस्पताल और ओरेगन स्वास्थ्य और विज्ञान विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, हमारे शरीर की आंतरिक घड़ी को दोष देना है। फरीदाबाद के मेट्रो हार्ट हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ नीती चड्ढा नेगी ने कहा, "दिन के समय हम अधिक सतर्क और कुशल होते हैं, लेकिन हम अपनी सारी एनर्जी का उपयोग करते हैं और कुछ आवश्यक नींद के लिए तैयार रहते हैं। हमारी जैविक घड़ी मदद करती है। हमारी दैनिक जरूरतों के लिए प्रतिक्रिया करना। इस जैविक घड़ी के कारण, हम सुबह की सहानुभूति वृद्धि के जवाब में ब्लड प्रेशर और हृदय गति में वृद्धि देखते हैं। सर्कैडियन लय के जवाब में हृदय गति और ब्लड प्रेशर में यह वृद्धि हृदय प्रणाली को और ज्यादा चिड़चिड़ा बना देती है सुबह।"

अधिकांश कार्डियक अरेस्ट या हार्ट अटैक सुबह 4 बजे से 10 बजे के बीच में घटित होते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इस समय ब्लड प्लेटलेट्स चिपचिपे हुए रहते हैं। वहीं इस समय, एड्रेनालाइन ग्रंथियों से एड्रेनालाइन रिलीज होने लगता है। इसके बढ़ने से कोरोनरी धमनियों में जमें प्लाक टूटने लगता हैं। जिसके चलते सरकेडियम सिस्टम सुबह ज्यादा PAI-1 कोशिकाओं को रिलीज करने लगता है। यह ब्लड क्लॉट को टूटने से रोकता है।

खून में PAI-1 कोशिकाओं की मात्रा जितनी अधिक होगी उसी रूप में, उतनी ही ज्यादा संभावना खून में ब्लड क्लॉटिंग की भी बढ़ जाएगी। जिसके चलते हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट के आने की संभावना में भी वृद्धि देखने को मिल सकता है।

किन वजहों से बड़ सकता है हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट का खतरा?

विशेषज्ञों का मानना है कि मधुमेह(DIABETES), उक्त रक्तचाप(HYPERTENSION), नियमित धूम्रपान(REGULAR SMOKING), से कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक का खतरा काफी बड़ सकता है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि वर्तमान समय में युवा पीढ़ी अपने जीवन के शुरुआत में ही इन बिमारियों का सामना करना पड़ रहा है। जिसके पीछ कई कारण हैं। जिसमें गलत लाइफस्टाइल, सोने और जागने का खराब साइकिल, बढ़ता हुआ स्ट्रेस लेवल, अत्यधिक मात्रा में शराब का सेवन और अनहेल्दी खाने की आदतें इसकी मुख्य वजहें हैं।

अध्ययन का यह भी कहना है कि अगर आप हेल्दी या स्वस्थ रहना चाहते हैं तो यह जरूरी है कि 7 से 8 घण्टे की भरपूर नींद लें, स्ट्रेस फ्री लीइफ स्टाइल व्यतीत करें और स्वास्थ्यजनक आहार लें।

हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में क्या है अन्तर:-

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