AIDA को विस्तारित रूप में ध्यान(Attention), रुचि(Interest), इच्छा(Desire), और कार्य(Action), कहा जाता है। यह एक विज्ञापन प्रभाव मॉडल है। यह मॉडल ई. सेंट. इल्मों लुइस (E.St. Elmo Lewis) ने 1898 में दिया था। लुइस इस मॉडल का प्रयोग करके व्यक्तिगत बिक्री कैसे काम करती है का पता लगाना चाहते थे। उन्होंने इस मॉडल द्वारा निरीक्षण करने के लिए कुछ क्रम निर्धारित किए और प्रक्रिया का वर्णन करते हुए कहा कि विक्रेता को बिक्री प्राप्त करने के लिए एक संभावित ग्राहकों के उत्पादन के बारे में ध्यान रखना चाहिए इसी के साथ उन्हें लाभान्वित और जागरूक भी करना चाहिए।

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इल्मों लुइस का यह मॉडल उनके निरीक्षण में सफल हुआ। मॉडल के अनुसार अगर व्यक्तिगत बिक्री के लिए एक विक्रेता संभावित ग्राहकों को उत्पाद के बारे में क्रम अनुसार जानकारी दें तब वे अपनी बिक्री को बढ़ा सकते हैं।

इस मॉडल में सन 1911 में ‘फ्रेड्रिन’ ने इसमें एक चरण और जोड़ दिया था जिसके बाद इस मॉडल को AIDAS मॉडल के नाम से जाना जाने लगा। फ्रेड्रिन ने ‘S’ का अर्थ संतोष(Satisfaction) बताया।

AIDA MODEL के चरण:-

  1. A- ATTENTION (ध्यान)
  2. I- INTEREST (रुचि)
  3. D- DESIRE (इच्छा)
  4. A- ACTION (कार्य)

1911 में जोड़ा गया:- (5). S- Satisfaction (संतुष्टि/संतोष)

1. Attention (ध्यान):- प्रथम चरण में उत्पादक विज्ञापन के माध्यम से उपभोक्ता को अपने उत्पाद की ओर ध्यान आकर्षित करता है। अपने उत्पाद की जानकारी देकर उसके लाभ बता कर।

2. Interest(रुचि):- दूसरे चरण में उत्पादक अपने वस्तु के प्रति उपभोक्ता में रुचि पैदा करता है। उसका उपयोग बता कर उसके जीवन में इसकी जरूरत को बता कर इसके महत्व को बताकर जब उपभोक्ता की रूचि पैदा होती है तब इसकी जानकारी पूरी तरह से जान लेता है।

3. Desire(इच्छा):- तीसरे चरण में उपभोक्ता के रुचि को इच्छा में बदलना होता है। उपभोक्ता को यह विश्वास दिलाना होता है कि वह इस उत्पाद की जरूरत है। इस चरण में उपभोक्ता की स्वयं की इच्छा जागृत हो जाती है वस्तु के लिए।

4. Action(कार्य):- इस चरण में उपभोक्ता वस्तु को बाजार में देखने और उसे लेने के मकसद से आया है। वह उस वस्तु के प्रति कार्य करता है, कीमत मोलभाव करता है आदि।

1911 में फ्रेड्रिन ने इसमें ‘संतोष’ जोड़ा था उनके अनुसार इस मॉडल में उपभोक्ता को संतुष्टि प्राप्त होना बहुत महत्वपूर्ण है।

विशेषता

  1. लिनियर मॉडल
  2. विज्ञापन के अलावा अन्य सेक्टर, बिजनेस में भी उपयोगी है।
  3. उपभोक्ता के व्यवहार का आकलन क्रम अनुसार किया जाता है।
  4. संतुष्टि को भी महत्व दिया है।
  5. यह एक सदी से भी अधिक समय से उपयोग होने वाला मॉडल है।

आलोचनाएं

  1. लिनियर मॉडल होने के कारण इस मॉडल में उपभोक्ता का अंतिम भाव नहीं पता चलता है।
  2. यदि उपभोक्ता अंतिम चरण तक साथ नहीं रहता तब यह प्रक्रिया पूरी तरह से विफल हो जाती है।

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