gehun ki baat

Gehun Ki Baat: ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम में बदलाव हो रहा है, जिससे गेहूं की फसल समय से पहले पक जाती है। किसान ज्यादातर कंबाइन मशीन से कटाई करते हैं, जिससे दाने जल्दी और सुरक्षित इकट्ठे हो जाते हैं। लेकिन इस प्रक्रिया में नरई (गेहूं का ठूंठ) खेत में ही रह जाती है। यदि इसका सही उपयोग किया जाए तो यह खेत की उर्वराशक्ति बढ़ाने में बेहद कारगर साबित हो सकती है। (Gehun Ki Baat)

नरई का सही प्रबंधन क्यों जरूरी है? (Gehun Ki Baat)

कई किसान नरई को जलाकर खेत साफ कर देते हैं, जिससे तुरंत तो सफाई मिलती है, लेकिन इसके दूरगामी परिणाम बहुत घातक होते हैं।

  • पोषक तत्वों की कमी
  • खेत के जीवाणु नष्ट
  • ह्यूमस का नुकसान
  • पशुचारे की कमी
  • वायुमंडलीय प्रदूषण और
  • आग फैलने का खतरा

इसलिए जरूरी है कि किसान नरई का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करें, जिससे खेत की उर्वराशक्ति बनी रहे और भूसा या खाद के रूप में अतिरिक्त लाभ भी मिल सके। (Gehun Ki Baat)

Gehun Ki Baat: नरई प्रबंधन की वैज्ञानिक विधि

  1. कंबाइन से कटाई के बाद भूसा बनाएं:
    • कटाई के तुरंत बाद रीपर मशीन से नरई का भूसा बनवाएं
    • भूसा पशुपालन में उपयोगी होता है और आमदनी बढ़ाता है
  2. नरई को खेत में सड़ाएं (डिकम्पोजिंग):
    • कटाई के तुरंत बाद खेत में पानी लगाएं
    • 200 लीटर पानी में 10–15 किलो यूरिया मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें
    • इसके बाद हैरो या मिट्टी पलटने वाले हल से पलटाई करें
    • 15–20 दिन बाद दोबारा पलटाई करें, फिर धान के लिए सनई या ढैंचा की हरी खाद बोएं
  3. जैविक खाद तैयार करें:
    • बची हुई नरई से नाडेप, वर्मी कंपोस्ट या अन्य जैविक खाद तैयार की जा सकती है
    • यह खाद बाद में खेत में पोषक तत्त्वों की आपूर्ति करती है

नरई सड़ाने से मिट्टी को क्या मिलता है?

प्रति एकड़ सड़ाई से मिलते हैं:

  • 14.3 किग्रा नाइट्रोजन
  • 1092 किग्रा कार्बनिक पदार्थ
  • खरपतवार नियंत्रण
  • 0.3–0.5% से बढ़कर 0.8% तक कार्बनिक पदार्थ की मात्रा

नरई जलाने से होने वाले नुकसान

  • भूसे की कमी, पशुपालन में खर्च बढ़ता है
  • मिट्टी के फायदेमंद जीवाणु नष्ट हो जाते हैं
  • पोषक तत्त्व व ह्यूमस समाप्त, उर्वरता में गिरावट
  • अगली फसल के लिए अधिक उर्वरक की जरूरत
  • आग फैलने का खतरा और आस-पास की फसल का नुकसान
  • वातावरण में प्रदूषण और तापमान वृद्धि

नरई की रासायनिक संरचना (प्रति किलोग्राम)

पोषक तत्वमात्रा (ग्राम)
कार्बन42.0
नाइट्रोजन5.50
फास्फोरस0.40
पोटाश10.40
सल्फर0.60
कैल्शियम2.90
मैग्नीशियम0.60
C/N अनुपात76.4
C/P अनुपात105.0
C/S अनुपात466.7
N/S अनुपात13.8

निष्कर्ष

अगर किसान गेहूं की नरई का उचित प्रबंधन करें—जैसे भूसा बनाना, खेत में सड़ाना या कंपोस्ट खाद बनाना—तो वे खेत की उर्वराशक्ति को बनाए रखते हुए लागत कम कर सकते हैं और उत्पादन बढ़ा सकते हैं। साथ ही, प्रदूषण से भी बचा जा सकता है, जो आज की आवश्यकता है। (Gehun Ki Baat)

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