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ड्रैगन फ्रूट की खेती करना चाहते हैं? पहले जान लें ये प्रमुख बीमारियाँ और उनके नियंत्रण के उपाय

ड्रैगन फ्रूट यानी ‘कमलम’ की खेती आजकल देश के कई हिस्सों में तेज़ी से लोकप्रिय हो रही है। इसकी कम देखभाल में अधिक उत्पादन और बाज़ार में अच्छी कीमत मिलने के कारण किसान इसे अपनाने लगे हैं। लेकिन सफल खेती के लिए यह ज़रूरी है कि आप इसमें लगने वाली प्रमुख बीमारियों और उनके नियंत्रण उपायों को समझें, ताकि समय पर बचाव किया जा सके।

ड्रैगन फ्रूट की प्रमुख बीमारियाँ और उनका समाधान

1. तने पर लाल/भूरे धब्बे (Botryosphaeria Dothidea)

यह एक कवक जनित रोग है जिसमें तनों पर लाल या भूरे रंग के धब्बे दिखते हैं, जो कभी-कभी बैल की आँख जैसे होते हैं। यह बीमारी अस्वच्छ उपकरणों से फैलती है।

प्रबंधन:

उपकरणों को अल्कोहल, हाइड्रोजन पेरॉक्साइड या ब्लीच के हल्के घोल से सैनिटाइज़ करें।

प्रभावित हिस्सों को काटकर नष्ट करें।

ब्लाइटॉक्स 50 @ 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

2. एन्थ्रेक्नोज (Colletotrichum species)

यह रोग फल और तने दोनों को प्रभावित करता है, जिससे काले, धंसे हुए घाव बन जाते हैं और फल सड़ जाते हैं।

प्रबंधन:

संक्रमित भाग हटाएँ और नष्ट करें।

फूल और फल बनने की अवस्था में फफूंदनाशकों का छिड़काव करें।

3. बैक्टीरियल सॉफ्ट रॉट (Erwinia species)

इस रोग से फल और तने गूदेदार और बदबूदार हो जाते हैं। इससे उत्पादन पर गंभीर असर पड़ता है।

प्रबंधन:

पौधों के बीच उचित दूरी बनाए रखें।

अत्यधिक सिंचाई से बचें।

तांबा आधारित जीवाणुनाशक का प्रयोग करें।

4. फ्यूसेरियम विल्ट (Fusarium Oxysporum)

यह रोग पौधे की संवहनी प्रणाली को प्रभावित करता है, जिससे तना पीला पड़ जाता है और पौधा मुरझाकर मर जाता है।

प्रबंधन:

रोगमुक्त रोपण सामग्री का उपयोग करें।

कार्बेन्डाजिम @ 2 ग्राम/लीटर पानी से मिट्टी को उपचारित करें।

फसल चक्र अपनाएँ और जल निकासी दुरुस्त रखें।

5. पाउडरी मिलड्यू (Oidium species)

यह रोग तनों और पत्तियों पर सफेद पाउडर जैसा फफूंद बना देता है, जिससे पौधे का विकास रुक जाता है।

प्रबंधन:

पौधों के बीच उचित दूरी रखें और वेंटिलेशन बेहतर करें।

सल्फर या नीम तेल युक्त कवकनाशकों का प्रयोग करें।

6. जड़ सड़न (Root Rot)

यह रोग पौधे की जड़ों को सड़ा देता है, जिससे पौधा पीला पड़कर मुरझा जाता है और मर जाता है।

प्रबंधन:

जलभराव से बचें।

अच्छी जल निकासी वाली ऊँची क्यारियों में पौध रोपें।

एकीकृत रोग प्रबंधन (Integrated Disease Management)

स्वच्छता और उपकरणों की देखभाल

औजारों को हर उपयोग के बाद साफ करें।

संक्रमित पौध भागों को तुरंत खेत से हटा दें।

रोपण सामग्री का चयन

सिर्फ प्रमाणित स्रोतों से ही पौधे लें।

नए पौधों को संगरोधित (Quarantine) करके लगाएँ।

उचित जल प्रबंधन

ज़रूरत से अधिक पानी न दें।

मिट्टी में जल निकासी बनी रहे इसका ध्यान रखें।

फसल चक्र और जैविक नियंत्रण

लगातार एक ही स्थान पर ड्रैगन फ्रूट न लगाएँ।

लाभकारी सूक्ष्मजीवों और जैविक कवकनाशियों का प्रयोग करें।

कीट नियंत्रक जैविक एजेंट्स का प्रयोग रोग फैलाने वाले कीटों से बचाव करता है।

रासायनिक नियंत्रण

फूल आने और फल बनने की अवस्था में कवकनाशी व जीवाणुनाशी का छिड़काव करें।

अलग-अलग रासायनिक वर्गों के बीच रोटेशन करें ताकि प्रतिरोध विकसित न हो।

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