PASHU

दुधारू मवेशियों में बांझपन की बढ़ती समस्या न केवल किसानों और पशुपालकों के लिए चिंता का विषय बन चुकी है, बल्कि पूरे डेयरी उद्योग को भी नुकसान पहुंचा रही है। अनुमान के मुताबिक भारत में लगभग 30% मवेशी प्रजनन संबंधी बीमारियों और बांझपन से पीड़ित हैं।

बिहार में बढ़ता खतरा: सरकारी चेतावनी

बिहार में लगभग 20 लाख मवेशी बांझपन के खतरे में हैं। राज्य में औक्सीटोसिन इंजेक्शन के दुरुपयोग को इसके पीछे की मुख्य वजह माना जा रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्य को चेताया है कि इस इंजेक्शन के कारण मवेशियों की प्रजनन क्षमता घटकर 2-3 बच्चे रह गई है, जबकि सामान्यतः एक गाय या भैंस 8 से 10 बच्चे पैदा कर सकती है।

औक्सीटोसिन इंजेक्शन: तात्कालिक फायदा, दीर्घकालिक नुकसान

औक्सीटोसिन हार्मोन है जो दूध निकालने में सहायक होता है

डेयरी संचालक दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए इसका अवैध उपयोग कर रहे हैं

इससे मवेशी की प्रजनन क्षमता खत्म हो जाती है

कानून के अनुसार बिना डॉक्टर की पर्ची के यह इंजेक्शन बेचना दंडनीय अपराध है

अन्य कारण जो मवेशियों को बना रहे बांझ

  1. कुपोषण और हरे चारे की कमी
  2. हार्मोन असंतुलन और अंडाणु संबंधी विकार
  3. संक्रमण और पेट में कीड़े
  4. जन्मजात विकृतियां
  5. यौन उत्तेजना की पहचान में गलती

पशुपालकों के लिए विशेष सावधानियां

गायें यौन उत्तेजना के दौरान रंभाती हैं, बेचैन रहती हैं

भैंसें आमतौर पर चुप रहती हैं, इसलिए उनका ध्यानपूर्वक निरीक्षण ज़रूरी है

यौन उत्तेजना आने पर 18–24 घंटे के भीतर ब्रीडिंग कराएं

यदि पशु में उत्तेजना नहीं दिखाई दे रही हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

बांझपन से बचाव के उपाय

औक्सीटोसिन इंजेक्शन का प्रयोग न करें

हरे चारे की भरपूर व्यवस्था करें

हर 6 महीने पर पेट के कीड़ों की जांच और दवा दें

पशु का वजन 230–250 किलोग्राम रखें, जिससे बेहतर गर्भधारण संभव हो

वेटनरी डॉक्टर से नियमित सलाह लें

हार्मोन और प्रजनन चक्र की जांच कराएं, कोई भी लक्षण नज़रअंदाज़ न करें

Tumblr

Read More


Discover more from अपना रण

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Discover more from अपना रण

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading