जीरा एक महत्वपूर्ण मसाले वाली फसल है, लेकिन इसमें झुलसा रोग एक बड़ी समस्या बनकर सामने आता है, जो उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को प्रभावित करता है। यह रोग खासतौर पर उस समय सक्रिय होता है जब फसल में फूल आना शुरू होते हैं और मौसम में नमी यानी बादल छाए रहते हैं। यदि यह स्थिति फूल से पकने तक बनी रहती है, तो झुलसा रोग तेजी से फैल सकता है और पूरे खेत को प्रभावित कर सकता है।

झुलसा रोग के मुख्य लक्षण

पत्तियों और तनों पर भूरे या काले धब्बों का उभरना

रोगग्रस्त हिस्सों का धीरे-धीरे सूखना

फूलों और फलों का असमय झड़ना

इन लक्षणों को समय रहते पहचानना बहुत जरूरी है, क्योंकि शुरुआती स्तर पर ही इलाज संभव है।

रोग का प्रभाव फसल पर

झुलसा रोग के कारण पौधों की बढ़वार रुक जाती है, जिससे फूल और फल नहीं बन पाते या समय से पहले झड़ जाते हैं। इससे न केवल उपज में भारी कमी आती है, बल्कि उत्पाद की गुणवत्ता भी गिर जाती है, जिससे बाजार में कम कीमत मिलती है और किसान को घाटा होता है।

झुलसा रोग से बचाव और नियंत्रण के उपाय

इस रोग से प्रभावी बचाव के लिए किसानों को निम्नलिखित उपाय करने चाहिए:

रोग के शुरुआती लक्षण दिखते ही रोजतम (Rogor-based fungicide) का छिड़काव करें।

240 से 300 मिली रोजतम प्रति एकड़ पानी में मिलाकर उपयोग करें।

छिड़काव के लिए सुबह या शाम का समय उपयुक्त होता है, ताकि दवा का असर अधिक हो और धूप में उड़ न जाए।

आवश्यकता अनुसार 7-10 दिनों के अंतराल पर दोबारा छिड़काव किया जा सकता है।

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