भारत कृषि प्रधान देश है, लेकिन किसानों के सामने एक बड़ी चुनौती यह है कि वे अपनी फसलों को कीड़ेमकोड़ों से कैसे बचाएं। बाजार में मिलने वाले रासायनिक कीटनाशक महंगे होने के साथ-साथ स्वास्थ्य और मिट्टी के लिए भी हानिकारक होते हैं। ऐसे में नीम का इस्तेमाल एक परंपरागत और जैविक समाधान है, जो सस्ता, सुरक्षित और असरदार है।
अनाज के भंडारण में नीम का उपयोग
1. सूखी नीम की पत्तियों को अनाज में मिलाएं, इससे घुन और कीड़ें नहीं लगते।
2. भंडारण स्थान पर नीम की 3-4 इंच की परत बिछाएं, फिर 2 फुट तक अनाज भरें और ऊपर फिर से नीम की परत लगाएं।
3. जूट की बोरियों में भंडारण से पहले उन्हें नीम की पत्तियों वाले उबाले गए पानी में रातभर भिगोकर, छांव में सुखाएं और फिर अनाज भरें।
दालों के भंडारण में नीम का तेल
1 किग्रा दाल में 1 ग्राम नीम का तेल मिलाएं। खाने से पहले दाल को धोना जरूरी है।
बीज के तौर पर दाल का उपयोग हो, तो 1 किग्रा बीज में 2 ग्राम नीम तेल मिलाएं। इससे बीज सुरक्षित रहते हैं।
नीम की निबौली से कीटनाशक तैयार करने की विधि
1. पकी निबौलियों को 12-18 घंटे पानी में भिगोएं।
2. लकड़ी से चलाकर गूदा और बीज अलग करें।
3. गूदे को छांव में सुखाकर पीसें और पाउडर बनाएं।
4. इस पाउडर को पतले सूती कपड़े में पोटली बनाकर पानी में रातभर भिगोएं।
5. सुबह पोटली निचोड़ें, रस में 1% साबुन मिलाएं और तैयार घोल का खेत में छिड़काव करें।
1 हेक्टेयर के लिए घोल तैयार करने की मात्रा
निबौली: 25 किग्रा
पानी: 500 लीटर
साबुन: 5 किग्रा
नीम आधारित कीटनाशक के लाभ
सस्ता: नीम हर जगह उपलब्ध है, खर्च न के बराबर
सुरक्षित: मिट्टी और स्वास्थ्य पर कोई दुष्प्रभाव नहीं
प्रभावी: कीड़े, फफूंद और घुन से बचाव
जैविक: जैविक खेती को बढ़ावा देने में सहायक
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