कहीं आपकी प्याज की फसल में तो नहीं लग रहा है पर्पल ब्लॉच रोग? जानिए लक्षण और बचाव के उपाय
प्याज की खेती से किसानों को अच्छा मुनाफा होता है, लेकिन इसमें कई रोग भी फसल की गुणवत्ता और उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं। इन्हीं में से एक गंभीर रोग है – पर्पल ब्लॉच (Purple Blotch), जो Alternaria porri नामक फफूंद के कारण होता है। यदि समय रहते इसकी पहचान और नियंत्रण न किया जाए, तो यह पूरी फसल को बर्बाद कर सकता है।
पर्पल ब्लॉच रोग के लक्षण क्या हैं?
पत्तियों पर धब्बे: शुरुआत में छोटे हल्के पीले पानीदार धब्बे दिखते हैं जो धीरे-धीरे भूरे या बैंगनी रंग के हो जाते हैं। इन धब्बों के चारों ओर पीला घेरा दिखाई देता है।
पत्तियों का झुलसना: रोग बढ़ने पर पत्तियाँ सूख जाती हैं और झुलसने लगती हैं।
बल्ब का विकास रुकना: पत्तियाँ समय से पहले सूखने लगती हैं जिससे प्याज का बल्ब पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता, और उत्पादन घटता है।
कैसे फैलता है यह रोग?
यह रोग मुख्य रूप से हवा, संक्रमित पौध अवशेष, उच्च आर्द्रता और अत्यधिक सिंचाई की वजह से फैलता है।
तापमान: 18–25°C
आर्द्रता: 80–90%
वर्षा या भारी सिंचाई से रोग का प्रसार तेज़ होता है।
पर्पल ब्लॉच से बचाव के उपाय
- कृषि वैज्ञानिक प्रबंधन
फसल चक्र अपनाएँ: प्याज को अन्य फसलों के साथ बारी-बारी से लगाएँ।
खेत की साफ-सफाई: पुराने पौधों के अवशेष हटा दें।
जल निकासी व्यवस्था: खेत में पानी जमा न होने दें।
संतुलित उर्वरक उपयोग: नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश का संतुलित प्रयोग करें; अधिक नाइट्रोजन से रोग का खतरा बढ़ता है।
- रोग-प्रतिरोधी किस्में
Agrifound Dark Red
Arka Kalyan
इन किस्मों में रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है और ये संक्रमण से बेहतर तरीके से लड़ती हैं।
- जैविक नियंत्रण उपाय
ट्राइकोडर्मा spp.: जैव-एजेंट जो रोगजनकों पर नियंत्रण करता है।
नीम तेल (निमोल): 5% नीम तेल का छिड़काव करें।
काउ डंग स्लरी: जैविक खाद से पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार होता है।
- रासायनिक फफूंदनाशी का प्रयोग
Mancozeb 75 WP – 2.5 ग्राम/लीटर पानी
Propiconazole 25 EC – 1 मि.ली./लीटर
Chlorothalonil – 2 ग्राम/लीटर
नोट: छिड़काव 10-15 दिन के अंतराल पर दो बार करें।
- सिंचाई प्रबंधन
ड्रिप सिंचाई करें: सुबह के समय करें ताकि पत्तियाँ सूखी रहें।
स्प्रिंकलर से बचें: पत्तियों पर नमी बढ़ने से संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है।
रोग रोकथाम के लिए अतिरिक्त सुझाव
खेत की नियमित निगरानी करें और शुरुआती लक्षणों पर तुरंत नियंत्रण उपाय करें।
बीज उपचार करें: बुवाई से पहले बीज को थायरम या कैप्टन (2-3 ग्राम/किलो बीज) से उपचारित करें।
खरपतवार नियंत्रण और कीट प्रबंधन से भी रोग के प्रसार को रोका जा सकता है।
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