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भारत के कई किसानों के पास ऐसी ज़मीन होती है, जो ऊसर, कंकरीली या पथरीली होती है। ऐसी ज़मीन पर पारंपरिक फसलों से बेहतर उत्पादन मिलना मुश्किल होता है। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने ऐसी फलदार फसलें विकसित की हैं, जिन्हें इन मुश्किल परिस्थितियों में भी उगाया जा सकता है। ऐसी ही एक फसल है — बेल (Aegle marmelos) और इसकी विशेष किस्म ‘गोमा यशी’, जिसे बंजर भूमि पर भी सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है।

‘गोमा यशी’ किस्म की विशेषताएँ

  1. मिट्टी की अनुकूलता

गोमा यशी किस्म को किसी भी प्रकार की मिट्टी में लगाया जा सकता है। यह ऊसर, कंकरीली, बलुई दोमट, और कम उपजाऊ ज़मीन में भी बेहतरीन ढंग से विकसित होती है, बशर्ते पानी निकासी की व्यवस्था हो।

  1. कांटे रहित और कागजी खोल

यह किस्म कांटे रहित होती है, जिससे फलों की तुड़ाई और रखरखाव आसान हो जाता है। इसके फलों का खोल कागज जैसा पतला होता है, जो उपभोक्ताओं के लिए आकर्षक होता है।

  1. कम ऊँचाई वाले पेड़

गोमा यशी के पेड़ छोटे कद के होते हैं, जिससे एक हेक्टेयर क्षेत्र में अधिक संख्या में पौधे लगाए जा सकते हैं। इससे उत्पादकता बढ़ती है और प्रबंधन सरल होता है।

  1. औषधीय गुणों से भरपूर

इस किस्म के फल, पत्ती, फूल, छाल और तना — सभी में औषधीय गुण पाए जाते हैं। आयुर्वेद में बेल का उपयोग पाचन, मधुमेह और कई अन्य रोगों में लाभदायक माना गया है।

कहां-कहां हो रही है खेती?

गोमा यशी किस्म की शुरुआत गुजरात के गोधरा स्थित केन्द्रीय बागवानी परीक्षण केन्द्र से हुई थी। अब यह किस्म देश के विभिन्न राज्यों जैसे — राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु तक पहुँच चुकी है।

उत्पादन और आय: कब और कितना मिलेगा लाभ?

गोमा यशी किस्म में दूसरे साल से फल लगना शुरू हो जाता है।

लेकिन वाणिज्यिक उपज 5वें वर्ष के बाद मिलने लगती है, विशेषकर वर्षा आधारित अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में।

9वें और 10वें वर्ष में छंटाई करके उत्पादन को और बेहतर किया जा सकता है।

एक अनुमान के अनुसार, 5वें से 6ठें वर्ष में प्रति हेक्टेयर 75,000 से 1 लाख रुपए तक की आमदनी हो सकती है।

बाजार में बेल के फल 15-20 रुपए प्रति पीस के हिसाब से बिकते हैं।

किसानों के लिए क्यों फायदेमंद है गोमा यशी?

कम लागत और कम पानी की ज़रूरत।

बंजर ज़मीन का उपयोग संभव।

दीर्घकालीन मुनाफ़ा।

घरेलू और औद्योगिक दोनों तरह के बाज़ार में मांग।

आयुर्वेदिक औषधियों और खाद्य उत्पादों के लिए कच्चा माल उपलब्ध।

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