folded newspapers and a cup of coffee

समाचार संरचना की बात करें तो सबसे पहले शीर्षक लिखा जाता है, फिर तिथि। इसके बाद सूत्र संकेत, क्रेडिट लाइन , आमुख/इंट्रो, जिसमें क्या हुआ का उत्तर स्पष्ट रूप से दिया जा सकता है। जो कुछ बचा उसे अंत में रखा जाता है और अंत मे समाचार को पूरा करने के लिए जो कुछ आवश्यक है उसे रखा जा सकता है, जैसे चित्र या साक्षात्कार।

Key points:- 1) शीर्षक 2) इंट्रो/आमुख 3) तिथि 4) शेष समाचार 5) क्रेडिट लाइन 6) चित्र साक्षात्कार

शीर्षक:- किसी भी समाचार का प्राण तत्व उसका शीर्षक होता है। शीर्षक, समाचार का सार घटना का परिणाम तथा स्थिति का संकेत करता है। शीर्षक की पहली और अनिवार्य विशेषता यह है कि शीर्षक ऐसा होना चाहिए कि, जिसे पढ़ने या सुनने पर सम्पूर्ण समाचार के प्रति पाठक, श्रोता या दर्शक के मन में जिज्ञासा उत्पन्न हो सके, क्योंकि शीर्षक ही पाठकों को समाचार पढ़ने के लिए आकर्षित करते हैं। शीर्षक शुद्ध या वाक्यांश के रूप में होना चाहिए। शीर्षक अगर मुहावरा हो तब उसे समझने और जानने की उत्सुकता और बढ़ाई जा सकती है।

तिथि, पंक्ति व स्थान:- शीर्षक के बाद सबसे पहले बायीं ओर तथ्य, घटना आदि के प्राप्ति स्थल तथा तिथि का उल्लेख किया जाता है। तिथि के उल्लेख में शुद्धता बनी रहनी चाहिए। समाचार वर्णित घटनाओं के साथ, तिथियों को भी इतिहास लेखन में प्रामाणिक सामग्री के साथ प्रदान करना चाहिए।

क्रेडिट लाइन:- स्थान या तिथि संकेत के बाद समाचार-सूत्र का उल्लेख किया जाना आवश्यक है। इससे यह पता चलता है कि समाचार किसने भेजा है। यदि समाचार पत्र के सूचना को रहस्य रखना है तो संवाददाता को पहले ही संकेत दे दिया जाना चाहिए और निर्णय ले लिया जाना चाहिए अथवा आपत्ति न होने पर किसी एजेंसी या देने वाले का नाम लिखा जा सकता है।

आमुख:- समाचार में वर्णित घटना या तथ्यों का महत्वपूर्ण सार आमुख या इंट्रो कहलाता है। एक तरह से इसे हम उस समाचार की प्रस्तावना भी कह सकते हैं। समाचार में पहले अनुच्छेद को इंट्रो कहा जाता है। अंग्रेज़ी में इसे लीड कहते हैं। इसे समाचार का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। समाचार तथ्यों के अनुसार जो सबसे अधिक महत्वपूर्ण बिंदु होते हैं, उन्हें आमुख में समाहित कर लिया जाता है।

शेष समाचार रचना:- आमुख के बाद के समाचार को शेष समाचार कहा जाता है। जिसे अंग्रेज़ी में Body Of Story भी कहा जाता है। आमुख पढ़ते समय मन में जिज्ञासा जागती है, जिसको शेष समाचार लेखन में विस्तार से बताया जाता है और जिसका विस्तार समाचार विषय के अनुसार किया जाता है। आकार चाहे छोटा हो या बड़ा किंतु उसमें सरलता एवं परिपूर्णता का होना अनिवार्य है जिसका लेखन विषयानुरूप होता है। छोटे-छोटे अनुच्छेद संक्षिप्त एवं सरल वाक्य रचना में हो। यह लेखन इस प्रकार का हो कि नए तथ्यों का समावेश और उतार चढ़ाव के मेलजोल से समाचार को अंत तक पढ़कर ही पाठक की जिज्ञासा को शांति मिल सके।

चित्र/साक्षात्कार:- समाचार पत्र में विषय से संबंधित चित्र या साक्षात्कार का प्रकाशन किया जाना चाहिए। चित्र से सम्बंधित किसी विद्वान ने कहा है कि चित्र मस्तिष्क पर सीधा प्रभाव डालता है, तो वहीं साक्षात्कार प्रकाशन से, समाचार में सत्यता और विश्वसनीयता में वृद्धि होती है।

समाचारों का संपादन करते समय हमेशा 6 ककारों का ध्यान रखना चाहिए:-

  1. क्या(What)
  2. कब(When)
  3. कहाँ(Where)
  4. क्यों(Why)
  5. कौन(Who)
  6. कैसे(How)

समाचारों को दो शैली में लिखा जाता है:-

  1. विलोम संरचना शैली:- उल्टा पिरामिड
  2. स्टूपि संरचना शैली:- सीधा पिरामिड

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