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गेहूं की फसल की कटाई का समय आ चुका है और इसके साथ ही जिला प्रशासन ने पराली जलाने की समस्या को देखते हुए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी किसान ने बिना स्ट्रॉ रीपर मशीन के कटाई करवाई, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, ऐसे किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिलेगा।

स्ट्रॉ रीपर मशीन: लाभदायक और पर्यावरण के लिए जरूरी

स्ट्रॉ रीपर एक ऐसी आधुनिक मशीन है जो गेहूं की कटाई के बाद बचने वाले डंठलों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट देती है। इससे मिलने वाला भूसा पशुओं के चारे के रूप में उपयोग किया जा सकता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि पराली जलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण की शुद्धता दोनों सुरक्षित रहते हैं।

पराली जलाना: नुकसान ही नुकसान

🔹विशेषज्ञों के अनुसार, पराली जलाने से मिट्टी में पाए जाने वाले जैविक तत्व नष्ट हो जाते हैं।

🔹फायदेमंद जीवाणु मर जाते हैं, जिससे उर्वरा शक्ति घटती है।

🔹बड़े स्तर पर वायु प्रदूषण फैलता है।

इसी के साथ मनुष्य और पशुओं के स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। और, इन्हीं खतरों को देखते हुए प्रशासन ने इस बार Zero Tolerance Policy अपनाने का निर्णय लिया है।

कृषि विभाग चलाएगा जागरूकता अभियान

कृषि विभाग किसानों को इस नीति के प्रति जागरूक करने के लिए गांव-गांव अभियान चलाने की तैयारी में है। विभागीय अधिकारी और कृषि विशेषज्ञ किसानों को बताएंगे कि स्ट्रॉ रीपर का उपयोग कैसे पर्यावरण की रक्षा करता है, भूसा भी देता है और पशुपालन में सहायक बनता है।

हार्वेस्टर संचालकों को भी निर्देश

प्रशासन ने हार्वेस्टर मशीन चलाने वालों को सख्त निर्देश दिए हैं कि स्ट्रॉ रीपर के बिना गेहूं की कटाई न करें। यदि कोई ऑपरेटर ऐसा करता पाया गया, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

आदेश उल्लंघन पर क्या होगी सजा?

प्रशासन ने चेतावनी दी है कि:

🔹आदेश न मानने वालों पर CRPC की धारा 133 के तहत केस दर्ज किया जाएगा।

🔹ऐसे किसानों का पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा।

🔹उन्हें किसी भी प्रकार की सरकारी कृषि योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

किसानों को मिलेगी मशीन पर सब्सिडी

कई किसानों ने चिंता जताई है कि स्ट्रॉ रीपर मशीन सभी के लिए खरीद पाना संभव नहीं है। इस पर प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि सरकार द्वारा सब्सिडी के माध्यम से यह मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे छोटे और मध्यम वर्ग के किसान भी इसका लाभ उठा सकें।

पर्यावरण संरक्षण और सतत कृषि की दिशा में ठोस कदम

प्रशासन का यह कदम सतत कृषि, स्वच्छ पर्यावरण और किसानों की दीर्घकालिक लाभप्रदता को सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम प्रयास है। किसानों को भी चाहिए कि वे जागरूकता दिखाएं और सरकार द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करें। यही उनके लिए, पर्यावरण के लिए और आने वाली पीढ़ियों के लिए लाभकारी साबित होगा।

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