केंद्र सरकार ने किसानों को राहत देते हुए तुअर (अरहर), उड़द और मसूर की दालों की 100% खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर करने का फैसला किया है। इस निर्णय की घोषणा केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की। यह योजना खरीफ 2024-25 सीजन से शुरू होकर आगामी चार वर्षों तक लागू रहेगी। इसका उद्देश्य किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाना और देश को दालों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।
13.22 लाख मीट्रिक टन तुअर की खरीद को मंजूरी
सरकार ने बताया कि आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में 13.22 लाख मीट्रिक टन तुअर की खरीद को मंजूरी दी गई है। 25 मार्च तक इनमें से 2.46 लाख मीट्रिक टन तुअर की खरीद पूरी की जा चुकी है, जिससे 1.71 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिला है।
कर्नाटक में बढ़ाई गई खरीद की समयसीमा
कर्नाटक में किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए खरीद की समयसीमा को 1 मई 2025 तक बढ़ा दिया गया है। फिलहाल राज्य में NAFED और NCCF जैसी एजेंसियों द्वारा MSP पर दालों की खरीद जारी है। उत्तर प्रदेश में तुअर की बाजार कीमत MSP से अधिक होने के कारण वहां फिलहाल सरकारी खरीद की आवश्यकता नहीं पड़ी है।
MSP पर खरीद के लिए पंजीकरण अनिवार्य
कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की है कि वे NAFED के ई-समृद्धि पोर्टल और NCCF के ई-संयुक्ति पोर्टल पर शीघ्र पंजीकरण करें। MSP पर फसल की बिक्री तभी संभव होगी जब किसान पोर्टल पर रजिस्टर्ड होंगे। साथ ही, उन्होंने राज्य सरकारों से खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी और सुचारू बनाने का आग्रह किया है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मजबूत कदम
केंद्र सरकार का लक्ष्य दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना है। इसी क्रम में PM-AASHA योजना के तहत चना, सरसों और मसूर की खरीद की भी व्यवस्था की गई है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात में सरसों की, जबकि तमिलनाडु में खोपरे की खरीद को मंजूरी दी गई है।
सरकार की प्राथमिकता: किसानों को उचित मूल्य
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह है कि किसानों की फसल MSP से नीचे न बिके। उन्होंने राज्य सरकारों से आग्रह किया कि वे खरीद प्रक्रिया में सहयोग करें और यह सुनिश्चित करें कि किसान अपने उत्पाद का पूरा मूल्य प्राप्त करें।
निष्कर्ष
दालों की 100% खरीद का यह निर्णय देश के कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी होगी, बल्कि भारत को दालों के आयात पर निर्भरता से मुक्ति भी मिलेगी। डिजिटल माध्यम से की जा रही पारदर्शी खरीद प्रक्रिया किसानों को नई आर्थिक मजबूती प्रदान करेगी।
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