छत्तीसगढ़ की ज्योति राजपूत ने साबित किया—सपने पूरे करने के लिए चाहिए सिर्फ हौसला और मेहनत।
छत्तीसगढ़ के मुंगेली विकासखंड के छोटे से गांव चारभाठा की रहने वाली ज्योति राजपूत आज हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं। एक समय था जब उन्होंने कर्ज लेकर मुर्गी पालन का काम शुरू किया था, लेकिन आज वे हर महीने लगभग डेढ़ लाख रुपये की कमाई कर रही हैं। उनकी यह सफलता न सिर्फ ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की राह दिखा रही है, बल्कि यह भी साबित करती है कि अगर लगन हो, तो छोटे स्तर पर शुरू किया गया व्यवसाय भी बड़ा मुकाम दिला सकता है।
कर्ज से की थी शुरुआत, मेहनत ने दिलाया मुकाम
ज्योति राजपूत ने अपने व्यवसाय की शुरुआत बिहान समूह से जुड़कर की। उन्होंने सबसे पहले वहां से ऋण लेकर मुर्गी पालन का काम शुरू किया। शुरुआती दौर में उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। पहली कमाई के बाद उन्होंने बैंक से दूसरा लोन लेकर 300 मुर्गियों के साथ एक बड़ा शेड तैयार किया।
धीरे-धीरे उनका व्यवसाय बढ़ता गया। बढ़ती आमदनी ने उनका हौसला भी बढ़ाया, और उन्होंने अपने काम को और आगे बढ़ाया।
8000 मुर्गियों और बत्तख पालन से होती है मोटी कमाई
वर्तमान में ज्योति के पास लगभग 8000 मुर्गियां हैं। इसके अलावा उन्होंने देसी मुर्गियों और बत्तख पालन का काम भी शुरू कर रखा है। वे हर महीने करीब 20,000 मुर्गियां बाजार में बेचती हैं, जिससे उन्हें अच्छी खासी आमदनी होती है। यह आय उन्हें एक पक्का मकान बनाने और बच्चों को प्राइवेट स्कूल में शिक्षा दिलाने में मदद कर रही है।
चिराग योजना से मछली पालन की ओर कदम
ज्योति ने अपनी कमाई को एक ही क्षेत्र तक सीमित नहीं रखा। कृषि विभाग की चिराग योजना के तहत उन्होंने मछली पालन के लिए तालाब बनवाना भी शुरू कर दिया है। इसका उद्देश्य है अपनी आय के स्रोत को और अधिक मजबूत बनाना।
‘लखपति दीदी’ योजना से बनी रोजगार देने वाली महिला
ज्योति राजपूत को ‘लखपति दीदी’ योजना के तहत ना केवल आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला, बल्कि वे अब अन्य महिलाओं को भी रोजगार देने में सक्षम हैं। उन्होंने दिखाया है कि ग्रामीण परिवेश में भी महिलाओं के लिए रोजगार और सम्मानजनक जीवन संभव है।
महिलाओं के लिए बनी रोल मॉडल
ज्योति आज हजारों महिलाओं के लिए रोल मॉडल बन चुकी हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि कोई भी काम छोटा नहीं होता, बस उसे सही दिशा और ईमानदारी से करना जरूरी है। उनकी सफलता की कहानी यह बताती है कि यदि महिलाएं ठान लें, तो वे आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बन सकती हैं।
निष्कर्ष:
ज्योति राजपूत की यह यात्रा न सिर्फ प्रेरणादायक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि गांव की महिलाएं भी अब उद्यमिता की राह पर आगे बढ़ रही हैं। मुर्गी पालन जैसे व्यवसाय में उनकी सफलता एक उदाहरण है कि सरकारी योजनाओं, आत्मविश्वास और मेहनत से ग्रामीण महिलाएं भी ‘लखपति दीदी’ बन सकती हैं।
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