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दुनिया की सबसे खास चारे वाली फसलों में से एक है नेपियर घास, जिसे आमतौर पर हाथी घास (Elephant Grass) भी कहा जाता है। यह घास दुधारू पशुओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। तेज़ी से बढ़ने वाली यह बहुवर्षीय (Perennial) घास न केवल पशुओं के दूध उत्पादन को बढ़ाने में मदद करती है, बल्कि उनके पाचन स्वास्थ्य संपूर्ण पोषण को भी बेहतर बनाती है।

पोषण से भरपूर, पाचन में आसान

नेपियर घास में 18-22% तक सूखा पदार्थ और 8-12% कच्चा प्रोटीन (Crude Protein) पाया जाता है, जो इसे अन्य घासों से कहीं अधिक पौष्टिक बनाता है। इसमें मौजूद फाइबर, मिनरल्स और विटामिन्स पशुओं के संपूर्ण स्वास्थ्य को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसकी कोमल पत्तियां और तने आसानी से पच जाते हैं और यह rumen microbes को भी सपोर्ट करती है, जिससे पशु का पाचन तंत्र मजबूत होता है।

दूध की गुणवत्ता और मात्रा में इजाफा

इस घास को खाने से दुधारू पशुओं के milk yield में स्पष्ट वृद्धि देखी जाती है। इसमें मौजूद उच्च ऊर्जा और प्रोटीन दूध की मात्रा ही नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता को भी बेहतर बनाते हैं। यही कारण है कि कई डेयरी फार्मर्स अब पारंपरिक चारे की जगह नेपियर घास को प्राथमिकता दे रहे हैं।

उत्पादन में जबरदस्त बढ़त

नेपियर घास एक बार बोने के बाद 4-5 वर्षों तक लगातार उत्पादन देती है। इसकी 10-12 कटाई सालाना संभव है, जिससे किसान हर सीजन में ताजे चारे का लाभ उठा सकते हैं। यह अन्य पारंपरिक घासों की तुलना में 3 से 4 गुना ज्यादा उत्पादन देती है।

विविध उपयोग और टिकाऊ समाधान

यह घास केवल ताजे चारे के रूप में नहीं, बल्कि सुखाकर, साइलेज (Silage) या जैविक खाद के लिए भी उपयोगी होती है। गोबर के साथ मिलाकर इसका उपयोग उर्वरक के रूप में भी किया जा सकता है, जिससे खेती में भी लाभ मिलता है।

कम पानी, कम खर्च, ज्यादा मुनाफा

नेपियर घास की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह कम सिंचाई और उर्वरक में भी अच्छा उत्पादन देती है। हल्की सूखा स्थिति में भी यह घास sustain कर जाती है और कीटों व रोगों के प्रति अधिक resistant होती है, जिससे किसानों की देखभाल की चिंता कम हो जाती है।

पर्यावरण और मिट्टी के लिए फायदेमंद

इसकी गहरी और सघन जड़ें soil erosion को रोकने में मदद करती हैं। साथ ही यह वातावरण से कार्बन अवशोषित करके पर्यावरण के लिए भी लाभकारी साबित होती है।

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