आंतरिक जनसम्पर्क

आन्तरिक जनसम्पर्क वे हैं जो कंपनी और उसके कर्मचारियों के बीच संबंधों को मजबूत बनाने, एक अच्छे संचार वातावरण को सुविधाजनक बनाने और किए गए प्रत्येक प्रतिविधियों में मूल्यों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

इसका उद्देश्य एक व्यवसाय कार्य दल बनाना है जहां कंपनी के सभी , कर्मी निदेशक से लेकर निम्न श्रेणी के कर्मचारी एक समेकित समूह के रूप में अनुरूप हो। एक कंपनी में प्राथमिकता इसके कार्य कर्ता हैं।

आंतरिक जनसम्पर्क स्थापित करने का मुख्य कार्य

  • एक प्रभावी और विशाल संचार नेटवर्क की संरचना करना जिसमे आज इंटरनेट एक अच्छा विकल्प है, क्योकि यह सरल और तेज पहुँच का आंतरिक नेटवर्क बनाता है। दूर के शाखाओं के लोगों से संपर्क करने की आवश्यकता होने पर वीडियो कॉन्फ्रेंस का उपयोग करना भी उचित है।
  • चर्चा समूह को व्यवस्थित चलाने के लिए, जहाँ कंपनी के संचालन या समूह की जरूरतों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए स्वेच्छा से मिला जा सके। इसमें संबंधित विभाग का प्रस्ताव उठाना और उसके समाधान की निगरानी करना भी शामिल है।
  • विभागों को एकीकरण के साथ मनोरंजन गतिविधियो की योजना बनाने के लिए जैसे जन्मदिन और खेल का आयोजन आदि। राय या सुझाव के लिए एक मेलबॉक्स की स्थापना, जिसे सूचना प्राप्त करने के लिए समय-समय पर समीक्षा के लिए भेजा जाता रहे, इसकी पुष्टि करना और संबंधित विभाग को सूचित करना।

आंतरिक जनसम्पर्क के मूल सिद्धांत

  1. सुनना:- सभी संचार एक ध्वज उठाते हैं, सुनो। यह अपेक्षित सफलता के लिए जनसम्पर्क कार्यक्रमों को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण है।जनसम्पर्क का यह कार्य उन लोगों के लिए ही है जो लोग प्रतिदिन अपनी नौकरी के प्रभारी हैं इसलिए उन्हें सुनना जरूर्य है।
  2. शेयर:- आगामी योजनाओं, लांच और घटनाओं से सभी को अवगत कराना महत्वपूर्ण है, साथ-ही-साथ की गई गतिविधियों में प्राप्त की गई सफलताएं भी। कर्मचारियों को सीधे कंपनी से जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। आंतरिक जनसम्पर्क में यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी कर्मियों को इस बात की जानकारी हो कि कंपनी के भीतर क्या हो रहा है। ऐसे में कर्मचारी किसी भी तथ्य की गलत व्याख्या करने से बच पाएंगे।
  3. एकीकृत:- आंतरिक क्षेत्र में जनसम्पर्क द्वारा प्राप्त सफलता उन सभी के साथ एकीकरण से जुड़ी हुई है जो गतिविधियो से जुड़े हुए हैं। जब लोग एकीकृत होते हैं तो उन्हें लगता है कि वे पूरे भाग का हिस्सा हैं और अनुरोध किये जाने पर भाग लेने के लिए तैयार हैं।इसे प्राप्त करने कर लिए , विभिन्न गतिविधियों को शामिल किया जाना चाहिए, जो न केवल कंपनी की सफलता को पहचानते हैं बल्कि कर्मचारियों को भी।आन्तरिक जनसम्पर्क के काम का एक हिस्सा, कंपनी को एक संयुक्त मोर्चे के रूप में पेश करना है।
  4. सीखना:- सभी के अनुभवों से सीखना चाहिए। जिन लोगों ने सकारात्मक परिणाम दिए, उनका उपयोग समूह और कंपनी की ताकत को मजबूत करने के लिए किया जाना चाहिए। जो उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे , उन्हें भविष्य की शक्तियों में बदलने के लिए पुनः प्रयास करना चाहिए।
  5. सुसंगत रहें:-आंतरिक जनसम्पर्क में एक परियोजना समाप्त होती है तो दूसरी शुरू हो जाती है, यह चक्र की तरह है जो कभी समाप्त नहीं होता है।

बाहरी जनसम्पर्क

बाहरी क्षेत्र जनसंचार में कंपनी या संस्था से इसके अन्य समूहों से संपर्क बनाए रखने का कार्य किया जाता है। जिनमे ग्राहक/उपभोक्ता , विक्रेता , शेयरहोल्डर, मीडिया, सरकार, अन्य कंपनियां आदि शामिल होती हैं। यह किसी संस्था के लिए ‘ एक्सटर्नल पब्लिक’ कहलाते हैं।

इसका उद्देश्य कंपनी को बढ़ावा देना और उसकी आय में वृद्धि करना है। यही कारण है कि हम कंपनी और विभिन्न संस्थाओं के बीच एक प्रभावित संचार विकसित करना चाहते हैं , जिसके साथ साथ यह सम्बंधित है: ग्राहक, मीडिया , उद्योग, समुदाय, सरकार, वित्तीय संस्थाए और आम जनता।

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बाहरी जनसम्पर्क स्थापित करने के मुख्य कार्य

  • स्थानीय, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया पर अप-टू-डेट जानकारी के साथ एक डेटाबेस बनाएं।
  • प्रसार के लिए मीडिया को भेजी जाने वाली जानकारी लिखें: प्रेस, विज्ञप्ति, घटना आदि।
  • घटनाओं का एक फोटोग्राफिक और दृश्य-श्रव्य रिकॉर्ड रखें।
  • मास मीडिया के साथ किये गए विज्ञापन ,दिशानिर्देशों या समझौते के अनुपालन की निगरानी करना।
  • विज्ञापन उद्देश्य के लिए संस्थागत पत्रिकाओं को संपादित करें और उनका उत्पादन करें।
  • कंपनी के निर्देशित पर्यटन व्यवस्थित करें।

सरकारी जनसम्पर्क

सरकारी जनसम्पर्क पर जनसम्पर्क विशेषज्ञ ‘समर बसु’ का कहना है कि ” सरकारी जनसम्पर्क के जरिये किसी कार्य, मुद्दे, आंदोलन या विशेषकर किसी संस्था के लिए सूचना ,अनुनयन व समन्वय के जरिये संबंधित समुहो का समर्थन प्राप्त किया जाता है।”

सरकार व सरकारी संस्थाएं आम जनता व निश्चित समूहों के लिए अनेक कार्यक्रम चलाते हैं। यह कार्यक्रम चलाने से पहले वे संबंधित समूहों की आवश्यकताओं व अपेक्षाओं का पता लगाते हैं।कार्यक्रम संपादित होने के समय व प्रचार-प्रसार अभियानों के जरिए संबंधित समूहों को सकारात्मक रूप से सूचित करते हैं।

सरकारी जनसम्पर्क के मुख्य रूप से दो पहलू होते हैं।

प्रचार-प्रसार व छवि निर्माण के लिए जनमाध्यमों के साथ-साथ पारंपरिक लोकमध्यमो तक का सहारा लिया जाता है। इनके जरिए संबंधित समूहों तक उपयुक्त सूचनाएं पहुँचाई जाती हैं। प्रचार में निरंतरता व सकारात्मकता से सरकार या सरकारी संस्थाओं की सकारात्मक छवि बनती है।

सरकारी जनसम्पर्क का दूसरा प्रमुख आधार विकास है। सरकार के सभी कार्यक्रमों व योजनाएं विकासोन्मुखी होते हैं।इसी संदर्भ में सरकार संबंधित समूहों से अग्रपुस्ति या फीड फॉरवर्ड शोध के जरिए इनकी आशाओं व आकाक्षाओं का पता लगाती है। नियोजित कार्यक्रमों को इन आशाओं के अनुरूप बनाया व क्रियान्वयन किया जाता है।इसके उपरांत आपसी समझ व समन्वय बढ़ाने के लिए प्रचार प्रसार अभियान चलाया जाता है।

केंद्र सरकार हेतु, जंसमपार्क का कार्य सूचना और प्रसारण को मंत्रालय को देना है। इस मंत्रालय के अंतर्गत सभी संस्थाएं जनसम्पर्क संबंधित सभी पहलुओं को निष्पादित करती हैं। इनमें प्रमुख है आकाशवाणी , दूरदर्शन, क्षेत्र प्रसार निदेशालय, विज्ञापन व दृश्य प्रसार निदेशालय, प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो, फिल्म्स डिवीज़न, पब्लिकेशन डिवीज़न व रिसर्च एवम रिफ्रेश डिवीज़न। ये सभी संस्थाएं भारत सरकार हेतु जनसम्पर्क संबंधित विभिन्न कार्यों को संपादित करती है।

सरकारी क्षेत्र में कार्यरत सभी संस्थाओं का अपना जनसम्पर्क विभाग भी होता है। साथ ही भिन्न-भिन्न मंत्रालयों के पास भी अपना जनसम्पर्क विभाग होता है। ये सभी मंत्रालय व संस्थान अपने जंसमपार्क तथा सूचना प्रसारण मंत्रालय के जरिए प्रचार-प्रसार अभियान चलाते हैं।

राज्य सरकारों के पास भी जनसम्पर्क हेतु विशेष संस्थाए होती हैं। अलग-अलग राज्यों में इन संस्थाओं के नाम व व्यापकता में अंतर पाए जाते हैं। कुछ राज्यो में सूचना मंत्रालय हैं तो कुछ राज्य में सूचना और जंसमपार्क विभाग हैं। कुछ राज्यो में सूचना व जनसम्पर्क विभाग के साथ निर्देशालय भी है। चाहे वह मंत्रालय हो, विभाग या निर्देशालय हो, राज्य सरकार की जनसम्पर्क संस्थाओं से संबंधित विभिन्न कार्य संपादित करने हेतु विभाग या प्रभाग कार्यरत होते हैं।

सरकारी जंसमपार्क संस्थाए अपने दायित्व निभाने के साथ-साथ सरकार व जनसाधारण दोनों के सामने उत्तरदायी रहती हैं।

सरकारी जनसम्पर्क के प्रमुख लक्ष्य

  • सरकारी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन स्तर, उपलब्धियों आदि के संदर्भ में ही रहे विकास के बारे में संबंधित को सूचित करना।
  • सरकार व जनसाधारण के बीच मे आपसी विश्वास व भरोसा बनाये रखने हेतु निरंतर प्रयासरत है।
  • सरकार या संबंधित संस्था के नीति , नियम, कार्यक्रम आदि के संदर्भ में पारदर्शी रूप से निरंतर सूचना प्रवाह।
  • ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के बीच खाई को दूर करने का प्रयास।
  • सरकार द्वारा चलाई जाने वाली सामाजिक, आर्थिक व विकासमूलक गतिविधियों के संदर्भ में जनसाधा- रण का विश्वास व समर्थन हासिल करना।
  • गर्मीण क्षेत्र में सूचना-शिक्षा-संचार आदि को अभियानों के जरिए जागरूकता फैलाना।

इन लक्ष्यों को प्राप्त हेतु सरकारी क्षेत्र में कार्यरत जनसम्पर्क अधिकारी प्रमुख रूप से प्रचार-प्रसार का सहारा लेते हैं। इस संदर्भ में प्रेस विज्ञप्ति व पृष्ठिभूमि लेख तैयार करने के साथ-साथ नियमित रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस का भी आयोजन किया जाता है। साथ ही जनमध्यमो में सरकारी उपलब्धियां आदि के संदर्भ में आई खबरों व अन्य संपादकीय सामग्री का निरक्षण भी करते हैं।

भारत मे सरकारी जनसम्पर्क केवल प्रेस रिलेशन तक ही सीमित है। सरकारी क्षेत्रो में जनसम्पर्क को एक कार्य मात्रा ही माना जाता है। अनेक विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार व सरकारी संस्थाओं को, जनसम्पर्क को एक सकारात्मक मानसिकता के रूप में ग्रहण करने की आवश्यकता है।

निजी जनसम्पर्क

निजी क्षेत्र में किया जाने वाला जनसम्पर्क निजी जनसम्पर्क कहलाता है। निजी क्षेत्र में जनसम्पर्क को एक महत्वपूर्ण धूरी के रूप में माना जाता है। निजीकरण , उदारीकरण व वैश्वीकरण के आज के इस दौर में संबंधों में जटिलता एक आम बात है। साथ ही सामाजिक , राजनीतिक , आर्थिक व अन्य कई क्षेत्रों में बढ़ती जटिलता से यह स्थित और पेचीदा हो जाती है। ऐसे में संस्थाओं को अपने संबंधित समूहों से अच्छे संबंध बरकरार रखने हेतु जनसम्पर्क का अधिक-से-अधिक इस्तेमाल किया जाता है।

निजी जनसम्पर्क के मुख्य लक्ष्य

  1. संस्था के छवि को बनाये रखना।
  2. संस्था की वस्तु व सेवाओ की बिक्री में वृद्धि करना।
  3. कर्मचारियों के साथ सद्भाव बनाने का भरपूर प्रयास करना।
  4. संस्था के प्रति समाज मे हुए दुष्प्रचार को दूर करना।
  5. संस्था की नीति व दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना।
  6. संस्था की अन्य शाखाओं से संबंध स्थापित करना।
  7. संस्था के लिए प्रचार-प्रसार की सामग्री तैयार करना।

वैसे भी सरकारी जनसम्पर्क की तुलना में निजी क्षेत्र में जनसम्पर्क बहुआयामी व जटिल होता है। सरकारी जनसम्पर्क में प्रायः आम जनसाधारण या निश्चित समूहों से संबंध बनाने हेतु प्रयास किया जाता है। किंतु निजी क्षेत्र की संस्थाओं से कम-से-कम एक दर्जन अलग-अलग समूह या वर्ग जुड़े होते हैं। इन सभी समूहों या वर्गों की उस संस्था से अलग-अलग प्रकार की आवश्यकताएं व आशाएं जुड़ी होती है। इसी कारण निजी जनसम्पर्क इतना कठिन माना जाता है।

सरकारी जनसम्पर्क की तुलना में निजी क्षेत्र में जनसम्पर्क अधिक सुनियोजित या सुनिश्चित तरीके से किया जाता है। साथ ही निजी जनसम्पर्क के क्षेत्र में उपलब्ध सभी साधनों को बखूबी इस्तेमाल किया जाता है। निजी क्षेत्र में जनसम्पर्क एक कार्यमात्र नहीं है। यह एक मानसिकता है जहाँ जनसम्पर्क संबंधित कार्य जनसम्पर्क विभाग करता है। वहीं सुचारू जंसमपार्क हेतु आवश्यक माहौल बनाने में संस्था के सभी विभाग अपना भरपूर योगदान देते हैं।

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