SAWASTH

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) ने NIFTEM-Kundli के सहयोग से एक दिवसीय वर्कशॉप SWASTH (Stakeholders Workshop on Actionable Strategies for Tackling HFSS and UPF) का आयोजन किया। इस वर्कशॉप का मुख्य विषय था – “आधुनिक भोजन में विज्ञान, उपभोग और विकल्पों पर प्रकाश डालना।”

MoFPI सचिव डॉ. सुभ्रत गुप्ता का वक्तव्य

MoFPI सचिव डॉ. सुभ्रत गुप्ता ने अपने मुख्य भाषण में कहा कि आज के तेज़ रफ्तार जीवन में स्वास्थ्य और आहार पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि लोग आजकल स्मार्टवॉच से कदम गिनते हैं, लेकिन यह नज़रअंदाज़ कर देते हैं कि वे कितनी कैलोरी का सेवन कर रहे हैं। उन्होंने NIFTEM-K से एक ऐसी स्मार्ट डिवाइस विकसित करने का आह्वान किया जो व्यक्ति की दैनिक ऊर्जा खपत को ट्रैक कर सके

उन्होंने WHO और MCI के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि दुनिया में दो-तिहाई मौतें गैर-संचारी रोगों (NCDs) से होती हैं और खाद्य मिलावट व अपव्यय एक गंभीर चुनौती बन चुकी है।

NIFTEM-K का शैक्षणिक योगदान

NIFTEM-K निदेशक डॉ. हरिंदर सिंह ओबेरॉय ने जानकारी दी कि संस्थान जल्द ही NCERT की पाठ्यपुस्तकों में खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े अध्याय जोड़ने का प्रस्ताव देगा। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपराओं में “भोजन ही औषधि है” की धारणा को विज्ञान से जोड़कर आगे लाया जाएगा। FSSAI के सहयोग से शक्कर की मात्रा मापने की मानक विधियों को विकसित करने पर काम होगा।

आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान का संगम

डॉ. रवी नारायण आचार्य (CCRAS) ने बताया कि आयुर्वेद के अनुसार स्वस्थ रहने का उद्देश्य पहले है और उपचार बाद में। उन्होंने “हितम-अहितम, सुखम-दुखम” जैसे सिद्धांतों की व्याख्या की और FSSAI व अन्य मंत्रालयों के सहयोग से खाद्य गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में काम जारी है।

HFSS और UPF पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण

FSSAI के डॉ. सत्येन पांडा ने HFSS और UPF के खतरों को उजागर किया और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
ICMR की डॉ. प्रियंका बंसल ने पोषण संबंधी योजनाओं और एनीमिया से निपटने के प्रयासों की जानकारी दी।
Consumer VOICE के CEO श्री असीम सान्याल ने भारतीय संदर्भ में HFSS की परिभाषा तय करने और FoPNL (Front of Pack Nutrition Labeling) की शीघ्र शुरुआत की वकालत की।

अनुसंधान और शिक्षा की भूमिका

द्वितीय तकनीकी सत्र में NIFTEM-K की डॉ. कोमल चौहान ने बताया कि सभी प्रोसेस्ड फूड को खतरनाक मानना गलत है। डॉ. हीना यादव ने HFSS और UPF पर FAQs पेश किए और NOVA क्लासिफिकेशन की जानकारी दी।
डॉ. सीमा पुरी (DU) ने भारतीय वैज्ञानिक संस्थानों जैसे ICMR पर आधारित शोध को प्राथमिकता देने की बात कही।
Resolve to Save Lives की डॉ. स्वाति भारद्वाज ने खाद्य श्रेणियों के लिए मानकीकृत पोर्शन साइज़ की आवश्यकता बताई।

खाद्य उद्योग की भागीदारी और विचार

ITC, Marico, Nestlé India, Jadli Foods जैसी कंपनियों और FICCI, CII, IFBA जैसे संगठनों ने HFSS नीतियों पर वैज्ञानिक परीक्षण और व्यावसायिक दृष्टिकोण अपनाने की बात की। उन्होंने यह भी कहा कि पोषण नीतियों को भावनात्मक के बजाय वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित होना चाहिए। कुछ पौष्टिक उत्पाद जैसे नारियल दूध, ओट दूध, टोफू को UPF श्रेणी में शामिल किए जाने पर पुनर्विचार की मांग की गई।

निष्कर्ष: संतुलित जागरूकता की ओर कदम

वर्कशॉप का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि उपभोक्ताओं को HFSS और UPF के प्रति जागरूक रहना चाहिए, लेकिन भय या भ्रम में नहीं पड़ना चाहिए
मुख्य संदेश:
“सोच-समझकर खाएं, साधारण खाएं, विरुद्ध आहार से बचें – ताकि NCDs को रोका जा सके।”

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