SHUBHAM ROY

जामिया हूं मै, जामिया हूं मै

By SHUBHAM ROY बड़े-बड़े सपने बुनकर ,अपनी खुद की राह चुन कर,उम्मीदों के नावों में बैठे इन बच्चों का ,बीच भंवर फंसे इन सपनों का,खुद मांझी बन, पतवार थाम,बार-बार, हर बार इन्हें,कई बार बचाया हूं, जामिया हूं मैं, MORE…..क्या जामिया मीलिया इस्लामिया में होता है धर्म के नाम पर भेदभाव ? बाधा से भरे इन …

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भाजपा..दीपक की लौ से कमल के खुशबू तक का सफर

तारीख, बिल्कुल आज से दो दिन पहले वाला, यानि दिन था 6 अप्रैल का और वर्ष था 1980 का। जगह, नई दिल्ली का फिरोज शाह कोटला स्टेडियम। दिमाग में जरूर आया होगा आखिर तारीख क्यों, तो सुनिए तारीख इसलिए क्योंकि यह तारीख उस दिन के बाद कैलेंडर के अप्रैल महीने वाले पन्ने के साथ इतिहास के पन्नों पर भी दर्ज होने वाला था।

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