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बरसात का मौसम हरियाली और ताजगी लेकर आता है। लेकिन यही मौसम गमलों और बगीचे में लगे पौधों के लिए कई समस्याएँ भी खड़ी कर देता है। लगातार बारिश, नमी और कीटों का प्रकोप पौधों की जड़ों को कमजोर कर देता है। अगर समय रहते देखभाल न की जाए, तो पौधे सड़ सकते हैं, सूख सकते हैं या बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। इसलिए जरूरत है कि बरसात के मौसम में गमलों और पौधों की विशेष देखभाल की जाए।

बरसात में गमलों की समस्याएँ

बरसात के मौसम में गमलों से जुड़ी सबसे बड़ी समस्याएँ ये होती हैं –

  • पानी भर जाना: लगातार बारिश से गमलों में पानी भर जाता है और पौधों की जड़ें गलने लगती हैं।
  • फफूंद और बैक्टीरिया: ज्यादा नमी से मिट्टी में फंगस और बैक्टीरिया पनपते हैं।
  • कीड़े-मकोड़े: गमलों में मच्छर, चींटियाँ और दीमक जैसे कीड़े घर बना लेते हैं।
  • जड़ों का दम घुटना: लगातार गीली मिट्टी में ऑक्सीजन की कमी से जड़ें सड़ जाती हैं।
  • पत्तियों का पीला पड़ना: ज्यादा पानी और नमी के कारण पौधे ठीक से पोषण नहीं ले पाते, जिससे पत्तियाँ पीली पड़ जाती हैं।

सही गमले और मिट्टी का चयन

बरसात में गमलों और मिट्टी का चुनाव बहुत मायने रखता है।

  • गमले में नीचे की तरफ ड्रेनज होल होना चाहिए ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके।
  • मिट्टी में रेत और खाद का संतुलन होना चाहिए ताकि पानी आसानी से निकल सके।
  • गमले के तले में छोटे पत्थर या कंकड़ बिछा देने से मिट्टी ज्यादा देर गीली नहीं रहती।

अतिरिक्त पानी से बचाव

बरसात में पौधों की सबसे बड़ी दुश्मन है – अतिरिक्त पानी। इससे बचने के लिए:

  • गमलों को ऐसी जगह रखें जहाँ सीधे बारिश का पानी गमले में न गिरे।
  • गमलों को छत या बालकनी में रखें तो ऊपर से प्लास्टिक शीट या शेड का इस्तेमाल करें।
  • पानी भर जाने पर गमले को हल्का तिरछा कर दें ताकि पानी निकल सके।

पौधों की पत्तियों और तनों की देखभाल

बरसात में पत्तियाँ जल्दी सड़ने लगती हैं। इसलिए:

  • गिरी हुई सूखी पत्तियों को गमले से तुरंत हटा दें।
  • पौधों की पत्तियों पर अगर सफेद धब्बे या फफूंद दिखे तो तुरंत दवा का छिड़काव करें।
  • नीम का तेल या फफूंदनाशक (Fungicide) का छिड़काव सप्ताह में एक बार करें।

कीड़े-मकोड़ों से बचाव

नमी वाले मौसम में कीड़े बहुत तेजी से फैलते हैं। इनसे बचाव के लिए:

  • गमलों की मिट्टी में नीम खली या राख डालें।
  • मच्छरों और चींटियों को रोकने के लिए गमलों के आसपास साफ-सफाई रखें।
  • यदि पत्तियों पर कीड़े लग गए हों तो नीम का अर्क या हल्का कीटनाशक इस्तेमाल करें।

पौधों को धूप मिलना जरूरी

बरसात के दिनों में भी पौधों को धूप मिलनी चाहिए।

  • जब भी बारिश रुके, गमलों को थोड़ी देर के लिए खुले में रखें।
  • धूप न मिलने पर पौधे कमजोर और बीमार हो जाते हैं।

गमलों की सफाई और व्यवस्था

बरसात में गमलों को समय-समय पर साफ करना जरूरी है।

  • गमलों के तले में जमी मिट्टी और काई को साफ करें।
  • गमलों को इस तरह सजाएँ कि पानी पास में जमा न हो।
  • छोटे गमलों को बड़े गमलों से थोड़ा अलग रखें ताकि कीट एक से दूसरे में न फैलें।

बरसात में लगाने योग्य पौधे

बरसात के मौसम में कुछ पौधे ऐसे होते हैं जो आसानी से पनपते हैं:

  • तुलसी, धनिया और पुदीना
  • गेंदे और गुड़हल के पौधे
  • एलोवेरा और स्नेक प्लांट जैसे इनडोर प्लांट

इन पौधों को लगाने से आपका गार्डन बरसात में भी हरा-भरा रहेगा।

बरसात में पौधों की देखभाल के घरेलू उपाय

  • गमले की मिट्टी में समय-समय पर दालचीनी पाउडर डालें, इससे फफूंद नहीं लगेगी।
  • पानी देते समय ध्यान रखें कि मिट्टी सिर्फ हल्की नम रहे, गीली न हो।
  • हफ्ते में एक बार पौधों की जड़ों के पास गर्म पानी का छिड़काव करें, इससे बैक्टीरिया और कीड़े मरते हैं।

निष्कर्ष

बरसात का मौसम पौधों के लिए जितना फायदेमंद है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी। अगर गमलों और पौधों की सही देखभाल की जाए तो यह मौसम आपके गार्डन को और भी खूबसूरत बना सकता है। बस ध्यान रखें कि गमलों में पानी जमा न हो, पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती रहे और समय-समय पर कीट व फफूंद से बचाव के उपाय किए जाएँ।

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