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भारतीय वायुसेना को दुनिया की सबसे विविधतापूर्ण फाइटर जेट फ्लीट में से एक माना जाता है। भारत ने रणनीतिक, तकनीकी और भू-राजनीतिक संतुलन के लिए विभिन्न देशों से आधुनिक और पारंपरिक फाइटर जेट्स खरीदे हैं। इसमें रूस, फ्रांस, इंग्लैंड-फ्रांस संयुक्त उपक्रम और स्वदेशी विमान शामिल हैं। इसके साथ ही, अमेरिका के F-35 फाइटर जेट को लेकर भी चर्चा गर्म रही, लेकिन अब यह डील रद्द हो चुकी है।

F-35 डील: अमेरिका के साथ भारत ने क्यों ठुकराया प्रस्ताव?

2025 में भारत ने स्पष्ट कर दिया कि वह अमेरिका के F-35 स्टील्थ फाइटर जेट की डील नहीं करेगा। कारण था अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 25% टैरिफ और आर्थिक प्रतिबंध, जो भारत के रूस से हथियार और तेल खरीदने की नीति पर प्रतिक्रिया स्वरूप लगाए गए थे। इसके जवाब में भारत ने अमेरिका का F-35 ऑफर ठुकरा दिया।

हालाँकि अमेरिका ने इस फाइटर जेट के लिए कई बार पेशकश की थी, लेकिन भारत ने तकनीकी विविधता और रणनीतिक स्वायत्तता को प्राथमिकता देते हुए इसे अस्वीकार किया।

भारत किन देशों से फाइटर जेट खरीदता है?

रूस: भारत का पारंपरिक सैन्य साझेदार

मिग-29

  • प्रकार: चौथी पीढ़ी का मल्टीरोल फाइटर
  • उपयोग: हवा से हवा और जमीन पर हमले
  • कीमत: ₹200 करोड़ (प्रति यूनिट)
  • उपयोगकर्ता: वायुसेना और नौसेना दोनों

सुखोई-30MKI

  • विकास: भारत-रूस संयुक्त परियोजना
  • विनिर्माण: HAL द्वारा भारत में असेंबल
  • विशेषताएं: उच्च युद्धाभ्यास क्षमता, भारी हथियार, लंबी दूरी की उड़ान
  • स्थान: भारतीय वायुसेना की रीढ़

फ्रांस: अत्याधुनिक तकनीक का स्रोत

मिराज-2000

  • निर्माता: दसाल्ट एविएशन
  • प्रकार: चौथी पीढ़ी का मल्टीरोल फाइटर
  • गति: 2,336 किमी/घंटा
  • कीमत: ₹350 करोड़ (लगभग $43 मिलियन)
  • उपलब्धि: कारगिल युद्ध में अहम भूमिका

राफेल

  • प्रकार: डेल्टा विंग, दो इंजन वाला मल्टीरोल फाइटर
  • सुविधा: 3D मैपिंग, परमाणु हथियार क्षमता, हर मौसम में मारक क्षमता
  • कीमत: लगभग $135 मिलियन प्रति यूनिट
  • विशेषता: भारत में इंडक्शन के बाद इसे हाइपरसोनिक हथियारों और अडवांस रडार से लैस किया गया है

इंग्लैंड-फ्रांस संयुक्त उपक्रम: सेपेकैट जगुआर

  • प्रकार: ग्राउंड अटैक और परमाणु हथियार क्षमता
  • प्रमुख विशेषता: सुपरसोनिक गति, नगण्य ऊंचाई पर उड़ान, गहरे पैठकर हमला
  • स्थिति: अब धीरे-धीरे रिटायर किए जा रहे हैं

स्वदेशी विकास: तेजस

तेजस LCA (Light Combat Aircraft)

  • विकासकर्ता: HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड)
  • प्रकार: हल्का लड़ाकू विमान
  • विशेषता: स्वदेशी एवियोनिक्स, सुपरसोनिक स्पीड, छोटे रनवे से टेक-ऑफ
  • भविष्य: वायुसेना में बड़े पैमाने पर शामिल करने की योजना

भारत के पास कितने फाइटर स्क्वाड्रन हैं?

भारतीय वायुसेना के पास वर्तमान में लगभग 32 स्क्वाड्रन हैं, जबकि आवश्यकता 42 स्क्वाड्रन की है। मिग-21 जैसे पुराने विमान धीरे-धीरे रिटायर हो रहे हैं, जिससे नए और अत्याधुनिक विमानों की ज़रूरत बढ़ रही है।

इस गैप को भरने के लिए तेजस, राफेल जैसे जेट्स की संख्या बढ़ाई जा रही है और भारत अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की खोज में भी लगा है।

भारत F-35 क्यों नहीं खरीद रहा?

  • अमेरिकी प्रतिबंध और टैरिफ: अमेरिका ने भारत पर 25% टैरिफ लगाया, जिससे द्विपक्षीय संबंध प्रभावित हुए
  • रणनीतिक स्वतंत्रता: भारत एक ही देश पर निर्भरता नहीं चाहता
  • तकनीकी विविधता: रूस, फ्रांस, स्वदेशी विकल्पों के जरिए तकनीकी विविधता बनाए रखना चाहता है
  • मल्टी-फ्रंट वॉर की तैयारी: भारत चीन और पाकिस्तान दोनों मोर्चों पर तैयार रहना चाहता है, जिसके लिए तकनीकी मिश्रण जरूरी है

निष्कर्ष

भारत की वायुसेना रूस, फ्रांस, इंग्लैंड-फ्रांस संयुक्त उपक्रम और स्वदेशी विमानों जैसे तेजस पर निर्भर है। हर विमान की अपनी खास विशेषताएं हैं—चाहे वह मिग-29 की बहुआयामी क्षमताएं हों या राफेल की परमाणु और स्टील्थ विशेषताएं।

जहाँ अमेरिका ने F-35 जैसे एडवांस फाइटर जेट्स का प्रस्ताव दिया, वहीं भारत ने अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं के अनुसार उस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।

भविष्य की दिशा साफ है: भारत आत्मनिर्भरता, तकनीकी संतुलन और रणनीतिक स्वतंत्रता की ओर बढ़ रहा है।

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