TRUMP

भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से व्यापारिक रिश्ते सहयोगी रहे हैं, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने इन रिश्तों में तनाव ला दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की टैरिफ नीति पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भारत ने “लगभग किसी भी अन्य देश से ज्यादा” टैरिफ लगाए हैं और अब अमेरिका इस पर प्रतिक्रिया देने को तैयार है। ट्रंप ने यह बयान अपनी स्कॉटलैंड यात्रा से लौटते समय ‘एयर फोर्स वन’ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए दिया।

“भारत अच्छा दोस्त है, लेकिन…” ट्रंप का दोहराया गया बयान

ट्रंप ने कहा, “भारत एक अच्छा दोस्त रहा है, लेकिन भारत ने लगभग किसी भी अन्य देश से ज्यादा टैरिफ लगाए हैं। आप ऐसा नहीं कर सकते।” यह बात उन्होंने दो बार स्पष्ट रूप से दोहराई, जो उनके विचारों की गंभीरता को दर्शाती है। यह बयान उन्होंने तब दिया जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत पर 20% से 25% तक टैरिफ लगना संभव है। जवाब में उन्होंने कहा, “मुझे लगता है, हां।”

1 अगस्त की डेडलाइन: अमेरिकी रणनीति का केंद्रबिंदु

ट्रंप का यह बयान एक अहम समय पर आया है। 1 अगस्त को अमेरिका कई देशों पर ‘प्रतिस्पर्धी टैरिफ’ (Reciprocal Tariffs) लगाने की तैयारी कर रहा है। इन टैरिफ का उद्देश्य उन देशों को जवाब देना है जो अमेरिका से आयात होने वाले उत्पादों पर अधिक शुल्क लगाते हैं।

अप्रैल 2025 में ट्रंप प्रशासन ने उच्च टैरिफ की घोषणा की थी, लेकिन बातचीत का समय देने के लिए इसे 10% तक सीमित रखा गया था। अब डेडलाइन नजदीक आते हुए अमेरिका ने भारत समेत कई देशों से व्यापारिक समझौते की उम्मीद जताई है, लेकिन अब तक कुछ ही सौदे हुए हैं।

भारत के लिए विशेष चिंता: बढ़ सकता है दबाव

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार भी इस संभावना को लेकर सतर्क है और देश में उच्च टैरिफ (20% से 25%) की तैयारी की जा रही है। अमेरिका चाहता है कि भारत अपने बाज़ार को अमेरिकी निर्यात के लिए अधिक खुला करे, खासकर कृषि उत्पादों, फार्मा और तकनीकी सामान के संदर्भ में।

यूएस ट्रेड प्रतिनिधि का बयान: बातचीत की ज़रूरत अभी बाकी

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जैमीसन ग्रीर ने कहा कि अमेरिका को भारत के साथ और बातचीत की जरूरत है, ताकि यह समझा जा सके कि भारत अमेरिकी निर्यात के लिए अपने बाजार को कितना खोलने को तैयार है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत के साथ बातचीत चल रही है, लेकिन कोई ठोस नतीजा अब तक नहीं निकला है।

भारत की स्थिति: संरक्षणवाद या आत्मनिर्भरता?

भारत की नीति ऐतिहासिक रूप से ‘आत्मनिर्भरता’ और ‘आर्थिक सुरक्षा’ पर केंद्रित रही है। देश अपने घरेलू उद्योगों की रक्षा के लिए टैरिफ का उपयोग करता है। भारत का यह तर्क है कि बड़े और विकसित देशों के मुक़ाबले उसे घरेलू उद्योगों की रक्षा करनी चाहिए।

हालांकि अमेरिका का मानना है कि भारत की यह नीति अमेरिकी कंपनियों के लिए बाज़ार को अनुचित रूप से सीमित करती है, जिससे व्यापार घाटा बढ़ता है।

व्यापार घाटा: अमेरिका की बड़ी चिंता

अमेरिका का भारत के साथ व्यापार घाटा कई वर्षों से ट्रंप प्रशासन के लिए चिंता का विषय रहा है। वर्ष 2024 में अमेरिका का भारत के साथ व्यापार घाटा लगभग $27 बिलियन रहा, जिसमें अधिकांश हिस्सा भारत से आयातित वस्तुओं का था। ट्रंप प्रशासन इसी असंतुलन को दूर करने के लिए टैरिफ हथियार के रूप में उपयोग कर रहा है।

राजनीतिक संकेत: चुनावी साल में ट्रेड टकराव

2025 अमेरिका में चुनावी तैयारियों का साल है, और ट्रंप प्रशासन घरेलू औद्योगिक वर्ग को खुश करने के लिए सख्त व्यापार नीति अपना रहा है। ऐसे में भारत जैसे देशों के साथ टकराव, घरेलू वोटरों को यह संकेत देने का प्रयास हो सकता है कि सरकार उनकी नौकरियों और व्यवसायों की रक्षा कर रही है।

भारत की प्रतिक्रिया क्या हो सकती है?

यदि अमेरिका भारत पर 25% टैरिफ लागू करता है, तो भारत भी प्रतिकार स्वरूप कुछ अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ बढ़ा सकता है। पहले भी भारत ने 2019 में अमेरिकी टैरिफ का जवाब देते हुए 28 अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाए थे।

इस बार भी भारत डब्ल्यूटीओ (WTO) के नियमों के तहत जवाबी कार्रवाई कर सकता है। साथ ही, भारत व्यापारिक समझौतों और द्विपक्षीय वार्ताओं के ज़रिए संतुलन बनाने की कोशिश कर सकता है।

निष्कर्ष: दोस्ती बनाम व्यापार

ट्रंप के बयान से स्पष्ट है कि अमेरिका और भारत के बीच दोस्ती अपने स्थान पर है, लेकिन व्यापारिक हितों पर समझौता नहीं किया जाएगा। भारत को अब यह तय करना है कि वह अपने टैरिफ को घटा कर अमेरिका को रिझाता है या आत्मनिर्भरता की नीति पर अडिग रहता है और अमेरिकी टैरिफ का सामना करता है।

भविष्य की दिशा: क्या होगा समाधान?

1 अगस्त 2025 की डेडलाइन से पहले अगर भारत और अमेरिका कोई व्यापार समझौता नहीं करते, तो यह निश्चित है कि टैरिफ युद्ध और गहराएगा। इससे न केवल व्यापार प्रभावित होगा, बल्कि रणनीतिक रिश्तों में भी दरार पड़ सकती है।

दोनों देशों के लिए बेहतर होगा कि व्यवहारिक समाधान और संतुलनकारी समझौते के माध्यम से इस टकराव को खत्म किया जाए।

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