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देश में साइबर अपराध और टेलीकॉम फ्रॉड के मामलों में लगातार वृद्धि को देखते हुए भारत सरकार के टेलीकॉम विभाग (DoT) ने कई सशक्त कदम उठाए हैं। इनका उद्देश्य नागरिकों को फर्जी कॉल, SMS और अन्य डिजिटल फ्रॉड से बचाना है। इस दिशा में हाल ही में राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में संचार और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने विस्तृत जानकारी दी।

साइबर अपराध पर किसका अधिकार क्षेत्र?

साइबर अपराध का सीधा दायित्व गृह मंत्रालय (MHA) के अंतर्गत आता है। हालांकि, टेलीकॉम संसाधनों के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन (DoT) की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार ‘पुलिस’ और ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ राज्य सूची के विषय हैं, इसीलिए राज्य सरकारें भी इन मामलों में सीधे तौर पर संलग्न हैं।

डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP): एक सुरक्षित साझाकरण मंच

DoT ने एक सुरक्षित Digital Intelligence Platform (DIP) विकसित किया है, जो टेलीकॉम संसाधनों के दुरुपयोग से संबंधित जानकारी को विभिन्न संस्थाओं के बीच साझा करने की सुविधा देता है। इसके माध्यम से साइबर क्राइम और वित्तीय धोखाधड़ी की रोकथाम की जा रही है।

  • अभी तक 620 से अधिक संस्थाओं को इस प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा चुका है।
  • इसमें केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियाँ, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश पुलिस, I4C, GST नेटवर्क, बैंक और टेलीकॉम सेवा प्रदाता शामिल हैं।

वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम सूचकांक (FRI): नंबर की विश्वसनीयता जांच

DoT ने Financial Fraud Risk Indicator (FRI) नामक एक नया टूल विकसित किया है, जो किसी भी मोबाइल नंबर को मध्यम, उच्च या बहुत उच्च जोखिम वर्ग में वर्गीकृत करता है। यह विशेषकर बैंकों, NBFCs और UPI सेवा प्रदाताओं के लिए उपयोगी है ताकि वे संदिग्ध मोबाइल नंबर से ट्रांजेक्शन को लेकर सतर्कता बरत सकें।

अंतरराष्ट्रीय स्पूफ कॉल की पहचान और ब्लॉकिंग

DoT और टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं ने एक प्रणाली तैयार की है जो अंतरराष्ट्रीय कॉल्स को पहचानती है जो भारतीय नंबर बनाकर spoof की जाती हैं। ये कॉल्स असल में भारत से नहीं होतीं, लेकिन दिखाया जाता है कि वे भारतीय मोबाइल नंबर से आ रही हैं। अब ऐसी कॉल्स को ब्लॉक किया जा रहा है जिससे धोखेबाजों की चालें विफल हो सकें।

ASTR: AI और Big Data आधारित सिम सत्यापन टूल

फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लिए गए सिम कार्ड का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए DoT ने ASTR (AI & Big Data Tool) विकसित किया है। यह उपकरण उन सिम कार्ड्स की पहचान करता है जो एक ही व्यक्ति द्वारा अलग-अलग नामों से लिए गए हैं। इससे सिम फ्रॉड की संभावना में भारी कमी आई है।

साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP)

गृह मंत्रालय द्वारा स्थापित Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) के तहत National Cyber Crime Reporting Portal (https://cybercrime.gov.in) लॉन्च किया गया है, जहां आम नागरिक सभी प्रकार के साइबर अपराध की रिपोर्ट कर सकते हैं।

  • 2024 में कुल शिकायतें: 19.18 लाख
  • कुल धनराशि की हानि: ₹22,811.95 करोड़

संचार साथी ऐप: नागरिकों का डिजिटल रक्षक

DoT ने Sanchar Saathi App/Portal लॉन्च किया है जो आम नागरिकों को फेक कॉल्स और SMS की रिपोर्टिंग के लिए सशक्त बनाता है। यह ऐप नागरिकों को न केवल रिपोर्ट करने का विकल्प देता है, बल्कि उनके मोबाइल कनेक्शन की सुरक्षा के लिए जरूरी उपायों की जानकारी भी देता है।

संचार मित्र कार्यक्रम: युवाओं की भागीदारी

Sanchar Mitra Volunteer Program के तहत विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र जनता के बीच जागरूकता अभियान चला रहे हैं। वे लोगों को डिजिटल सुरक्षा, फ्रॉड से बचाव और संचार साथी ऐप के उपयोग के बारे में शिक्षित कर रहे हैं। ये कार्यक्रम वर्कशॉप, ऑन-ग्राउंड इंटरैक्शन और नुक्कड़ सभाओं के रूप में आयोजित किए जा रहे हैं।

जन जागरूकता अभियान

DoT ने टेलीकॉम फ्रॉड को लेकर आम लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए व्यापक प्रयास किए हैं:

  • स्थानीय भाषाओं में जानकारी का प्रसार
  • सोशल मीडिया अभियान
  • SMS अलर्ट और प्रेस विज्ञप्तियां
  • LEAs, बैंकों, और टेलीकॉम कंपनियों के साथ सहयोग

निष्कर्ष: नागरिकों की जागरूकता और तकनीकी उपाय – दोनों जरूरी

डिजिटल युग में बढ़ते साइबर खतरों को देखते हुए भारत सरकार की ओर से उठाए गए कदम सराहनीय हैं। लेकिन इन तकनीकी उपायों के साथ-साथ नागरिकों की जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। फर्जी कॉल या SMS आने पर सतर्क रहें, अपने पर्सनल डिटेल्स किसी के साथ साझा न करें और संचार साथी जैसे टूल्स का इस्तेमाल करें।

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