धान भारत की प्रमुख खाद्यान्न फसल है और इसकी अच्छी पैदावार के लिए फसल का रखरखाव बेहद जरूरी होता है। यदि फसल में घास की समस्या बढ़ जाए तो उत्पादन पर बुरा असर पड़ सकता है। ऐसे में किसानों को समय पर उपाय करना आवश्यक है।
धान की फसल का रखरखाव क्यों है ज़रूरी?
धान की खेती में शुरुआती 30-40 दिन फसल की जड़ मज़बूत करने के लिए सबसे अहम होते हैं। इस दौरान खरपतवार यानी घास-फूस फसल से पोषक तत्व और पानी छीन लेती हैं, जिससे पैदावार में भारी गिरावट आती है। इसलिए रखरखाव का सही तरीका अपनाना जरूरी है।
अगर लग रही है घास, तो क्या करें किसान?
1. निंड़ाई-गुड़ाई समय पर करें
अगर खेत में हाथ से रोपाई की गई है, तो बुवाई के 20-25 दिन बाद पहली बार और फिर 40-45 दिन बाद दूसरी बार निंड़ाई करना जरूरी है। यह घास को जड़ से निकाल देता है।
2. सही खरपतवारनाशक (Herbicide) का छिड़काव करें
यदि हाथ से घास हटाना संभव नहीं है, तो वैज्ञानिक तरीके से खरपतवारनाशक दवाओं का उपयोग करें:
- बुवाई से पहले: पेंडीमिथालिन 30 EC का छिड़काव।
- बुवाई के बाद 15-20 दिन में: बिसपाइरीबैक-सोडियम, बूटाक्लोर, या प्रिटिलाच्लोर का उपयोग करें।
3. सही जल प्रबंधन रखें
धान के खेतों में हल्का पानी बनाए रखें, ताकि घास की बढ़त को रोका जा सके और खरपतवारनाशक दवा बेहतर काम कर सके।
जैविक तरीकों से भी कर सकते हैं नियंत्रण
यदि आप रासायनिक दवाओं का प्रयोग नहीं करना चाहते, तो सड़ी हुई गोबर खाद और जैविक खरपतवारनाशक जैसे नीम तेल घोल, गौमूत्र आदि का प्रयोग करें। यह पर्यावरण के अनुकूल भी है और फसल को भी नुकसान नहीं पहुंचाता।
धान की देखभाल के अन्य जरूरी उपाय
- खेत की मेढ़ें मजबूत रखें ताकि बाहर की घास अंदर न आए।
- फसल के बीच की दूरी उचित रखें जिससे हवा और धूप ठीक से पहुंचे।
- कीटों और बीमारियों पर भी नजर रखें।
ध्यान रहे, सही रखरखाव = ज्यादा उत्पादन
धान की फसल का सही रखरखाव न केवल उत्पादन बढ़ाता है बल्कि बाजार में अच्छी कीमत भी दिलाता है। घास और कीट नियंत्रण के उपाय समय से करने से लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है।
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