UNO

संयुक्त राष्ट्र संघ

UNO एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 1945 को अक्टूबर 24 को द्वितीय विश्वयुद्ध(1939 से 1945, लगभग 7 साल) के समापन के बाद हुई थी। इस युद्ध का समापन जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर अमेरिका द्वारा गिराए गए परमाणु बम के रूप में हुआ, जिस त्रासदी के निशान आज भी जापान में देखे जा सकते हैं।

क्या यह संगठन एकाएक विश्व पटल पर अवतरित हुआ?

ऐसा नहीं है कि इस संगठन का निर्माण एकाएक द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद हो गया हो और यह संयुक्त राष्ट्र संघ के रूप में उभर आया हो। ऐसे अंतरराष्ट्रीय संगठन का निर्माण प्रथम विश्वयुद्ध (1914 से 1918, लगभग 5 साल) के बाद बनाया गया था। युद्ध के परिणामों और उसकी त्रासदी को देखते हुए प्रथम बार अंतरराष्ट्रीय संगठन के रूप में किसी संगठन की आवश्यकता का अनुभव किया गया जिसके बाद वर्ष 1919 में राष्ट्र संघ बनाने का निर्णय लिया गया पर यह अपने उद्देश्य में पूर्ण नहीं हो सका और द्वितीय विश्वयुद्ध होते ही इसकी महत्वता भी खत्म हो गयी क्योंकि इस संगठन का मुख्य उद्देश्य था कि इस संगठन का मुख्य कार्य भविष्य में आने वाले तांडव से पीढ़ियों की रक्षा करना है, संसार को प्रजातंत्र की सुरक्षा के लिए सुरक्षित स्थान बनाना है और इसी के साथ इसे एक ऐसी शांति की स्थापना करनी है जो न्याय पर पूर्ण रूप से आश्रित हो। यही एक एक कारण नहीं था इस संघ के विघटन और द्वितीय विश्वयुद्ध का बल्कि इसके विघटन का सीधा कारण कहे तो इसके निर्माण के समय से ही किसी न किसी रूप में दिखने लगा था, जिसके चलते यह संघ कभी भी मजबूत संस्था के रूप में उभर नहीं पाया और धीरे-धीरे इसकी महत्वता खत्म हो गयी।

हमें जानना होगा कि आखिर ऐसे कौन से कारण या गतिरोध थे जो राष्ट्र संघ के असफलता के कारण के रूप में उभरे थे:-

  1. उग्र राष्ट्रीयता किसी भी संगठन को प्रभावहीन करने की क्षमता रखती है और हमें यह ज्ञात होना चाहिए कि किसी भी संघ को चलाने के लिए संघ में सम्मिलित सभी गुटों/देशों को एक साथ आना होता है और किसी भी समस्या के समाधान या अन्य मुद्दों पर एकमत होना अनिवार्य होता है और उसे सर्वसम्मत से परिस्थितियों के अनुसार क्रियान्वयन करना होता है, पर ऐसा इस संघ में नहीं हुआ। राष्ट्र संघ से जुड़े सभी राष्ट्र अपने आपको एक संप्रभु समझते थे और अपनी इच्छाओं के अनुसार कार्य करना पसंद करते थे। ये सदस्य नहीं चाहते थे कि कोई भी राष्ट्र उनके देश की आंतरिक मामलों और संप्रभुता में दखल बाजी करें। कहने का तात्पर्य यह है कि राष्ट्र संघ में बेशक ऐसे नए कानून आए थे जो विश्व को एक नई रूपरेखा की ओर परिवर्तित कर सकते थे लेकिन सदस्यों की परंपरागत संकीर्ण विचारों ने इसे एक तरफ कर दिया।
  2. सार्वभौमिकता का अभाव राष्ट्र संघ के विघटन का एक और महत्वपूर्ण कारण है क्योंकि शांति स्थापना के लिए संपूर्ण विश्व के देशों को एक साथ आने की जरूरत थी।पर राष्ट्र संघ के 20 सालों के दौरान ऐसा कोई भी अवसर देखने को नहीं मिला कि सारे देश राष्ट्र संघ के सदस्य रहे हो।
  3. अमेरिका प्रथम विश्व युद्ध के बाद एक बड़ी वैश्विक शक्ति के रूप में उभरकर सामने आया था, जिसने राष्ट्र संघ को संस्था बनाने में अपनी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी किंतु जब इस संघ के सदस्यता की बात आएगी तो अमेरिका सीनेट ने उसे सीधे मना कर दिया जिससे यह संघ शुरुआती स्तर पर ही कमजोर हो गया।
  4. राष्ट्र संघ के कानूनों का ढीला होना भी इसके विघटन का एक कारण है।
  5. राष्ट्र संघ का निर्माण वर्साय संधि के बाद हुआ था जिसके कारण पराजित राष्ट्र इसे अपने ऊपर लगाए जाने वाली बेड़ियों के रूप में देख रहे थे और जिसके कारण वह राष्ट्र संघ से घृणा करते थे।

वहीं द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद और परमाणु त्रासदी देखने के बाद सम्पूर्ण विश्व एक बार फिर दहल गया था। जिसकी गूंज और होने वाले नुकसान प्रथम विश्वयुद्ध से कहीं ज्यादा था, अब सम्पूर्ण संसार को समझ मे आरहा था कि विश्व शांति, युद्ध से तो प्राप्त नहीं कि जा सकती है और विश्व शांति बनाए रखने के लिए किसी ऐसे संघ की फिर जरूरत समझी जानी लगी जो शांति को कायम रख कर अमन राज कायम रख सके। यहाँ राष्ट्रों को राष्ट्र संघ की कमियों की महक पूरी तरह से आने लगी थी इसलिए वो नहीं चाहते थे कि एक बार दोबारा ऐसा संघ बने जो समानता को सही ढंग से न ला सके। इस बार उसे इससे भी मजबूत संघ की जरूरी थी। ऐसे में जब द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ का निर्माण हुआ तो उसमें राष्ट्र संघ में हुए चूक को काफी हद तक सुधारने का प्रयास किया गया और इसमें सफल भी हुआ।

शुरुआत में राष्ट्र संघ में केवल 51 सदस्य थे। भारत ने 30 अक्टूबर 1945 को संयुक्त राष्ट्र संघ की सदस्यता ग्रहण की। वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र संघ के कुल 193 सदस्य हैं और इस संघ से जुड़ने वाला अंतिम देश दक्षिणी सूडान है। संयुक्त राष्ट्र संघ के पहले महासचिव के रूप में नार्वे के ट्राइग्व थे और वर्तमान में एंटोनियो गुटेरेश संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव हैं। यह संयुक्त राष्ट्र संघ के नौवें नंबर के महासचिव हैं। इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क शहर में स्थित है जो कि अमेरिका के अंदर आता है। संयुक्त राष्ट्र संघ की 6 कार्यकारी अधिकारिक भाषाएं रूसी, चीनी, अरबी, स्पेनिश , फ्रेंच और अंग्रेज़ी है।

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NOTE:- 10 दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्र संघ ने मानव अधिकार दिवस की सार्वभौमिक घोषणा की थी। जिसके बाद प्रत्येक वर्ष 10 दिसंबर को, मानव अधिकार दिवस के रुप में मनाया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र संघ को बनाने का मुख्य उद्देश्य

  • राष्ट्रों के बीच शांति और सुरक्षा को बनाए रखना।
  • राष्ट्रों के बीच ऐसे संबंध स्थापित करना जो की मित्रता पूर्ण हो।
  • संयुक्त राष्ट्र संघ का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समस्याओं के समाधान में सहयोग करना भी है। उदाहण के लिए COVID-19 की समस्या।
  • राष्ट्रों के बीच हो रही कार्यवाही यों के मध्य में सामंजस्य स्थापित करना ताकि गतिरोध उत्पन्न ना हो।
  • संयुक्त राष्ट्र संघ के तहत ऐसे क्रियाकलापों को उनके तह तक पहुंचाना या मदद करना है जो मानव अधिकारों के प्रति सम्मान को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
  • ऐसे झगड़े जो अंतरराष्ट्रीय झगड़े का रूप ले सकते हैं को पहले ही रोकना, उनके बीच बात चीत को बढ़ावा देना और पारस्परिक सहयोग को बढ़ाना है।

संयुक्त राष्ट्र संघ के अंग

संयुक्त राज्य संघ के कुल 6 अंग हैं जिसमें हर अंग के अलग-अलग कार्य निर्धारित हैं। ये अंग निम्नलिखित हैं:-

  1. महासभा
  2. सुरक्षा परिषद
  3. आर्थिक और सामाजिक परिषद
  4. अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय
  5. न्यास संरक्षण/परिषद
  6. सचिवालय

1. महासभा( विश्व विधान पालिका):- महासभा को आम सभा भी कहा जाता है यह संयुक्त राष्ट्र संघ का पहला अंग है। इसके अंतर्गत संयुक्त राष्ट्र संघ के सभी राष्ट्रों(193) के प्रतिनिधि आते हैं। इन सभी देशों को वोट देने का अधिकार है। इस संघ में एक देश एक वोट प्रणाली को अनुग्रहित किया गया है। अगर महासभा में कोई भी निर्णय पास करवाना हो तो दो तिहाई( लगभग 128 सीट/ देश) का बहुमत होना आवश्यक होता है और बाकी में सामान्य बहुमत की आवश्यकता होती है। महासभा में वर्तमान में प्रासंगिक वैश्विक मुद्दे या अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर जोर दिया जाता है, जो कि किसी भी राष्ट्र के लिए आवश्यक होते हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ के अंग में से एक, सुरक्षा परिषद के 10 अस्थाई सदस्यों का चुनाव, इसी सभा में पूर्ण किया जाता है।

2. सुरक्षा परिषद (संसद जिसे विश्व कार्यपालिका भी कहा जाता है) :- सुरक्षा परिषद का मुख्य कार्य है अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को सुचारू रूप से व्यवस्थित रखना। इस परिषद के पास यह अधिकार है कि वह किन निर्णयों को घोषित करें या किन निर्णयों को घोषित न करे। इस परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं जिसमें 5 स्थाई और 10 अस्थाई सदस्य होते हैं। स्थाई सदस्य चीन, फ्रांस, रूस , अमेरिका और ब्रिटेन है। जबकि अस्थाई सदस्य प्रत्येक 2 साल बाद सामान्य चुनाव से चुने जाते हैं। यहां एक बात गौर करने योग्य है कि पांच स्थाई सदस्यों के पास वीटो पावर है जिसके कारण इन सदस्यों में से किसी एक के द्वारा वीटो पावर के प्रयोग से सुचारू कार्यप्रणाली में रूकावट या ठहराव आ सकता है। इस वीटो पावर का निर्माण व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाए रखने के लिए किया गया था परंतु यह देखने में ज्यादा आया है कि इसका प्रयोग स्थाई सदस्य अपने हित को साधने में ज्यादा करते हैं।

3. आर्थिक और सामाजिक परिषद:- इस परिषद में आर्थिक, सामाजिक, पर्यावरण से संबंधित मुद्दे , सतत विकास जैसे विषयों पर बातचीत आदि किया जाता है। विश्व के भौगोलिक क्षेत्र को देखते हुए इस परिषद में कुल 54 सदस्य हैं।

4. अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय:- इस संघ को संयुक्त राष्ट्र संघ का प्रधान अंग माना जाता है। इसमें कुल 15 न्यायाधीश होते हैं जिनकी नियुक्ति 9 वर्षों के लिए की जाती है। यह परिषद नीदरलैंड के हेग में स्थित है।

5. न्यास परिषद:- न्यास परिषद में सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य ही शामिल होते हैं। इसकी स्थापना ऐसे न्यास प्रदेशों के पर्यवेक्षण के लिए की गई थी जहां द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्वायत्त शासन की शुरूआत नहीं हो सकी थी। यह परिषद अंतिम टेस्ट टेरिटरी पलाउ के आजाद होने के साथ ही 1994 में निलंबित कर दिया गया है लेकिन यह अस्तित्व में अभी भी है और आवश्यकता अनुरूप इसका पुनः क्रियान्वयन किया जा सकता है।

6. सचिवालय:- सचिवालय का प्रमुख महासचिव होता है। यह अन्य संगठनों के कामकाज के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्टाफ के रूप में कार्यरत होता है।

UNO द्वारा सुझाए गए नवीन खतरे:-

  1. महामारी
  2. आतंकवाद
  3. आपदा
  4. जनसंख्या विस्फोट
  5. परमाणु बम
  6. पर्यावरण का नष्ट होना
  7. वैश्विक गरीबी और बेरोजगारी
  8. महिलाओं का शोषण

संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रमुख संस्थाएं

  • FAO:- FOOD AND AGRICULTURE ORGANIZATION
  • IAEA:- INTERNATIONAL ATOMIC ENERGY AGENCY
  • IMF:- INTERNATIONAL MONETORY FUND
  • WMO:- WORLD METEOROLOGICAL ORGANIZATION
  • WHO:- WORLD HEALTH ORGANIZATION
  • ILO:- INTERNATIONAL LABOUR ORGANIZATION
  • IMO:- INTERNATIONAL MARITIME ORGANIZATION
  • UPU:- UNIVERSAL POSTAL UNION
  • UNIDO:- UNITED NATIONS INDUSTRIAL DEVELOPMENT ORGANIZATION
  • UNWTO:- UNITED NATIONS WORLD TOURISM ORGANIZATION
  • WIPO:- WORLD INTELLECTUAL PROPERTY ORGANIZATION
  • ITU:- INTERNATIONAL TELECOMMUNICATION UNION
  • IFAD:- INTERNATIONAL FUND FOR AGRICULTURE DEVELOPMENT
  • UNESCO:- UNITED NATIONS EDUCATIONAL , SCIENTIFIC AND CULTURAL ORGANIZATION.

Pic credit:-googlephotos

मदद ली गयी:- http://www.un.org

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