बिहार में Special Intensive Revision (SIR) अभियान के तहत चुनाव आयोग ने यह सुनिश्चित करने की योजना बनाई है कि “कोई भी योग्य मतदाता छूटे नहीं।” इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए राज्य भर में विशेष प्रयास किए जा रहे हैं ताकि मृत, स्थानांतरित या दोहराए गए नामों को हटाया जा सके और नए योग्य मतदाताओं को जोड़ा जा सके।
BLOs/EROs द्वारा साझा की गई जानकारी
बूथ स्तर पर त्रुटियों की पहचान
सभी बूथ स्तर अधिकारियों (BLOs), इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (EROs), डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर्स (DEOs) और मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) ने उन मतदाताओं की सूची सभी 12 राजनीतिक दलों के साथ साझा कर दी है:
- जिनका फॉर्म नहीं भरा गया है
- जो मतदाता अब जीवित नहीं हैं
- जो स्थायी रूप से अन्यत्र स्थानांतरित हो चुके हैं
इसका उद्देश्य यह है कि राजनीतिक दल अगर चाहें तो इन सूचियों की समीक्षा करके किसी भी गलती या छूट को चिन्हित कर सकें।
दावे और आपत्तियों की समय-सीमा
SIR आदेश के अनुसार:
- कोई भी मतदाता या राजनीतिक दल 1 सितंबर 2025 तक दावा प्रस्तुत कर सकता है यदि किसी योग्य व्यक्ति का नाम सूची से छूट गया है।
- इसी प्रकार, गलत नाम शामिल होने पर आपत्ति दर्ज की जा सकती है।
अब तक की प्रमुख प्रगति
कुल कवरेज
- अब तक 99% मतदाताओं को कवर किया जा चुका है।
- 91.32% यानी 7.21 करोड़ मतदाताओं के फॉर्म प्राप्त हो चुके हैं और उनका डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है।
- शेष मतदाताओं के फॉर्म को भी BLO/BLA रिपोर्ट्स के साथ तेजी से डिजिटल किया जा रहा है।
BLOs/BLAs द्वारा एकत्रित आंकड़े
| श्रेणी | संख्या |
| मृत मतदाता | 21.6 लाख |
| स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाता | 31.5 लाख |
| एक से अधिक स्थानों पर दर्ज मतदाता | 7 लाख |
| खोज से बाहर (Untraceable) | 1 लाख |
| फॉर्म अब तक प्राप्त नहीं हुए | 7 लाख से कम |
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि BLO और BLA द्वारा किए गए घर-घर सर्वेक्षण के बावजूद कुछ मतदाताओं के फॉर्म अब तक प्राप्त नहीं हो सके हैं।
ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल का प्रकाशन
1 अगस्त 2025 को जारी होगा ड्राफ्ट
- ड्राफ्ट मतदाता सूची (Draft Electoral Roll) 1 अगस्त 2025 को प्रकाशित की जाएगी।
- सूची की प्रिंटेड व डिजिटल दोनों प्रतियां सभी 12 राजनीतिक दलों को प्रदान की जाएंगी।
- यह सूची चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी उपलब्ध रहेगी ताकि आम जनता भी इसकी जांच कर सके।
शिकायत या संशोधन कैसे करें?
दावा और आपत्ति प्रक्रिया
अगर किसी मतदाता को लगता है कि:
- उसका नाम सूची से छूट गया है, या
- सूची में कोई गलत नाम दर्ज हो गया है,
तो वह 1 सितंबर 2025 तक BLO या संबंधित अधिकारी के पास दावा या आपत्ति दर्ज करा सकता है। यह सुविधा राजनीतिक दलों के लिए भी उपलब्ध है।
निष्कर्ष: पारदर्शी और समावेशी चुनाव की दिशा में कदम
बिहार का SIR अभियान यह दर्शाता है कि चुनाव आयोग हर मतदाता को न्याय देने के लिए कटिबद्ध है। इस प्रक्रिया में:
- मृत, दोहराए गए और स्थानांतरित नामों को हटाना,
- योग्य नए मतदाताओं को जोड़ना, और
- दावा और आपत्ति की पारदर्शी व्यवस्था
— यह सुनिश्चित करता है कि चुनाव निष्पक्ष और समावेशी हो।
नागरिकों से अपील
सभी पात्र नागरिकों और राजनीतिक दलों से अपील की जाती है कि वे:
- अपनी मतदाता सूची की जांच करें
- किसी भी गलती या छूट की स्थिति में दावा/आपत्ति जरूर दर्ज करें
- 1 अगस्त से 1 सितंबर 2025 के बीच सक्रिय भागीदारी दिखाएं, ताकि लोकतंत्र को मजबूत किया जा सके।
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