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आज के डिजिटल युग में पुस्तकालयों की भूमिका केवल किताबों तक सीमित नहीं रह गई है। अब यह ज्ञान, सूचना और तकनीक के एकीकृत माध्यम बनते जा रहे हैं। इसी दिशा में भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया नेशनल मिशन ऑन लाइब्रेरी (NML) एक क्रांतिकारी पहल है। इसका उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक को डिजिटल माध्यम से ज्ञान और संस्कृति तक आसान पहुंच उपलब्ध कराना है।

नेशनल मिशन ऑन लाइब्रेरी (NML) के चार मुख्य घटक

नेशनल वर्चुअल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया (NVLI) प्रोजेक्ट

  • इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य एक ओपन एक्सेस और यूज़र-फ्रेंडली फेडरेटेड सर्च इंटरफेस तैयार करना है, जिससे उपयोगकर्ता भारत की विविध संस्कृति, साहित्य, ऐतिहासिक दस्तावेज़ और ज्ञान-स्रोतों तक आसानी से पहुंच बना सकें।
  • यह प्लेटफ़ॉर्म Indian Culture Portal (ICP) के ज़रिए संचालित किया जा रहा है, जहां उपयोगकर्ता लाखों डिजिटल रिकॉर्ड्स और बिब्लियोग्राफिक डेटा को खोज सकते हैं।

मॉडल लाइब्रेरी की स्थापना

  • प्रत्येक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश की सरकार एक राज्य केंद्रीय पुस्तकालय और एक जिला पुस्तकालय का चयन करेगी, जिन्हें आधुनिक तकनीक, संरचना, और विशेष रूप से दिव्यांगों के अनुकूल सुविधाओं से लैस किया जाएगा।
  • इस योजना के अंतर्गत संस्कृति मंत्रालय के 6 पुस्तकालय भी शामिल हैं।

इस पहल का उद्देश्य है कि ये पुस्तकालय बाकी क्षेत्रों के लिए आदर्श मॉडल बनें।

मात्रात्मक और गुणात्मक सर्वेक्षण

देशभर में मौजूद सार्वजनिक पुस्तकालयों के बारे में जानकारी एकत्र करने हेतु यह सर्वेक्षण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य है

  • पुस्तकालयों की वर्तमान अवस्थिति का मूल्यांकन करना
  • उनकी सेवाओं की गुणवत्ता को समझना
  • नागरिकों की संतुष्टि और धारणा का विश्लेषण करना

यह डेटा आने वाले समय में नीति निर्माण और पुस्तकालय सुधार योजनाओं के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।

क्षमता निर्माण (Capacity Building)

  • यह घटक देशभर के पुस्तकालय कर्मचारियों और पुस्तकालय विज्ञान के छात्रों को आधुनिक तकनीक और डिजिटल सेवाओं के उपयोग में प्रशिक्षित करने पर केंद्रित है। इसके तहत संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

डिजिटलीकरण की दिशा में उठाए गए ठोस कदम

Indian Culture Portal (ICP)

  • यह पोर्टल 10 दिसंबर 2019 को NVLI के अंतर्गत लॉन्च किया गया था।
  • इसमें वर्तमान में लगभग 3.42 लाख डिजिटल रिकॉर्ड्स मेटाडेटा के साथ उपलब्ध हैं। साथ ही, 34.91 लाख से अधिक बिब्लियोग्राफिक रिकॉर्ड्स भी पोर्टल पर होस्ट किए गए हैं।

यह पोर्टल भारत की विरासत, संस्कृति, कला, साहित्य और ऐतिहासिक दस्तावेज़ों के लिए एक समृद्ध डिजिटल स्रोत बन चुका है।

मॉडल लाइब्रेरी योजना के अंतर्गत वित्तीय सहायता

  • राज्य और जिला पुस्तकालयों को तकनीकी उन्नयन, आधारभूत संरचना विकास, और उपकरणों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है।
  • इससे लाइब्रेरीज़ को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से सुसज्जित किया जा रहा है।

लाइब्रेरी स्टाफ के लिए तकनीकी प्रशिक्षण

  • Capacity Building कार्यक्रमों के अंतर्गत, पुस्तकालय कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे RFID तकनीक, डिजिटल कैटलॉगिंग, ई-रीडर सुविधाओं जैसी आधुनिक प्रणालियों से लैस हो सकें।

डिजिटल पुस्तकालय की विशेषताएं और लाभ

  • सुलभता: किसी भी स्थान से 24×7 डिजिटल लाइब्रेरी तक पहुंच
  • विविधता: ऐतिहासिक, धार्मिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक सामग्री
  • समावेशिता: दिव्यांगजनों के लिए विशेष सुविधाएं
  • तकनीकी प्रगति: QR कोड, बारकोड, RFID जैसी नई तकनीकों का समावेश
  • डिजिटल इंडिया अभियान को बल देने वाली पहल

सरकार की प्रतिबद्धता: एक समावेशी ज्ञान समाज की ओर

  • राज्यसभा में केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सरकार हर नागरिक को डिजिटल नॉलेज प्लेटफॉर्म से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
  • भारत का डिजिटल पुस्तकालय मॉडल भविष्य में ग्लोबल डिजिटल नॉलेज हब बनने की दिशा में अग्रसर है।

निष्कर्ष

डिजिटल पुस्तकालय की यह पहल भारत के शैक्षणिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति का संकेत देती है। National Virtual Library, Model Libraries, Capacity Building और Surveys जैसे बहुआयामी घटकों के माध्यम से भारत न केवल ज्ञान तक पहुंच को आसान बना रहा है, बल्कि एक समावेशी, तकनीकी और उन्नत पुस्तकालय तंत्र भी विकसित कर रहा है।

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