देश के छोटे विक्रेता और पारंपरिक कारीगर भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। ये वर्ग न केवल रोजगार सृजन में अहम भूमिका निभाते हैं, बल्कि स्थानीय उत्पादन और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को भी मजबूत करते हैं। इन्हीं उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने दो प्रमुख योजनाओं की शुरुआत की: पीएम स्वनिधि योजना (स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि) और प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना।
स्ट्रीट वेंडर योजना
योजना का परिचय
इस योजना की शुरुआत जून 2020 में COVID-19 महामारी के दौरान हुई, जब लाखों स्ट्रीट वेंडर (ठेले, रेडी, रेहड़ी आदि चलाने वाले लोग) का रोजगार छिन गया। इस योजना का उद्देश्य था उन्हें फिर से स्वरोजगार के लिए ऋण सहायता उपलब्ध कराना।
प्रमुख विशेषताएँ
- ₹10,000 तक का कार्यशील पूंजी ऋण बिना गारंटी के।
- समय पर भुगतान करने पर 7% की ब्याज सब्सिडी।
- डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने पर कैशबैक का लाभ।
- ऋण चुकता होने पर अगली बार ₹20,000 और ₹50,000 तक की सुविधा।
लक्षित लाभार्थी
यह योजना शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में फेरी या छोटी दुकान चलाने वाले व्यक्तियों के लिए है, जैसे सब्ज़ी विक्रेता, चायवाले, मोची, ठेले वाले आदि।
योजना का प्रभाव
अब तक लाखों स्ट्रीट वेंडर्स इस योजना के तहत लाभान्वित हो चुके हैं। इससे उन्हें व्यवसाय दोबारा शुरू करने और अपनी आय बढ़ाने का अवसर मिला है। यह योजना आत्मनिर्भर भारत अभियान का एक सशक्त उदाहरण बनकर उभरी है।
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना
योजना का उद्देश्य
यह योजना पारंपरिक कारीगरों और हस्तशिल्प कलाकारों को सहायता देने के लिए शुरू की गई है, जिनकी कलाएं सदियों से भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रही हैं। योजना का उद्देश्य है – उन्हें औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ना, उनकी कार्यकुशलता को बढ़ाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना।
लाभार्थी वर्ग
इस योजना के अंतर्गत कुल 18 पारंपरिक व्यवसायों को कवर किया गया है, जिनमें बढ़ई, लोहार, सोनार, कुम्हार, दर्जी, मोची, नाई, माली, हथकरघा बुनकर, मूर्तिकार, टोकरा बुनकर, तालाब बनाने वाले इत्यादि शामिल हैं।
योजना के प्रमुख घटक
- पहचान और प्रमाणन: विश्वकर्मा कार्ड के माध्यम से सरकार द्वारा पहचान।
- प्रशिक्षण: कौशल उन्नयन हेतु 5-7 दिनों का प्रशिक्षण जिसमें ₹500 प्रतिदिन की सहायता।
- उपकरण किट: मुफ्त टूलकिट (₹15,000 तक) प्रदान की जाती है।
- ऋण सुविधा: ₹1 लाख (प्रथम किश्त) और ₹2 लाख (द्वितीय किश्त) तक बिना गारंटी ऋण, 5% ब्याज दर पर।
- डिजिटल सशक्तिकरण: UPI, QR कोड जैसे डिजिटल साधनों का प्रशिक्षण।
योजना का क्रियान्वयन
यह योजना केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित है और बैंकों, प्रशिक्षण संस्थानों व राज्य सरकारों के सहयोग से चलाई जाती है। डिजिटल इंडिया मिशन और स्किल इंडिया अभियान से इसे जोड़ा गया है।
योजना का प्रभाव
इस योजना से लाखों कारीगरों को आर्थिक मदद मिली है और उनकी पारंपरिक कलाओं को बाजार से जोड़ने में सहायता मिली है। इससे न केवल उनका जीवन स्तर सुधरा है, बल्कि हस्तशिल्प उद्योग को भी बढ़ावा मिला है।
योजनाओं के सामाजिक-आर्थिक लाभ
- रोजगार में वृद्धि: स्वरोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।
- लघु उद्योगों को प्रोत्साहन: छोटे व्यवसाय और पारंपरिक हस्तशिल्प जीवित हो रहे हैं।
- आर्थिक समावेशन: गरीब और हाशिए पर खड़े वर्गों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने में मदद।
- महिला सशक्तिकरण: विशेष रूप से महिलाओं द्वारा संचालित कई छोटे व्यापारों को लाभ हुआ।
निष्कर्ष
स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि और प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना दोनों ही भारत सरकार की ऐसी योजनाएं हैं, जो जमीनी स्तर पर बदलाव ला रही हैं। ये योजनाएं न केवल लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त कर रही हैं, बल्कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस कदम भी हैं। अगर इन योजनाओं का अधिक से अधिक प्रचार और प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए, तो इससे लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
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