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भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), जिसे आमतौर पर पूसा संस्थान कहा जाता है, ने चने की एक नई और अत्याधुनिक किस्म ‘पूसा चना 4037 (अश्विनी)’ विकसित की है। यह किस्म किसानों के लिए एक वरदान साबित हो सकती है, क्योंकि इसमें बेहतर पैदावार के साथ-साथ रोगों से लड़ने की शक्ति भी अधिक है।

किस्म की प्रमुख विशेषताएँ

  • उच्च पैदावार वाली किस्म
  • पूसा चना 4037 की खास बात इसकी उच्च उत्पादकता है।
  • यह किस्म पारंपरिक किस्मों की तुलना में 20-25% अधिक उपज देने में सक्षम है।
  • किसान की आमदनी में सीधा लाभ होगा।

रोग प्रतिरोधक क्षमता

  • इस किस्म को खासतौर पर उन रोगों से बचाव के लिए विकसित किया गया है जो चने की फसल को बर्बाद कर देते हैं। जैसे कि फ्यूजेरियम विल्ट (Fusarium wilt) और ड्राई रूट रॉट (Dry Root Rot)।
  • अश्विनी किस्म में इन रोगों के प्रति बेहतर प्रतिरोधक क्षमता पाई गई है।

कम समय में पकने वाली फसल

  • यह किस्म मध्यम अवधि में तैयार हो जाती है, जिससे किसान दूसरे रबी या खरीफ फसलों की प्लानिंग कर सकते हैं।
  • इससे खेती चक्र में लचीलापन और ज्यादा मुनाफा संभव हो पाता है।

किसानों के लिए लाभ

  1. कम लागत में अधिक मुनाफा
  • अश्विनी किस्म कम रोगों से प्रभावित होती है, जिससे रसायनों और दवाइयों की लागत कम आती है।
  • साथ ही उच्च पैदावार होने के कारण लाभ भी ज्यादा होता है।

जलवायु के प्रति सहनशील

  • पूसा चना 4037 को इस तरह से तैयार किया गया है कि यह विभिन्न जलवायु परिस्थितियों में भी अच्छा प्रदर्शन कर सके।
  • यह अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है।

प्रसंस्करण और उपभोक्ता अनुकूलता

  • इस किस्म के दाने मध्यम आकार के और अच्छी गुणवत्ता वाले होते हैं, जिससे यह प्रसंस्करण (Processing) और बाज़ार की दृष्टि से भी बहुत उपयुक्त है।

वैज्ञानिकों की मेहनत का नतीजा

  • पूसा चना 4037 ‘अश्विनी’ को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के वैज्ञानिकों ने लंबे अनुसंधान और परीक्षण के बाद विकसित किया है।
  • इसके पीछे उद्देश्य यह था कि किसानों को ऐसी किस्म उपलब्ध कराई जाए जो टिकाऊ, लाभदायक और रोग मुक्त हो।

निष्कर्ष: चने की खेती को नई दिशा देने वाली किस्म

पूसा चना 4037 (अश्विनी) निश्चित रूप से चने की खेती को एक नया मुकाम देने में सक्षम है। इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता, उच्च पैदावार और कम लागत में अधिक मुनाफे की विशेषताएँ इसे अन्य किस्मों से अलग बनाती हैं। आने वाले समय में यह किस्म देशभर के किसानों के लिए एक नई आशा बन सकती है।

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