किसान भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन उनकी आय हमेशा चिंता का विषय रही है। सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने और खेती को आधुनिक बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। 2013-14 में कृषि और किसान कल्याण विभाग का बजट 21,933 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 122,528 करोड़ रुपये हो गया है। यह दिखाता है कि सरकार किसानों के कल्याण के लिए निवेश बढ़ा रही है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह निवेश किसानों की जिंदगी में कोई बड़ा बदलाव ला पा रहा है?
सरकार की 28 योजनाएं: किसानों के लिए कितनी फायदेमंद?
लोकसभा में सरकार ने बताया कि किसानों की मदद के लिए 28 मुख्य योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनमें कुछ प्रमुख योजनाएं इस प्रकार हैं:
🔹प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN): किसानों को सीधे वित्तीय सहायता
🔹प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (PM-KMY): किसानों के लिए पेंशन योजना
🔹प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY): फसल खराब होने पर बीमा सुरक्षा
🔹संशोधित ब्याज सहायता योजना (MISS): किसानों को कम ब्याज पर लोन
🔹कृषि अवसंरचना कोष (AIF): कृषि ढांचे के विकास के लिए फंड
🔹किसान उत्पादक संगठन (FPOs): किसानों के समूह बनाकर उन्हें सशक्त बनाना
🔹राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन (NBHM): शहद उत्पादन को बढ़ावा
🔹प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन (NMNF): जैविक खेती को प्रोत्साहित करना
🔹डिजिटल कृषि मिशन: खेती में आधुनिक तकनीक का उपयोग
इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और खेती को टिकाऊ बनाना है।
किसानों की आय कितनी बढ़ी?
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की रिपोर्ट के अनुसार, 2016-17 से 2020-21 के बीच 75,000 किसानों की आय दोगुनी से भी ज्यादा बढ़ी। राज्यों में किसानों की आय में लद्दाख में 125.44% और अंडमान व निकोबार में 271.69% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और पुडुचेरी में 200% से ज्यादा की वृद्धि हुई। अधिकांश राज्यों में यह बढ़ोतरी 150 से 200% के बीच रही।
खेती के अलावा अन्य स्रोतों से भी बढ़ी आय
रिपोर्ट के मुताबिक, कई राज्यों में किसानों की आय का मुख्य स्रोत बदल रहा है:
🔹बागवानी (Horticulture): हिमाचल प्रदेश, केरल और गोवा में 60% से ज्यादा किसानों की आय बागवानी से आई।
🔹पशुपालन (Animal Husbandry): असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और नागालैंड में यह प्रमुख आय स्रोत बना।
🔹मछली पालन (Fisheries): ओडिशा और अंडमान व निकोबार में यह मुख्य रूप से आय का जरिया रहा।
🔹फसल उत्पादन (Crop Production): पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में अब भी फसलें आय का मुख्य स्रोत हैं।
छोटे और बड़े किसानों पर योजनाओं का असर
सरकार की योजनाओं का असर अलग-अलग वर्गों के किसानों पर पड़ा है। हरियाणा में छोटे किसानों की आय में 298.10% की वृद्धि हुई, जबकि उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और असम में यह 200% से ज्यादा बढ़ी। अंडमान व निकोबार और पुडुचेरी में मध्यम किसानों की आय में 273.86% की वृद्धि देखी गई। बड़े किसानों की बात करें तो पश्चिम बंगाल (377.39%) और पुडुचेरी (405.26%) में सबसे ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई।
ग्रामीण भारत में औसत किसान की आय
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSSO) के 2019 के सर्वे के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में खेती करने वाले एक परिवार की औसत मासिक आय 10,218 रुपये थी। हालांकि, 2023-24 के नए सर्वे के अनुसार, गांवों में प्रति व्यक्ति मासिक खर्च 4,122 रुपये और शहरों में 6,996 रुपये हो गया है। इसका मतलब है कि गांव और शहर की आर्थिक स्थिति में अभी भी बड़ा अंतर है।
क्या सरकार की योजनाएं किसानों की जिंदगी बदल रही हैं?
सरकार की योजनाओं ने कई किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी की है, खासकर बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन के क्षेत्र में। हालांकि, पारंपरिक फसलों से होने वाली आय में गिरावट देखी गई है। छोटे किसानों को योजनाओं से फायदा मिला है, लेकिन बड़े किसानों को अधिक लाभ हुआ है।
कुल मिलाकर, सरकार की योजनाएं किसानों की मदद कर रही हैं, लेकिन अभी भी व्यापक सुधार की जरूरत है। खेती में डिजिटल तकनीक, स्मार्ट कृषि उपकरण और मार्केटिंग में सुधार से किसानों की आय को और अधिक बढ़ाया जा सकता है। भविष्य में, यदि इन योजनाओं को और प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, तो किसानों की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार हो सकता है।
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