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भारत में छोटे किसानों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिनमें बदलते मौसम, आर्थिक तंगी, बाजार की अस्थिरता और संसाधनों की कमी शामिल है। किसानों की आय बढ़ाने और खेती को टिकाऊ और आधुनिक बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि, भारतीय किसान और AI का रिश्ता अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन धीरे-धीरे यह मजबूत हो रहा है।

खेती में आने वाली प्रमुख चुनौतियां

भारतीय किसानों को अक्सर मौसम की अनिश्चितताओं से जूझना पड़ता है। कभी बारिश न होने से सूखा पड़ जाता है, तो कभी जरूरत से ज्यादा बारिश फसल बर्बाद कर देती है। कीटों और बीमारियों की वजह से भी उत्पादन प्रभावित होता है। इसके अलावा, छोटे किसानों को खेती के लिए पर्याप्त पूंजी नहीं मिल पाती, जिससे उन्हें स्थानीय साहूकारों से ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज लेना पड़ता है। कटाई के बाद भी लगभग 40% तक फसल खराब हो जाती है, क्योंकि सही भंडारण और बाजार तक पहुंच की सुविधा नहीं होती। किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल पाता, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है।

AI कैसे बदल सकता है खेती का तरीका?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किसानों के लिए वरदान साबित हो सकता है, क्योंकि यह उन्हें बेहतर फसल उत्पादन, लागत में कमी और प्राकृतिक आपदाओं से बचने में मदद कर सकता है। AI की मदद से:

🔹सटीक कृषि (Precision Farming): फसलों को सही मात्रा में पानी, खाद और कीटनाशक देने की सुविधा मिलती है।
🔹जलवायु आधारित खेती: AI मौसम की सटीक भविष्यवाणी कर किसानों को फसल सुरक्षा के उपाय करने में मदद करता है।
🔹कीट और रोग नियंत्रण: AI आधारित एप्लिकेशन और सेंसर बीमारियों और कीटों का जल्दी पता लगाकर समाधान सुझाते हैं।
🔹फसल मूल्य और बाजार की जानकारी: किसानों को बाजार की मांग और फसल के उचित दाम की जानकारी मिलती है, जिससे वे सही समय पर बिक्री कर सकते हैं।

भारत में खेती में AI का उपयोग

भारत सरकार ने AI आधारित कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जो किसानों को बेहतर उत्पादन और आय बढ़ाने में मदद कर रही हैं।

  1. पर ड्रॉप मोर क्रॉप (PDMC):

🔹2015-16 में शुरू की गई यह योजना किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित करती है।
🔹इससे पानी की बचत और उत्पादन में बढ़ोतरी होती है।

  1. किसान ई-मित्र:

🔹यह एक AI आधारित चैटबॉट है, जो किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देता है।
🔹यह कई भारतीय भाषाओं में काम करता है, जिससे ज्यादा किसानों तक इसकी पहुंच हो सके।

  1. नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम:

🔹AI और मशीन लर्निंग के जरिये फसलों में लगने वाले कीटों और बीमारियों का पूर्वानुमान लगाया जाता है।
🔹इससे समय पर फसलों को बचाने के उपाय किए जा सकते हैं।

  1. AI आधारित फसल निगरानी सिस्टम:

🔹खेतों की सैटेलाइट इमेजिंग और मिट्टी की नमी का विश्लेषण कर किसानों को उनकी फसलों की स्थिति की जानकारी मिलती है।
🔹यह तकनीक गेहूं और धान की फसल की पैदावार बढ़ाने में कारगर साबित हुई है।

‘सागू बागू’ प्रोजेक्ट: तेलंगाना में AI से खेती में सफलता

तेलंगाना के खम्मम जिले में ‘सागू बागू’ प्रोजेक्ट चलाया गया, जिसमें बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और डिजिटल ग्रीन ने तेलंगाना सरकार के साथ मिलकर काम किया।

🔹7000 से ज्यादा किसानों को मिर्च की खेती में AI तकनीक से मदद मिली।
🔹प्रति एकड़ उत्पादन 21% बढ़ा और किसानों को 8% ज्यादा दाम मिला।
🔹9% कम कीटनाशक और 5% कम खाद का इस्तेमाल किया गया।
🔹किसानों की प्रति एकड़ आय में 66,000 रुपये (लगभग 800 USD) की बढ़ोतरी हुई, जिससे उनकी आय लगभग दोगुनी हो गई।

खेती में मशीनीकरण और ड्रोन का बढ़ता उपयोग

आजकल खेती में मशीनों और ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।

  1. कृषि मशीनीकरण पर उप-मिशन (SMAM):

🔹इस योजना के तहत किसानों को 40% से 50% तक सब्सिडी पर मशीनें दी जाती हैं।
🔹छोटे किसानों को कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) के जरिये किराए पर मशीनें लेने की सुविधा मिलती है।

  1. ड्रोन तकनीक:

🔹महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को ड्रोन उपलब्ध कराने के लिए सरकार 1261 करोड़ रुपये की योजना चला रही है।
🔹किसानों को कीटनाशकों के छिड़काव और खेतों की निगरानी में मदद मिलती है।
🔹यह नए रोजगार के अवसर भी पैदा कर रहा है।

उत्तर प्रदेश में AI और स्मार्ट खेती के लिए योजनाएं

उत्तर प्रदेश में 2014-15 से 2024-25 तक कृषि मशीनीकरण पर 656.56 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

🔹176,722 मशीनें और उपकरण किसानों को सब्सिडी पर दिए गए।
🔹10,769 कस्टम हायरिंग सेंटर बनाए गए हैं।
🔹पराली प्रबंधन योजना के तहत 70,500 से ज्यादा मशीनें किसानों को दी गईं।
🔹500 ड्रोन खरीदे गए, जिनमें से 32 ड्रोन उत्तर प्रदेश के SHGs को दिए गए।

मौसम की मार से फसल बचाने में AI की भूमिका

भारत के 651 कृषि जिलों में किए गए अध्ययन के अनुसार, 310 जिले जलवायु परिवर्तन से गंभीर रूप से प्रभावित हैं, जबकि 109 जिलों में जोखिम सबसे अधिक है।

🔹ग्रामीण कृषि मौसम सेवा (GKMS) के तहत IMD हर जिले के लिए 5 दिनों का मौसम पूर्वानुमान जारी करता है।
🔹130 एग्रोमेट फील्ड यूनिट (AMFUs) किसानों को मौसम आधारित सलाह देते हैं।

AI और किसानों के बीच प्रमुख चुनौतियां

AI तकनीक का खेती में उपयोग अभी भी सीमित है, क्योंकि:

  1. डिजिटल साक्षरता की कमी:

🔹कई किसानों को स्मार्टफोन और इंटरनेट चलाने में कठिनाई होती है।

  1. इंटरनेट कनेक्टिविटी:

🔹ग्रामीण इलाकों में तेज इंटरनेट की कमी AI आधारित कृषि समाधानों को अपनाने में बाधा बनती है।

  1. भाषा अवरोध:

🔹अधिकांश AI टूल्स अंग्रेजी में उपलब्ध हैं, जिससे हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के किसानों के लिए इनका उपयोग कठिन हो जाता है।

  1. उच्च लागत:

🔹कुछ AI उपकरण, जैसे ड्रोन और सेंसर, महंगे होने के कारण छोटे किसानों के लिए सुलभ नहीं हैं।

खेती में AI का भविष्य

AI धीरे-धीरे भारतीय खेती को स्मार्ट और अधिक उत्पादक बना रहा है। AI आधारित उपकरणों और डिजिटल तकनीकों के प्रसार से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। हालांकि, इसके लिए सरकार को डिजिटल अवसंरचना मजबूत करने, किसानों को प्रशिक्षण देने और AI तकनीक को भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने की जरूरत है। अगर यह सब होता है, तो AI खेती के भविष्य को पूरी तरह से बदल सकता है और किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकता है।

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