images2822928429

दक्षिण एशिया में पाई जाने वाली एक विशेष सब्जी कंदरू (जिसे टिंडोरा या कुंदरू भी कहा जाता है) किसानों के लिए उच्च लाभदायक खेती का विकल्प बन सकती है। यह बेल वाली सब्जी है, जो गर्म और आर्द्र जलवायु में आसानी से उगाई जा सकती है। इसकी खेती मुख्य रूप से भारत, बांग्लादेश और दक्षिण एशिया के अन्य हिस्सों में होती है।

कंदरू की सबसे खास बात यह है कि यह सालभर उत्पादन देती है, जिससे किसानों को निरंतर आय मिलती रहती है। उचित देखभाल और सही तकनीक से खेती करने पर किसान 1 एकड़ में सालभर में 20 लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं।

जलवायु और मिट्टी की आवश्यकताएं

कंदरू की खेती के लिए गर्म और आर्द्र जलवायु सबसे उपयुक्त होती है। इसकी खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी आदर्श मानी जाती है।

pH मान: 6.0-7.5

जलवायु: गर्म और आर्द्र

सिंचाई: गर्मी में 4-5 दिन के अंतराल पर, मानसून में जलभराव से बचाव जरूरी

कैसे करें कंदरू की खेती?

कंदरू की खेती मुख्य रूप से कटिंग (कलम) या जड़ रहित बेल के टुकड़ों से की जाती है। अच्छे उत्पादन के लिए स्वस्थ और रोगमुक्त कटिंग का चयन करना जरूरी होता है।

बुवाई की विधि:

बीज बोने की जगह: 30-45 सेमी की दूरी पर और 1-2 इंच गहराई में

कतारों की दूरी: 1.5-2 मीटर

खाद और उर्वरक: जैविक खाद, गोबर खाद और वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग

उर्वरक संतुलन: नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग

फसल की कटाई और उत्पादन

कंदरू की बेल से फल 75-90 दिनों में तैयार हो जाते हैं। 2-3 दिन के अंतराल में तुड़ाई करने से लगातार उत्पादन प्राप्त होता है। एक हेक्टेयर में 8-12 टन तक उत्पादन हो सकता है।

कंदरू की खेती से कितनी होगी कमाई?

कंदरू की बाजार में अच्छी मांग होती है और यह सालभर उत्पादन देती है, जिससे किसानों को निरंतर आय मिलती रहती है। सही देखभाल और जैविक तरीकों के उपयोग से 1 एकड़ जमीन से सालभर में 20 लाख रुपये तक की कमाई संभव है।

अगर आप कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाना चाहते हैं तो कंदरू की खेती एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है। यह जल्दी बढ़ने वाली, कम मेहनत वाली और सालभर आय देने वाली फसल है। यदि किसान सही जलवायु, मिट्टी और जैविक तकनीकों का सही उपयोग करें, तो यह खेती उनके लिए अधिक लाभदायक और टिकाऊ साबित होगी।

Tumblr

Read More


Discover more from अपना रण

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Discover more from अपना रण

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading