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गर्मियों के मौसम में पशुओं के लिए साफ, ठंडा और ताजा पानी उतना ही जरूरी हो जाता है जितना कि पोषक चारा। अगर पानी की आपूर्ति में थोड़ी भी लापरवाही हुई, तो 45 डिग्री तापमान और लू भरी गर्म हवाओं में पशुओं को heat stress, dehydration और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसका सीधा असर दूध उत्पादन, पाचन क्षमता और प्रजनन स्वास्थ्य पर पड़ता है, जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

गर्मी में पानी की कमी से होने वाले लक्षण

पशुओं में water deficiency के कुछ साफ संकेत होते हैं, जिन्हें समय रहते पहचानना जरूरी है:

🔹भूख में कमी आना

🔹सुस्ती और कमजोर शरीर

🔹गाढ़ा पेशाब

🔹वजन घटने लगना

🔹आंखों और चमड़ी का सूखना

🔹दूध उत्पादन में गिरावट

🔹चमड़ी को उंगलियों से उठाने पर देर से वापस लौटना

ये सभी लक्षण यह संकेत देते हैं कि पशु को पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल रहा।

पानी की कमी से होने वाले नुकसान

पानी की कमी से पशुओं का digestion process कमजोर हो जाता है और वह चारा ठीक से नहीं खा पाते। शरीर के ज़रूरी पोषक तत्व मल-मूत्र के माध्यम से बाहर निकलने लगते हैं। इसके अलावा, reproduction capacity पर असर पड़ता है और रक्त गाढ़ा होने लगता है। छोटे बछड़ों को डायरिया और पेचिश जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जबकि बड़े पशुओं को दस्त की समस्या हो सकती है।

बचाव के उपाय: पानी और हरे चारे से करें राहत

Animal Experts के अनुसार, गर्मियों में पशुओं को हरा चारा अधिक मात्रा में खिलाना चाहिए, क्योंकि 1 किलो हरे चारे से 3–4 लीटर तक पानी की जरूरत पूरी हो सकती है। साथ ही, पानी हमेशा साफ, ठंडा और खुली छाया में रखें ताकि पशु किसी भी समय पी सकें।

निष्कर्ष

गर्मियों में पशुओं का ख्याल रखना उतना ही जरूरी है जितना खुद का। यदि पानी और पोषण पर ध्यान न दिया जाए तो पशु बीमार हो सकते हैं और उनकी उत्पादकता पर नकारात्मक असर पड़ता है। समय पर सावधानी बरतकर पशुओं को स्वस्थ रखा जा सकता है, जिससे न केवल उनका जीवन बेहतर होगा बल्कि पशुपालकों को भी लाभ मिलेगा।


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