British Rule: भारत पर ब्रिटिश शासन की शुरुआत व्यापार के बहाने हुई, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने पूरे देश पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। यह प्रक्रिया सैकड़ों वर्षों तक चली और रणनीति, कूटनीति तथा सैन्य बल के संयोजन से अंग्रेजों ने भारत को अपना उपनिवेश बना लिया। आइए जानते हैं कि कैसे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत पर कब्जा(British Rule) जमाया।
ईस्ट इंडिया कंपनी की भारत में एंट्री (1608)
1608 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारी पहली बार भारत आए। वे गुजरात के सूरत बंदरगाह पर पहुंचे, जहां से उन्होंने भारत में अपने व्यापार की शुरुआत करने की योजना बनाई। कंपनी के जहाज के कप्तान विलियम हॉकिंस ने मुगल बादशाह जहांगीर से मुलाकात कर सूरत में फैक्ट्री खोलने की अनुमति मांगी, लेकिन जहांगीर ने यह अनुरोध अस्वीकार कर दिया।(British Rule)
इसके बाद, अंग्रेजों ने उन क्षेत्रों की ओर रुख किया जहां मुगलों का सीधा प्रभाव नहीं था। 1611 में आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम में उन्हें पहली बार फैक्ट्री खोलने की अनुमति मिली।
जहांगीर से व्यापार की इजाजत(British Rule, 1615)
1615 में ब्रिटिश सरकार की ओर से सर थॉमस रो ने जहांगीर से मुलाकात की। उन्होंने बादशाह को कीमती उपहार दिए, जिससे जहांगीर प्रसन्न हुए और अंग्रेजों को भारत में व्यापार करने की अनुमति मिल गई।
इसके बाद कंपनी ने तेजी से विस्तार किया और मुंबई, मद्रास, पटना, अहमदाबाद और आगरा जैसे शहरों में व्यापारिक केंद्र स्थापित कर लिए। वे मसाले, कपास, नील, चाय और अफीम के व्यापार में शामिल हो गए।
कंपनी का बढ़ता प्रभाव (British Rule, 1670)
1670 में ब्रिटिश राजा चार्ल्स द्वितीय ने ईस्ट इंडिया कंपनी को अपनी मुद्रा छापने और निजी सेना रखने की अनुमति दे दी। इस फैसले ने कंपनी को एक व्यापारिक संगठन से एक सैन्य शक्ति में बदल दिया। अब ब्रिटिश धीरे-धीरे भारत में राजनीतिक दखल देने लगे और स्थानीय शासकों के बीच अपने हित साधने लगे।
मुगल दरबार में पकड़ बनाना (1714)
1714 से अंग्रेज लाल किले में नियमित रूप से आने लगे। वे मुगल बादशाह को झुककर सलामी देते और धीरे-धीरे दरबार में अपना प्रभाव बढ़ाते गए। इस दौरान, भारत में मराठों, अफगानों और अन्य स्थानीय शक्तियों का दबदबा बढ़ रहा था, जिससे मुगल साम्राज्य कमजोर होता जा रहा था। अंग्रेजों ने इस अवसर का फायदा उठाया।
मराठों और अंग्रेजों की टकराहट (1803)
1803 में मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय ने मराठों से बचने के लिए अंग्रेजों से सैन्य सहायता मांगी। यह फैसला उनके लिए सबसे बड़ी भूल साबित हुआ। 11 सितंबर 1803 को पटपड़गंज (अब पूर्वी दिल्ली) में अंग्रेजों और मराठों के बीच युद्ध हुआ। इस युद्ध में अंग्रेजों ने मराठों को हरा दिया और दिल्ली पर अप्रत्यक्ष रूप से शासन(British Rule) करने लगे। अब शाह आलम द्वितीय अंग्रेजों की पेंशन पर जीने लगे, जिससे स्पष्ट हो गया कि मुगल सत्ता केवल नाममात्र की रह गई थी।
1857 की क्रांति और ब्रिटिश शासन की स्थापना
1857 में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम (जिसे सिपाही विद्रोह भी कहा जाता है) हुआ। इस विद्रोह में भारतीय सैनिकों और स्थानीय शासकों ने अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोला, लेकिन सफल नहीं हो सके।(British Rule)
1857 की क्रांति के बाद, अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर को अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर लिया और रंगून (अब म्यांमार) भेज दिया। इसी के साथ, मुगल साम्राज्य का अंत हो गया और भारत पूरी तरह ब्रिटिश शासन के अधीन आ गया।
निष्कर्ष
अंग्रेजों ने भारत में व्यापार के बहाने प्रवेश किया और धीरे-धीरे राजनीति और सैन्य शक्ति का उपयोग करके पूरे देश पर कब्जा कर लिया। उन्होंने भारतीय शासकों की आपसी फूट का फायदा उठाया और चालाकी से अपने साम्राज्य का विस्तार किया। 1857 के विद्रोह के बाद, भारत सीधे ब्रिटिश सरकार के नियंत्रण में आ गया और लगभग 200 वर्षों तक अंग्रेजों के अधीन रहा।
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