Rangila Badshah: भारत के इतिहास में कई शासकों ने अपनी वीरता और कुशल शासन से नाम कमाया, लेकिन कुछ शासक अपनी कमजोरियों के कारण भी जाने जाते हैं। मुहम्मद शाह रंगीला उन्हीं में से एक था, जिसने अपने ऐशो-आराम और लापरवाही के कारण मुगल साम्राज्य को भारी क्षति पहुंचाई। उसकी इसी कमजोरी का फायदा उठाकर नादिर शाह ने दिल्ली को लूट लिया और इतिहास के सबसे बड़े कत्लेआम में से एक को अंजाम दिया।
रंगीले बादशाह (Rangila Badshah) की अय्याशी
1719 में मुहम्मद शाह रंगीला मुगल साम्राज्य के तख्त पर बैठा, लेकिन वह शासन चलाने की बजाय मनोरंजन, संगीत, इश्क-मोहब्बत और खेल-कूद में ज्यादा रुचि रखता था। घुड़दौड़, मुर्गों की लड़ाई और नृत्य उसका प्रिय शगल था। कहा जाता है कि वह कभी-कभी महिलाओं के वस्त्र पहनकर दरबार में नाचता भी था।
दिल्ली: दुनिया का सबसे अमीर शहर
उस समय मुगलों का साम्राज्य काबुल से बंगाल तक फैला हुआ था। दिल्ली दुनिया के सबसे समृद्ध शहरों में से एक था, जिसकी आबादी लंदन और पेरिस से भी अधिक थी। यहां अपार धन-संपत्ति थी, जो विदेशी आक्रमणकारियों को आकर्षित करती थी।
नादिर शाह की लूट की योजना
ईरान (तत्कालीन पर्शिया) का शासक नादिर शाह, जो एक क्रूर और शक्तिशाली योद्धा था, दिल्ली की अपार संपत्ति देखकर ललचा गया। उसने 36,000 घुड़सवार सैनिकों के साथ भारत पर आक्रमण करने की योजना बनाई।
जब नादिर शाह ने दिल्ली पर हमले की चेतावनी दी, तो मुहम्मद शाह रंगीला(Rangila Badshah) ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उसने नादिर शाह की चिट्ठी को शराब में डुबोते हुए कहा, “इस बेमतलब की चिट्ठी को शराब में बहा देना बेहतर है।”
दरबारियों ने उसे नादिर शाह की बढ़ती ताकत के बारे में चेतावनी दी, लेकिन रंगीला हमेशा कहता, “हनूज दिल्ली दूर अस्त” यानी “अभी दिल्ली बहुत दूर है।”(Rangila Badshah)
नादिर शाह का हमला और दिल्ली का विनाश
9 मार्च 1739 को नादिर शाह की सेना बिना किसी बड़े संघर्ष के दिल्ली में घुस गई और मुगल महल पर कब्जा कर लिया। मुगल सेना ने बिना लड़े ही हथियार डाल दिए।
इसके बाद दिल्ली में एक अफवाह फैली कि नादिर शाह मारा गया है। गुस्साई जनता ने फारसी सैनिकों पर हमला कर दिया। बदले में नादिर शाह ने खौफनाक कत्लेआम का आदेश दे दिया।
दरियागंज इलाके में हुए हमले में नादिर शाह का खास वजीर मारा गया, जिससे वह और भड़क उठा। इसके बाद उसने पूरे शहर में हत्याओं का सिलसिला शुरू कर दिया। हजारों निर्दोष लोगों को बेरहमी से मार दिया गया।
दिल्ली की लूट और कोहिनूर हीरे की विदाई
लगभग 58 दिनों तक नादिर शाह ने दिल्ली को बेरहमी से लूटा। उसने 32 करोड़ रुपये, हजारों हाथी, अनगिनत कीमती आभूषण और सोने-चांदी के खजाने के अलावा 100 राजमिस्त्री और 200 बढ़ई भी जबरन अपने साथ ले गया।(Rangila Badshah)
इस लूट का सबसे कीमती हिस्सा था कोहिनूर हीरा, जिसे नादिर शाह पर्शिया ले गया। इसी के बाद यह बहुमूल्य रत्न भारत से हमेशा के लिए खो गया।
रंगीले बादशाह(Rangila Badshah) की वापसी
दिल्ली को पूरी तरह लूटने के बाद नादिर शाह ने मुहम्मद शाह रंगीला को दोबारा गद्दी सौंप दी। हालांकि, यह गद्दी अब केवल नाम मात्र की थी, क्योंकि मुगल साम्राज्य की प्रतिष्ठा और शक्ति को गहरा आघात लग चुका था।
निष्कर्ष
मुहम्मद शाह रंगीला(Rangila Badshah) की लापरवाही और विलासिता ने मुगल साम्राज्य को कमजोर कर दिया, जिससे विदेशी आक्रमणकारियों को खुला निमंत्रण मिला। नादिर शाह की इस लूट ने न केवल दिल्ली को बर्बाद किया बल्कि मुगलों के पतन की शुरुआत भी कर दी। इतिहास गवाह है कि जब शासक अपनी जिम्मेदारियों को भूलकर विलासिता में डूब जाते हैं, तो साम्राज्य अधिक दिनों तक टिक नहीं पाते।
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